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talak process in hindiहमारे देश के क्या कानून और न्यायिक प्रणाली है हम सबको पता है आप कोर्ट के चक्कर काटते रहे फिर भी न्याय नहीं मिल पाता और पूरी लाइफ कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते है लेकिन अब कुछ केसो के न्यायिक प्रणाली मे बदलाव किया गया है | तलाक नियम कानून, तलाक प्रक्रिया क्या है ??


हिन्दू अधिनियम 1955 तहत धारा 13 बी मे तलाक से संबन्धित नई न्यायिक प्रणाली जारी की गई है | जिससे तलाक [ divorce ] लेना आसान होगा | आज हम चर्चा करने वाले है तलाक से संबंधी नए कानून और प्रावधान के बारे मे |



तलाक के आसान तरीके नियम -

  • अगर कोई दंपति अपनी इच्छा से अलग होना चाहती है तो दोनों की तरफ से जिला अदालत मे तलाक के लिए संयुक्त याचिका दायर की जा सकती है |
  • हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 13-बी, विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28 और भारतीय तलाक अधिनियम धारा 10-ए की धारा में आपसी सहमति पर तलाक का प्रावधान है।
  • अगर कोई दंपति काफी लंबे समय से एक दूसरे से अलग रह रहे है साथ ही एक दूसरे के साथ रहने मे असहज महसूस कर रहे है और अगर काउनी तौर पर एक दूसरे से अलग होने के लिए तैयार है तो आपसी सहमति से एक दूसरे तलाक के लिए फाइल कर सकते है |
  • तलाक के लिए दंपती को संयुक्त याचिका पर हस्ताक्षर करके उसी अदालत मे जहा से उनकी शादी हुई थी या जहा वे शादी के बाद रह रहे है | अपनी याचिका वही दायर कर सकते है |
  • पति और पत्नी द्वारा संयुक्त याचिका दाखिल करने के बाद अदालत में आगे की प्रक्रिया के लिए उन दोनों के बयान रिकॉर्ड किए जाते है |
  • याचिका दायर करने के बाद अदालत उनके रिश्ते को एक और मौका देने के लिए छ माह का समय और सलाह दी जाती है |
  • इस छह महीने के वक्त मे दंपति का मन बदल जाए और एक दूसरे के साथ रहने के लिए तैयार है तो दंपति तलाक की याचिका वापस भी ले सकते है |
  • लेकिन अगर 6 महीने की अवधि के बाद भी वे एक साथ रहने के लिए तैयार नहीं है तो अदालत उन्हें उनकी सुनवाई और जांच के बाद तलाक देती है। इस के बाद वे कानूनी तौर पर अलग हो जाते है |
  • हालांकि आपसी सहमति से तलाक प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान है, लेकिन इसमें अपने बच्चों की जिंदगी, कस्टडी प्रोपर्टी जैसे मामलों में उन्हे आपस में निपटाना होता है |

तलाक के नियम - भारत मे पत्नियों के लिए तलाक के लिए निम्न आधार है जिसे केवल पत्नी ही दायर कर सकती है |
  • अगर पति बलात्कार जैसी घटना से लिप्त हो |
  • शादी अगर हिन्दू अधिनियम के तहत हुई है और पति पहली पत्नी के जीवित रहते हुए भी दूसरी शादी की हुई है तो इस केस मे पहली पत्नी तलाक की मांग कर सकती है |
  • एक महिला तलाक के लिए याचिका दायर कर सकती है अगर उसकी शादी पंद्रह वर्ष की उम्र से पहले कर दी गई हो तो और वो शादी का त्याग कर सकती है जब तक की उसकी उम्र 18 साल नहीं हो जाती है |
  • अगर एक वर्ष तक पति के साथ कोई सहवाश है और पति अदालत के पत्नी के रख रखाव के फैसले की अनदेखी करता है तो पत्नी तलाक की याचिका कर सकती है |

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