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दूरबीन का आविष्कार 

दूरबीन को अगर आपने प्रयोग किया होगा तो दूरबीन आपको किसी जादू से कम नहीं लगता होगा | क्योकि दूरबीन दूर की वस्तुवों को पास और पास की वस्तुवों को दूर दिखाती है | तो आप जरूर जानना चाहते होंगे इस जादू के बारे मे मतलब दूरबीन के बारे मे या दूरबीन का आविष्कार कैसे हुआ |



दूरबीन बनाने का श्रेय होलेण्ड शहर के एक व्यापारी को जाता है पर इसके पीछे छुपी है एक कहानी तो चलिए जानते है दूरबीन बनने के पीछे की कहानी |



कहते है होलेण्ड शहर एक व्यापारी रहता था जिसका कारोबार चश्मे बनाने का था | और इस व्यापारी का नाम Hans Lippershey था और साथ मे मेहनती भी | Hans Lippershey के पास कई तरह के सुंदर सुंदर काँच थे | Hans Lippershey का एक बेटा भी था जो बहुत ही शैतान था | बेटा रंग बिरंगे काँच के टुकड़ो से दिन भर खेलता रहता और उन पर सूरज की रोशनी डाल कर सबको परेशान किया करता पर लड़का था दिमाग का तेज और लड़के को कुछ भी जानने के लिए जिज्ञाशा होती रहती थी | 

एक दिन स्कूल की छुट्टी थी तो Hans Lippershey ने अपने बेटे को अपने साथ अपनी दुकान पर ले गया और लड़के के सामने काँच के टुकड़ो की एक बड़ी सी टोकरी रख दी और लड़के से कहा इन सब कांचो को अलग अलग टोकरी मे एक साथ करके रख दे |

टोकरी मे छोटे बड़े रंग बिरंगे कई तरह के काँच के टुकड़े थे | और यह काँच के टुकड़े दिखने मे बहुत सुंदर लग रहे थे | जिन्हे देखकर लड़के के मन मे सवाल आ रहा था की यह काँच  किसने बनाया होगा | 


अब लड़के ने यही सवाल अपने पिता जी से पूछ लिया की यह काँच किसने बनाया ? या फिर यह जमीन से पैदा होता है |

Hans Lippershey ने लड़के से कहा की यह जमीन से पैदा नहीं होता और काँच की खोज तुम जैसे एक बच्चे ने खेल खेल मे कर दिया |

बेटा ने आगे पूछा वह कैसे ?

Hans Lippershey ने कहा की मिस्र देश का रेगिस्तान बहुत बड़ा है वहा ऊँटो के काफिले कई दिनो तक चलते है | और अपनी सुइधा अनुसार रेगिस्तान मे ही पड़ाव [ रुक जाना ] डाल लेते है | ऐसा आप मान सकते है की इन काफिलो का रेगिस्तान मे ही दिन होता है और वही रात | आप कह सकते है की इनका रेगिस्तान ही घर होता है | यह जहा रुकते थे वही खाना बनाते है और आराम करते है | फिर धीरे धीरे आगे बढ़ते है |



ऐसे ही एक काफिले मे बहुत से लोग ओर बच्चे थे | और चारो तरफ रेगिस्तान, पानी का कही नामो निशान नहीं, रात हुई तो काफिले ने रेट पर चूल्हा बनाया और फिर उस पर खाना बनाया और खाना बनाने के बाद चूल्हा बुझा दिया फिर सब लोग खाना खाकर ठंडी रेट पर लेट गए | जब सवेरा हुआ सब लोग समान बांध कर आगे बढ्ने की तैयारी करने लगे और रात मे जहा खाना बनाया था वाहा कुछ बच्चे खेलने लगे | खेल खेल मे  कुछ बच्चे चूल्हे की राख़ वहाँ से हटा के इधर उधर फेकने लगे | अचानक एक बच्चे ने देखा की राख़ के नीचे कोई सख्त सी वस्तु है और वस्तु के आर पार रेत भी साफ दिखाई दे रहा है  | उस वस्तु को बच्चो ने पहले हैरानी से देखा फिर बड़े लोगो को बुलाकर उस वस्तु को दिखाया | उस वस्तु को देखकर बड़े लोग भी हैरान रह गए | उस वस्तु के ऊपर से सबने मिलकर जमी राख़ साफ साफ की | फिर उन्होने पाया की यह ऐसी वस्तु है जिसके आरपार देखा जा सकता है | सबने एक दूसरे से पूछा की क्या चूल्हा जलाने से पहले कोई चीज किसी ने राखी थी ? सबने यही कहा नहीं तो फिर उन्हे पता चला की रेत पिघल कर काँच बन गई है | फिर ऐसे रेत से काँच बनाना आरंभ हुआ || और यह केवल एक शैतान लड़के की वजह से हो पाया क्योकि अगर वह शैतान लड़का राख न हटाता तो कोई काँच के बारे मे न जान पाता |

अब Hans Lippershey की कहानी खत्म हो गई और उसने अपने बेटे से कहा अब मुझे परेशान करना बंद करो और जाओ अब बाकी के काँच के टुकड़े छाँट कर रखो | फिर बेटे ने टोकरी उठाई और बैठ कर काँच छांटने लगा | ऐसा करते करते लड़के ने काँच उठाया और उनके आरपार देखने लगा | एक के बाद एक काँच को लड़का उठाता ओर उनके आरपार देखता फिर उसने कई काँच को एक साथ उठाया और उनको मिलाकर देखने लगा ऐसा करते ही वह लड़का डर गया | क्योकि लड़के के सामने जो गिरजाघर का मीनार था वह लड़के को बिलकुल नजदीक दिख रही थी | लड़के को लगा यह कोई भरम है तो उसने फिर से देखा और लड़को को फिर मीनार बहुत ही पास नजर आई | अब लड़का सोचने लगा की यह बात अपने पापा को बताए या नहीं.... कही पापा गुस्सा न हो ... काही यह जादू वाला काँच तो नहीं | फिरसे देखने लगा लड़के को फिर वही नजर आया ..... अब वह चिल्लाया पापा .... इधर आओ यह जादू वाला काँच है  Hans Lippershey भाग के आए ओर लड़के के हाथ से काँच के टुकड़े लिए | जब  Hans Lippershey  ने काँच के आरपार देखा तो उस्ङ्को भी मीनार बहुत नजदीक दिखने लगी ओर फिर उन्होने ऐसा कई बार किया | लेकिन  Hans Lippershey जल्दी ही इस विज्ञान को समझ गए और वह खुश हुए और खुशी के मारे अपने बच्चे को उठा कर नाचने लगे | अब भी लड़का परेशान था और पापा से पूछा की क्या हुआ तब  Hans Lippershey  ने अपने  बेटे से बताया की बेटा तुमने अनजाने मे एक आविष्कार कर दिया है दूर की वस्तु नजदीक से देखने का तरीका खोज दिया है | अब हम एक यंत्र बनाएँगे इससे हमारा नाम भी दुनिया मे होगा |

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फिर  Hans Lippershey ने ठीक वैसे ही काँच को लगाकर एक दूरबीन बनाई और इस तरह दुनिया की पहली दूरबीन बनी |
लेकिन बधाई का असली हकधार  Hans Lippershey  का बेटा है जिसने अंजाने मे इतना बड़ा आविष्कार किया 

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