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कोड वर्ड मे बात कैसे करे अकसर हम अपने दोस्तो या अपनी परिवार मे कोड वर्ड बातचित के दौरान करेट है लेकिन क्या आपके बचपन मे सुना कोई ऐसा वर्ड हो जो बाद मे सझ मे आया हो यह एक Code Word था | Code Word kya Hai और कोड वर्ड कैसे बनाए आइये जाने |
हमे पुराने दिनो की कितनी बाते याद होती है ? अगर इस पर विचार किया जाए तो समझ मे आता है कि यह समय पर निर्भर नही होता है ऐसी बहुत सी बाते होती है जिसको बीतने का समय काफी पुराना होता है लेकिन वह बाते हमारे दिमाग मे बस जाती है और लगता है जैसे अभी कल की बात है | इसके उल्टा भी है जैसे कल परसो की बाते भी हमे नही याद होती है |

हमारे बचपन के दोस्त चंद्र प्रकाश गौतम को अच्छे से याद है की किस तरह गाँव मे बहते नहरों मे नहा लेने पर उसकी दादी हाथ मे दंडी लेकर उसके पीछे दौड़ती थी साथ ही नहर के गंदे पानी के नुकसान हाथ हवा मे ले जाकर बताती थी |

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वही दूसरी तरफ उसके जिंदगी के मधुर यादे अगर गौतम याद करने की कोसिश करता है कि कैसे उसने अपनी सुहागरात को अंजाम दिया था तो पता नहीं क्यो गौतम की याददस्त ज्यादा ब्योरा नहीं जूटा पाती है | ऐसे ही हम चार यार बैठ पुरानो दिनो की याद को सहेज रहे थे | फिर गौतम ने अपने विचारो के बताते हुए एक बड़ा ही रोचक वाक्य सुनाया |


दोस्त गौतम ने बताया जब है 5वी या 6वी क्लास मे था तो उसके माता पिता को कही बाहर जाना था तो माता पिता जाने से पहले गौतम को चाचा चाची के पास छोड़ गए |
सोते वक्त चाची चाचा ने भाई के बच्चे के सामने कोड भाषा मे कुछ बाते की जो आज 50 साल के उम्र हो जाने के बाद भी मित्र को याद है | जो बाते हुई वह इस तरह की थी -

चाचा - और अब क्या हाल है ??
चाची - इतने बेसब्र न हो और मुन्ने को समझाओ | आज दूसरा दिन है और अभी कई दिन इधर आना मना है |
चाचा - पता नही क्यो, और दिनो मे तो कुछ भी फर्क नहीं पड़ता, मगर जब मुन्नी को 4-5 दिन दिन के लिए ताले मे बंद कर देती हो तो मुन्ना कुछ ज्यादा परेशान हो जाता है |
चाची - ये क्या मेरे हाथ मे है ? अपनी दुकान मे ध्यान लगाओ मुन्ने का ध्यान भी बंट जाएगा |


I Love You को दूसरी भाषा ने क्या कहते है
दोस्त ने तुरंत गौतम से सवाल किया क्या तुम्हें तब पता चला था ये मुन्ना मुन्नी कौन है ?? गौतम ने जवाब दिया "नहीं" तब उत्सावपूर्वक चाचा से पूछा था कि ये मुन्ना मुन्नी कौन है तो जवाब मे उन्होने पड़ोसी के बच्चे का नाम लिया था लेकिन असल बात तो बहुत समय बाद समझ मे आई और शादी के बाद जब मैंने खुद गुड्डा गुड्डी का कोड वर्ड बनाया तो बचपन मे सुना वार्तालाप दिमाग मे फ्रिज हो ही गया |

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