0
पृथ्वी पर जीवन - पृथ्वी पर जीवन यह एक रहस्य जैसा ही है इसलिए वैज्ञानिक धरती पर जीवन की उत्पत्ति पर रिसर्च करते रहते है जैसे - धरती या पृथ्वी की उत्पत्ति कैसी हुई, धरती या पृथ्वी पर पहला मानव कौन था इत्यादि | पृथ्वी का इतिहास काफी पुराना है तो चलिये जानते है पृथ्वी पर जीवन जीने का रहस्य क्या है


earth photo

Life on earth - धरती पर जीवन

पृथ्वी पर जीवन कम से कम दो अरब वर्ष पहले से है, लेकिन केवल पिछले आधे अरब वर्ष के जीवन ही को ही आँखों से देख सकते है। जीवविज्ञानी के बीच स्थाई प्रश्नों में से एक यह है कि आज के ग्रह पर रोगाणुओं से जीवन मल्टीसेल्युलर पौधों ,जानवरो किस तरह से आया। अब वैज्ञानिकों ने चट्टानों में जीवन के रासायनिक निशानों का विश्लेषण किया है जो कई अरब वर्ष पुराने है और उन्हें पता चला कि नाटकीय हिमयुग ने बहुकोशिकीय टिपिंग बिंदु को कैसे बढ़ाया है। 



शोधकर्ताओं ने ग्रह के समावेशी हिमयुगों के पहले और बाद के जीवन का ध्यानपूर्वक पुनर्निर्माण किया। लगभग 700 मिलियन वर्षो के पहले Sturtian glaciation ने "स्नोबॉल का निर्माण किया जिसने पूरी तरह बर्फ से ग्रहो को ध्रुवो से भूमध्य रेखा तक कवर कर रखा था। लगभग 659 मिलियन वर्ष पहले, जब ग्रह तेजी से गर्म हुआ था तब Sturtian की अवधि एक तीव्र ग्रीनहाउस अवधि के साथ समाप्त हो गयी। फिर ग्रह में चीज़े जलने लगी और Marinoan glaciation ने अपना काम शुरू किया और बर्फ से ग्रहो को ढक दिया। लगभग 15 मिलियन वर्ष में दो स्नोबॉल के बीच एक नयी दुनिया बनना शुरू हुई।
Word Globle
Add caption

ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी, कैनबरा के एक भूविज्ञानी Jochen J. Brocks ने अपने साथियो के साथ पुरानी चट्टानों में कोशिका झिल्ली के द्वारा छोड़े गए निशानों को पहचान कर बहुकोशिकीय जीवन के उदय का पता लगाया। लिपिडस और उनके सह-उत्पादों से बनी सेल्स की झिल्ली "बायोमार्कर" प्रारंभिक सूक्ष्मजीवों के लिए जीवाश्मों की तरह होती है। इस झिल्ली में रासायनिक परिवर्तनो को मापने के लिए Brocks और उनकी टीम ने Sturtian snowball के बाद गरम पाइप्स में कई नए बड़े प्रकार के समुदी तरल पदार्थ "प्लैंकटन शैवाल" की तीव्र वृद्धि की खोज की। इनमे से कई जीवन के स्वरूप यूकेरियोट थे, जिसका मतलब यह है कि उन्होंने एक नाभिक का विकास किया था और यह विकास बहुकोशिक जीवन के लिए जरूरी था। लेकिन Sturtian के बाद ग्रहो के भौतिक रसायन में कोई बदलाव नहीं होने से बहुकोशिक जीवन का विकास नहीं हो पाया। ऊपरी वायुमंडल से लेकर गहरे महासागरों तक ग्रहो की आणविक रचना को बदला जाना चाहिए था।

बड़ी आक्सीजन भीड़ -

शोधकर्ताओं ने बताया कि स्नोबॉल के अंत में बर्फ की नदियों को पिघलने के बाद इसमें बदलाव हुआ ,जिससे भू-मस्तिष्क का तेजी से क्षरण हुआ इसके कारण महासागरों में बहुत ज्यादा पोषक तत्व उत्पन्न हुए। बर्फीले खनिजों के घोल समुद्र में नीचे डूब गए और कार्बन निर्वहन करने लगे। ऐसा तब हुआ जब चीज़े वास्तविक हुई। शोधकर्ताओ के अनुसार "वायुमंडल में कम कार्बन की मात्रा को ऑक्सीजन के साथ संतुलित करना चाहिए,जो "न्यू प्रोटेरोजोइक" गहरे महासागरो की ऑक्सीजनकरण को शुरु करता है। इसमें कम ऑक्सीजन वाला एक विश्व पानी के अंदर और बाहर दोनों तरफ था। 


ऑक्सीजन की अधिक मात्रा इससे उत्त्पन्न हुई घटनाओ को समाप्त करती है। यह सम्भावना है कि अगर पानी में फ़ास्फ़रोस की मात्रा मिलाई जाए जो DNA का एक निर्माण खंड है तो यह हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसका मतलब यह है कि शैवाल अपनी पाचन क्रिया के दौरान ऑक्सीजन का निर्माण करती है। शैवाल अलग होने के कारण इसका उपयोग भोजन करने के लिए किया गया। समय के साथ सभी व्यक्ति इसका खाने में उपयोग करने लगे। समुद्र तल के जीवो को बचाने के लिए अधिक कार्बन की मात्रा डाली गयी। जैसा कि शोधकर्ताओ ने कहा कि ग्रह का विकास होने से "एक और कुशल जैविक पंप" स्थापित हुआ।



  • यह ऑक्सीजन और फास्फोरस का परिवर्तन अजेय था। Minoan हिमनद के snowball के बाद जब समुद्र की सतह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 60 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हुई तो शैवाल ने ध्रुव को अपना रास्ता बनाया। जीवन के रूप में हम जानते हैं कि ऐसा लगता है कि एक ग्रह के गर्म पानी में उभरा होता है जो स्नोबॉल और ग्रीनहाउस के बीच रहता है। लगभग 550 मिलियन वर्ष पहले जलवायु स्थिर थी, और हम इसे जानवरो के सिर, पूंछ और आंतरिक अंगों के साथ बढ़ते हुए देखते है। 
  • हार्वर्ड भूविज्ञानी Andrew Knoll जो इस खोज में शामिल नहीं थे, उन्होंने बताया कि इस खोज से पृथ्वी पर जटिल जीवन के उद्भव के बारे में विचार बदल जाएगें। मूलतः Brocks और उसके सहयोगियों के काम से पता चलता है कि जीवन के विकास के लिए पर्यावरण में परिवर्तन करना जरूरी होता है। अगर समुद्र में ऑक्सीजन की मात्रा नहीं होगी तो कोई भी जानवर नहीं रह पायेगा। 
  • यही कारण है कि वैज्ञानिक आज समुद्र के डी-ऑक्सिजन के बारे में सोचते है क्योकि जलवायु परिवर्तन और पोषक तत्वों की संख्या का सम्बन्ध भूमि से होता है। डी-ऑक्सीजन क्षेत्र जिनको "मृत क्षेत्र" कहा जाता है, इस ग्रह के जैविक पंप को धीमा कर देगा या इसको बंद कर देगा। पृथ्वी एक गौरवशाली भौगोलिक मशीन के समान है और इसमें ऐसी प्रक्रियाएं होती है जिनको पूरा होने में लाखो साल लगते है। ये प्रक्रिया जनसँख्या को पूरी तरह से बदल सकती है। कभी-कभी इसका मतलब है कि ग्रह जीवन के साथ खिलता है, जैसा यह महासागर में ऑक्सीजन और फास्फोरस के उदय के दौरान हुआ था लेकिन कभी-कभी इस से मृत्यु भी हो सकती है।

कृपया जानकारी शेयर करे अधिक जाने नीचे कमैंट्स KMGWEB.IN पर साम्रगी ज्ञानवर्धन के लिए है यहाँ क्लिक से हमारे बारे में शारीरिक उपाय आजमाने से पहले चिकित्‍सक अथबा सलाहकार से मिले Kindly Share Article click icons⤵

Post a Comment