0
sarnath chidiya ghar, sarnath mandir, sarnath itihas, sarnath exprss, sarnath ka photo, sarnath mandir varanasi, sarnath अशोक स्तम्भ, सारनाथ का पुराना नाम, सारनाथ क्यों प्रसिद्ध है, सरनाथा क्या है, सारनाथ के बारे मे |
Sarnath Varanasi Mandir History - सारनाथ जिसे काशी अथवा वाराणशी के नाम से भी जाना जाता है और सारनाथ वाराणशी के 10 KM पूर्व मे स्थित है | भगवान बुद्ध द्वरा पहला उपदेश अपने प्रिय शिष्यो को यही पर दिया था और इस उपदेश को धर्म चक्र परिवर्तन के नाम से भी जाना जाता है और यही से बोद्ध धर्म का प्रचार प्रसार आरंभ हुआ | बोद्ध धर्म मे चार स्तम्भ है पहला सारनाथ दूसरा लुम्बनि तीसरा बोधगया और चौथा कुशीनगर | 
sarnath history




सारनाथ मे एक चौखंड स्तूप मौजूद है और स्तूप के चारो और बाड़ा बना हुआ है जिसके बीच मे एक मिट्टी का टीला बना हुआ है | सारनाथ मे भारत सरकार द्वारा एक संग्रहालय स्थापित किया गया है और इस संग्रहालय मे खुदाई से प्राप्त भगवान बुद्ध के समय के वस्तुवे राखी गई है |

सारनाथ का इतिहास

  • इंडियन गवर्नमेंट के राष्ट्रीय चिन्ह मे, जिस चतुर्मुख सिंह को लिया गया है वह सारनाथ संग्रहालय मे मौजूद है |
  • सारनाथ मे ही एक गुम्बद भी मौजूद है जिसे लंका के एक नागरिक धर्मपाल द्वारा बनवाया गया था और इस गुम्बद के अंदर भगवान बुद्ध की सुनहरी मूर्ति मौजूद है जो दिखने मे सुंदर और आकर्षित है |
  • यहा की दीवारों पर भगवान बुद्ध के जीवन से संबन्धित कई अच्छी अच्छी परतिमाए बनाई गई है और इन चित्रो को बनाने के बारे मे जानकारी प्राप्त होती है की इन्हे एक जापानी चित्रकार द्वारा बनाया गया था |
  • सारनाथ मे एक चाइनीज मंदिर भी मौजूद है जिसे चीनी नागरिक द्वरा बनवाया गया था  इस मंदिर मे भगवान बुद्ध को गहन ज्ञान की मुद्रा मे प्रदर्शित किया गया है |
  • सारनाथ में अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, भगवान बुद्ध का मन्दिर, धामेख स्तूप, चौखन्डी स्तूप, राजकीय संग्राहलय, जैन मन्दिर, चीनी मन्दिर, मूलंगधकुटी और नवीन विहार इत्यादि दर्शनीय हैं।
  • इतिहास से हमे पता चलता है कि मुहम्मद गोरी द्वारा सारनाथ के पूजा स्थलो को नष्ट कर दिया था |
  • सारनाथ मे मुख्य मंदिर से पश्चिम की तरफ एक अशोक कालीन प्रस्तर-स्तंभ है और इस स्तम्भ का ऊपरी सिरा अब सारनाथ संग्रहालय मे है | इस स्त्मभ पर तीन लेख उल्लेखित किए गए है पहला स्त्मभ अशोक कालीन ब्राह्मी लिपि में है जिसमें सम्राट ने आदेश दिया है कि जो भिछु या भिक्षुणी संघ में फूट डालेंगे और संघ की निंदा करेंगे: उन्हें सफ़ेद कपड़े पहनाकर संघ के बाहर निकाल दिया जाएगा। दूसरा लेख कुषाण-काल का है। तीसरा लेख गुप्त काल का है, जिसमें सम्मितिय शाखा के आचार्यों का उल्लेख किया गया है |
  • यहां के ईट-पत्थर निकाल दिए गए| कहते हैं कि वह इतने अधिक थे कि उनसे बनारस का एक मुहल्ला ही तैयार हो गया। 1905 ई. में यहां पुरातत्व विभाग ने खुदाई की तब सारनाथ का जीणोंधार हुआ। एक संग्रहालय बनाया गया जिसमें खुदाई से प्राप्त वस्तुएं रखी गयीं। बोधिवृक्ष की एक शाखा लगायी गयी और प्राचीन समय के मृगदाय की याद दिलाने के लिए हरे-भरे उद्यान तैयार कर वहां कुछ हिरण छोड़े गए। साल भर में यहां अनेकों पर्यटक आते हैं। बौद्धों के लिए यह विशेष आकर्षण एवं धार्मिक महत्व का स्थान है।

कृपया जानकारी शेयर करे अधिक जाने नीचे कमैंट्स KMGWEB.IN पर साम्रगी ज्ञानवर्धन के लिए है यहाँ क्लिक से हमारे बारे में शारीरिक उपाय आजमाने से पहले चिकित्‍सक अथबा सलाहकार से मिले Kindly Share Article click icons⤵

Post a Comment