moksh praapti ka marg - मोक्ष प्राप्ति क्या है तो कहा जाता है भारतीय दर्शन मे नशवरता को दुख का कारण माना गया है | संसार आवागमन, जन्म-मरण और नश्वरता का केंद्र हैं। इस प्रपंच तरीके से मुक्ति पाना ही मोक्ष प्राप्त करना कहा जाता है |

मोक्ष प्राप्ति स्थान बोधगया - बौद्धगया बिहार मे स्थित एक धार्मिक स्थल है जिसे बोध धर्म का तीर्थ स्थान भी कहा जाता है | बोधगया मे एक मंदिर मौजूद है जिसे महाबोधि मंदिर के नाम से जाना जाता है | इस मंदिर का बोध धर्म मे विशेष स्थान का दर्जा दिया जाता है | इन स्थानो पर आपको या हमे बोधि वृक्ष के वंसज देखने को मिलते है जहा पर बुध्दा अपना प्रबोधन करते है | कहा जाता है अगर किसी को मौक्ष प्राप्त करना है तो उसके लिए यही एक ऐसा स्थान है जहा पर पिंडदान करके मोक्ष प्राप्त कर सकता है साथ ही पिंडदान यहा करना बढ़िया माना जाता है |
pinddan image


पिंडदान करना -  चावल और आटे को मिक्स कर एक साथ गुथकर बनाया गया एक गोलाकार पिंड होता है | पिंडदान आत्मा को अर्पित किया जाता है | शास्त्रो मे पितृ को एक उच्च स्थान दिया गया है इस कारण ही पितृ क्रिया सम्पूर्ण विधिविधान से निभाया जाता है | पिंडदान मे जब तक 5 ब्राह्मण को भोजन न कराया जाए तब तक अधूरा माना जाता है | पितृ में मृत पूर्वजों, माता, पिता, दादा, दादी, नाना, नानीसहित सभी पूर्वज आते हैं |


गौतम बुध्द ज्ञान प्राप्ति स्थान कहा है

कहा जाता है बोधगया के फाल्गु नदी के किनार वह बोधिवृक्ष मौजूद है जिसके नीचे गौतम बुध्द को ज्ञान प्राप्त हुआ | यह वही बोधिवृक्ष है जहा पर बैठकर गौतम बुद्ध ने कठोर तपस्या की थी | इस कठोर तपस्या के बाद गौतम बुध्द को बैशाख पुर्णिमा के दिन ज्ञान प्राप्त हुआ | जब गौतम बुध्द की मृत्यु हुई तो यही पर मठो का निर्माण कराया गया |

gautam budhd suvichar

भगवान बुद्ध की पदमासन की अवस्था मे मूर्ति महाबोधि मंदिर इसी जगह स्थित है जो खुद के वास्तुकला के लिए जाना जाता है |

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