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गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाए !
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दिये बताए !!

यह कबीरदास का लोकप्रिय दोहा है ! इसमे कहा गया है की गोविंद की पहचान करना गुरु ही बताते है !!
इंसान स्वय की शक्तियों से परिचित हो ! इसके लिये गुरु की ज़रूरत पड़ती है ! स्वयं कबीर एक रात जब गँगा तट की सीढ़ीयों पर पड़े थे तो उनके शरीर रामानंद जी के पैर पड़ गये ! तब रामानंद जी के मुख से राम राम शब्द निकल पड़े ! उसी राम नाम को कबीर ने अपना दीक्षा मंत्र मान लिया और रामानंद को अपना गुरु स्वीकार कर लिया ! कहते है की यह रामानंद जी के ही विचार थे ! जिन्होने  कबीर को धर्म से ऊपर उठकर देखने की शक्ति प्रदान की !

ऊर्जा से लबालब थे स्वामी विवेकानंद ! उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने का काम उनके गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने किया ! गुरु के बताए मार्ग पर चलने के कारण ही ही विवेकानंद ने मानव और राष्ट्रधर्म के बारे मे जन - जन को बताया कर्मयोग के माह्यम से सम्पूर्ण विश्व को वेदांत दर्शन से परिचित कराया !

गुप्त काल मे चंद्रगुप्त के शासन मे भारत एक संप्रभु और शक्तिसम्पन्न देश बना ! यह तभी हो पाया जब आचार्य चाडक्य ने चंद्रगुप्त के मन मे अखंड भारत के प्रति प्रेम के बीज बोए ! इनके आलावा और भी कई महान लोग है ! जिनका जीवन गुरु के दिशानिर्देश से बदल गया ! हम भले ही स्वयं के अनुभवो से सीख लेकर आगे बढ़ते रहे पर हमारे जीवन मे गुरु की महत्वता सदेव बनी रहेगी !

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