0
छिपकली - जी हा ! छिपकली से उग आएंगे इंसान के अंग शोधकर्ताओं ने एक आणविक विधि की पहचान की है जो salamanders छिपकली को अपने अंगों को फिर से उगाने में मदद करेगा। इस विधि या शोध से इंसानों में भी इसके परिणाम की व्याख्या कर सकता है।

Lizard Pic

Lizard will help organize human organisms again

Salamanders पूरे अंग को फिर से उगा सकते हैं, चाहे उनके अंगों को कितनी भी बार काटा गया हो। इसकी यह क्षमता एकदम यूनीक है क्योंकि salamanders के अंग में त्वचा, मांसपेशियां, और हड्डियां हैं। और ये प्राणी अपने अंग दुबारा बनाने के लिए ऊत्तकों को बदल सकता है।


यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन्होंने वर्तमान अध्ययन का आयोजन किया, पूरे अंग को फिर से उगाने की salamanders की क्षमता " ERK pathway " की वजह से है। इस ERK pathway को हमेशा एक्टिव रहने की जरूरत होती है ताकि ये salamanders अपने अंगों को वापस उगा सके।


शोधकर्ताओं ने कहा कि salamanders स्तनपायी कोशिकाओं में पूरी तरह से सक्रिय नहीं है। लेकिन, जब इसे प्रयोगशाला सेटिंग में सक्रिय रखा जाता है, तो कोशिकाओं में रिप्रोग्रामिंग की अधिक संभावना होती है और परिणामस्वरूप, ऊतकों को पुनर्जन्म हो पाता है। ERK pathway कोशिका के सतह पर प्रोटीन की मदद करता है जो सेल के नाभिक को संकेत भेजता है। आगे के शोध से शोधकर्ताओं ने मानव अंगों को फिर से उगाने में दद कर सकता है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि केवल कुछ ही जानवर शरीर के अंगों का पुनर्जन्म क्यों कर सकते हैं। हालांकि मनुष्य में पुनर्योजी क्षमता सीमित है, अन्य जीव, जैसे कि छिपकली, अपने हृदय, आंखों, रीढ़ की हड्डी, पूंछ के कुछ हिस्सों सहित जटिल संरचनाओं को वापस उगाने में सक्षम है।

इस प्राणी से हमें एक प्रकार के ERK pathway का पता चला है। जिससे इनके अंग वापस आ जाते हैं। अगर इंसानों में ऐसे ही किसी pathway को हम जनरेट कर पाएं तो शायद इंसानों में भी हम ऐसा ही कुछ कर सकते हैं। फिलहाल इस पर काफी शोध किए जाने बाकी हैं।

कृपया जानकारी शेयर करे अधिक जाने नीचे कमैंट्स KMGWEB.IN पर साम्रगी ज्ञानवर्धन के लिए है यहाँ क्लिक से हमारे बारे में शारीरिक उपाय आजमाने से पहले चिकित्‍सक अथबा सलाहकार से मिले Kindly Share Article click icons⤵

सवाल जवाब पुंछे करे

कमेंट बॉक्स में अपने विचारों से अवगत करायें लेकिन याद रखे लोगिन कर Publish बटन क्लिक करते ह, अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें Advertising comments not allowed