tattoo designs kaise - आज हम बात कर रहे है उस लेटेस्ट ट्रेंड के इतिहास कि जो आज बहुत तेजी से अपने पंख पसार है जी हाँ टैटू डिजाइन के बारे मे तो आपने सुना ही होगा लेकिन टैटू डिजाइन का इतिहास क्या है | आप जानते है क्या अगर नहीं तो आज हम बाते कर रहे tattoos designs के इतिहास की |

टैटू डिजाइन - आज के युवा पीढ़ी मे टैटू डिजाइन करवाना एक क्रेज बना हुआ है | आज के युवा भीड़ मे अपनी एक अलग पहचान एंव छाप छोड़ने के लिए टैटू डिजाइन करवा रहे है | यह टैटू डिजाइन शरीर के किसी भी हिस्से पर बनवाया जाता है | ऐसा माना जाता है अपने दिल की बात टैटू डिजाइन फोटो का सहारा लेकर युवा समझाने की कोशिश करते है साथ ही आज एक फैशन के तौर पर भी देखा जा रहा है | आज के युवा मे टैटू डिजाइन फोटो बनवाना एक नशा सा बन चुका है | लेकिन टैटू डिजाइन फोटो का जो इतिहास है वह आज बता रहे है यह सदियो पुराना है और आज जिस टैटू डिजाइन को फैशन के तौर पर देखा जा रहा है वह कभी एक प्रथा थी या फिर एक जरूरत |
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टैटू डिजाइन है एक पुरानी परम्परा -
आज जिस टैटू डिजाइन को लेटेस्ट फैशन या ट्रेंड की नजर से देखा जा रहा है वह है काफी पुरानी परम्परा तो आज हम आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जिसे जानकार आपको टैटू डिजाइन वाला व्यक्ति ओल्ड फैशन लगने लगेगा |


चीन मे टैटू डिजाइन क्यो -

आपको जानकार शायद आश्चर्य हो लेकिन यह सच है कि प्राचीन चीन मे टैटू डिजाइन असभ्य जनजातियो की निशानी हुआ करती थी | चीन साहित्य मे ऐतिहासिक नायको और डाकुओ से टैटू डिजाइन को जोड़ कर देखा जाता है | चीन मे कैदियों के चहरे पर ‘囚’ यह निशान बना दिया जाता था जिससे पता चलता था की यह व्यक्ति अपराधी है |

दास प्रथा मतलब दास की पहचान चिन्ह -
एक ऐसा समय था जब लोगो को दास बना लिया जाता था साथ ही इन डासो के मालिक अपने दास पर एक अलग तरह का पहचान चिन्ह गुदवा देते है जो उनकी पहचान बन जाती है और इससे मालिक अपने दास को याद रख पाता था की यह मेरा दास है |

हिंदुस्तान मे टैटू का संबंध -
भारत मे भी स्थायी टैटू को प्रयोग मे लिया जाता रहा है जिसे हिंदुस्तान मे गोदना के नाम से जाना जाता है | भारत मे गोदना का इतिहास काफी पुराना है | दक्षिण भारत में स्थायी टैटू को पचकुतरथु कहा जाता था और इस तरह के टैटू 1980 के समय से पहले तमिलनाडु मे बहुत ही सामान्य माना जाता था | भारत मे टैटू अलग अलग जनजातियो के लोग प्रयोग मे लेते थे | इस टैटू का कारण लोग अपनी पहचान के लिए करते थे |



अस्थाई टैटू - 
अस्थाई टैटू भी भारत का हिस्सा रहा है जो महदी की सहायता से किया जाता रहा है | मेहदी से अस्थाई टैटू आसानी से बन जाता है | यह टैटू हिन्दू समाज मे जाती वर्गो मे बटे समाज द्वारा किया जाता था | आपको पता ही होगा जा महदी का चलन ज़ोर शोर से चल रहा है | मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका मे यह प्रथा भारत से गई हुई मानी जाती है | कुछ ऐसे साक्ष्य प्राप्त हुए जिनसे पता चलता है मिस्र मे मेहदी का प्रयोग केवल बालो की रंगाई के लिए किया जाता था |

मिस्र मे टैटू डिजाइन का सम्बंध - 
प्राचीन मिस्र मे टैटू का सम्बंध केवल महिलाओ से ही था और महिला का टैटू डिजाइन महिला की हैसियत और अवस्था को दर्शाता था | साथ ही यह टैटू डिजाइन महिलाओ के धर्म और सजा को भी शो करता था | ऐसे कई सारे इतिहासकार का कहना कि टैटू का सम्बंध किसी विशेष प्रकार की बीमारी या रोग के इलाज से भी जुड़ा हुआ करता था |

जापान मे टैटू का चलन -
1603 से लेकर 1868 तक के प्राचीन जापान में मालवाहक, वेश्याएं और निम्न दर्जे पर काम करने वाले लोग ही टैटू बनवाते थे, ताकि उनकी सामाजिक पहचान बनी रहे। 1720 से 1870 तक अपराधियों के चेहरे पर भी टैटू बनाए जाते थे। जब भी अपराधी कोई अपराध करता था तो उसकी कलाई पर एक रिंग बना दी जाती थी, जितने ज्यादा अपराध उतने ज्यादा छल्ले |
अब तो आपको टैटू का इतिहास समझ मे आ चुका होगा और समझ भी गए होंगे की टैटू का ट्रेंड नया है पुराना | 

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