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हममे से हर एक व्‍यक्‍ति रोजाना ATM यानी की आटोमेटिड टैलर मशीन का उपयोग करता है। लेकिन आपको पता है ATM मशीन का अविष्कार कैसे हुआ? किसने बनाया इसे? और क्या है इसका भारत से कनेक्शन? और कहां इससे पहली बार पैसे निकाले गए? आइए आपको बताते हैं कैसे हुआ ATM मशीन का अविष्कार? और किस भारतीय ने इसे बनाया।

आज के दौर में जबकि पूरी दुनिया में बैंकिंग व्यवस्था बेहद एडवांस हो चुकी है और यहां तक कि मोबाइल पर आ चुकी है, वहां हर व्‍यक्‍ति ATM को न केवल ठीक से जानता है बल्कि उसका प्रयोग भी करता है। भारत में भी हर बैंक का ATM है और यह अब बेहद अनिवार्य जरूरत बन गई है।

ATM का पूरा नाम आटोमेटिड टैलर मशीन यानी की स्वचालित गणक मशीन है। भारत में इसे ATM ही कहा जाता है जबकि यूरोप, अमेरिका व रूस आदि में आटोमेटिक बैंकिंग मशीन, कैश पाइंट, होल इन द वॉल, बैंनकोमैट कहा जाता है।

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ATM एक ऐसी मशीन है, जिसका कनेक्शन कंप्यूटर से होता है। यह निर्धारित बैंकों के कस्टमर को कैश या नकदी पैसे उपलब्ध कराने में सहायक होता है। खास बात यह है कि इस कैश ट्रांजेक्‍शन में कस्टमर को कैशियर, क्लर्क या बैंक टैलर आवश्यकता नहीं होती है।

दुनिया में ATM मशीन के अविष्कार का विचार एक साथ कई देशों में आया। यह जापान, स्वीडन, अमेरिका और इंग्लैंड में जन्म और विकसित हुआ। हालांकि सबसे पहले इसका प्रयोग कहां शुरू हुआ यह अभी तय नहीं हो पाया है।

बहरहाल, देखा जाए तो विश्व में ATM के अविष्कार को लेकर कई देशों के अलग-अलग दावे हैं। लंदन और न्यूयॉर्क में सबसे पहले इससे प्रयोग में लाए जाने के उल्लेख मिलते हैं। 1960 के दशक में इसे बैंकोग्राफ के नाम से जाना जाता था।

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कुछ दावों के अनुसार ATM का सबसे पहले प्रयोग 1961 में सिटी बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के ग्राहकों के लिए किया गया था। हालांकि ग्राहकों ने तब इसे अस्वीकृत कर दिया था। इस कारण छह माह के बाद ही इससे हटा लिया गया था। इसके बाद टोक्यो, जापान में 1966 में इसका उपयोग हुआ था।

यूरोप में यानी की ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ATM का प्रयोग किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इंग्लैंड ने प्रयोग में लाई गई मशीन के अविष्कार का श्रेय जॉन शेपर्ड को जाता है। हालांकि इसके विकास में इंजीनियर डे ला रूई का भी महत्त्वपूर्ण योगदान है।


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जॉन शेपर्ड का जन्म। ब्रिटिशकालीन भारत में ही हुआ था। जॉन भारत में पूर्वोत्तचर राज्य असम के शिलांग और वर्तमान में मेघालय के शिलांग के जन्में थे। जॉन शेफर्ड बैरन का जन्म 23 जून 1925 को मेघालय के शिलांग में हुआ था। उनके स्कॉटिश पिता विलफ्रिड बैरन चीफ इंजीनियर थे।

ATM बनाने वाले जॉन शेफॉर्ड को ही एटीएम के पिन का भी अविष्कारक कहा गया। उन्होंने ही चार नंबर के पिन का भी अविष्कार किया, जिसका आज भी प्रचलन है। इसका प्रयोग 27 जून, 1967 में लंदन के बार्केले बैंक ने किया था।

जॉन शेफर्ड बैरन की मृत्यु् हाल ही में यानी की 15 मई 2010 को हुई थी।

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