ATM पिन में क्यों होते हैं सिर्फ 4 डिजिट? जानें ऐसे ही 8 सवालों के जवाब



कई बार कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें देख कर कभी न कभी मन में ये सवाल जरूर आता है कि ऐसा क्यों होता है। ATM में 4 डिजिट का पिन ही क्यों होता है? या फिर आईफोन के हर ऐड में हैंडसेट पर 9:41 ही क्यों बजा होता है? हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही 8 सवाल और उनके इंट्रेस्टिंग जवाब...


ATM मशीन का इंवेंशन स्कॉटिश इन्वेंटर John Adrian Shepherd-Barron ने किया था। इसका इस्तेमाल साल 1967 से किया जा रहा है। मशीन बनाते वक्त Shepherd-Barron ने पिन के लिए 6 डिजिट नंबर सजेस्ट किया था। लेकिन हुआ ये कि उनकी वाइफ कैरोलाइन को 6 डिजिट पिन याद करने में दिक्कत आ रही थी, वो सिर्फ 4 डिजिट तक पिन नंबर याद कर पा रही थीं। तब से ATM का पिन मात्र 4 डिजिट का हो गया।

आपको बता दें कि कुछ बैंको के ATM पिन 6 डिजिट के हैं इनमें कोटक महिंद्रा बैंक भी शामिल है।



आपने आईफोन का ऐड गौर से देखा हो तो आप उसमें फोन की स्क्रीन पर हमेशा 9:41 AM का टाइम ही शो होते देखेंगे। दरअसल, ये वही समय है जब दुनिया ने एप्पल के आईफोन की पहली झलक देखी थी। आईफोन और आईपेड के ऐड में 9:41 का वक्त दिखाने का चलन साल 2007 में मेकवर्ल्ड कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो से शुरू हुआ। इसी इवेंट में एप्पल के तत्कालीन CEO स्टीव जॉब्स ने एक हिस्टोरिकल की-नोट प्रेजेंटेशन दिया था, और आईफोन की पहली झलक दिखाई थी। इवेंट से पहले जॉब्स ने सोचा कि क्यों ना जब आईफोन दुनिया के सामने आए तो उसकी स्क्रीन पर वही टाइम दिखे जो ऑडियंस की घड़ी में हो रहा हो। प्लानिंग के मुताबिक 9 बजे शुरू होने वाला प्रेजेंटेशन 40 मिनट में पूरा हो जाना था और उसके बाद आईफोन की झलक दिखानी थी।


इसका कारण मैनुअल टाइपराइटर्स के समय से जुड़ा हुआ है। पहले मैनुअल टाइपराइटर में अल्फाबेटिकल ऑर्डर में ही Keys को अरेंज किया गया था, लेकिन उस समय टाइपिस्ट इतना फास्ट टाइप करते थे कि टाइपराइटर जल्दी खराब हो जते। ऐसे में टाइपिंग स्पीड को स्लो करने के लिए Keys को QWERTY स्टाइल में अरेंज कर दिया गया। इस रैंडम अरेंजमेंट को ही स्टैंडर्ड मान लिया गया और ये आज तक फॉलो किए जा रहे हैं।


माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज XP ऑपरेटिंग सिस्टम का वो सिंपल और अट्रैक्टिव सा वॉलपेपर आपको भी याद होगा। इसका नाम Bliss है। इसमें रोलिंग ग्रीन हिल्स, ब्लू स्काई और सफेद खूबसूरत बादल दिखाई देता है। दरअसल, ये कैलिफोर्निया स्थित सोनोमा काउंटी के अमेरिकन विटिकल्चरल एरिया का फोटो है। नेशनल जिओग्राफी के फोटोग्राफर Charles O'Rear ने 1996 में ये लैंडस्केप फोटो खींची थी।


एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स नया और इनोवेटिव लोगो बनाना चाहते थे। इस काम के लिए उन्होंने Rob Janoff को हायर किया। लोगो के कटे होने का कारण बताते हुए Janoff कहते हैं कि हम चाहते थे लोग इसे एप्पल ही समझें चेरी नहीं। हालांकि, एप्पल 'bite' को कम्प्यूटर के 'Byte' से भी जेड़कर देखा जाता है।
आपको बता दें कि साल 1976 में एप्पल के तीसरे को-फाउंडर Ronald Wayne ने एप्पल का पहला लोगो डिजाइन किया था। इसमें एप्पल के पेड़ के नीचे बैठे न्यूटन को दिखाया गया था


कुछ लोगों का मानना है कि ये कोई लाइट सेंसर है। वहीं, कुछ का कहना है कि ये माइक्रोफोन हो सकता है। कइयों का मानना तो ये है कि ये कोई रिसेट बटन है। अगर आपको भी ऐसा ही कुछ लगता है तो आपको बता दें कि ऐसा कुछ भी नहीं है। सच तो ये है कि ये एक माइक्रोफोन है लेकिन ये आपकी आवाज नहीं सुनता। इसे नॉइज कैंसलिंग माइक्रोफोन कहते हैं। ये बैकग्राउंड नॉइस को कम करने का काम करता है, जिससे कॉलर को क्रिस्टल क्लियर वॉइस सुनाई दे।


फेसबुक के नीले रंग में रंगे होने के पीछे सीधा सा कारण है। इसके फाउंडर मार्क जुकरबर्ग का कलर ब्लाइंड होना। न्यूयॉर्कर को दिए अपने एक इंटरव्यू में मार्क ने कहा की उन्हें लाल और हरा रंग दिखाई नहीं देता है। इसलिए नीला रंग उनके लिए सबसे आसान रंग है। फेसबुक शुरू से ही एक ही रंग में रंगा हुआ है। मार्के इसे हमेशा से जितना हो सके उतना सादा बनाना चाहते थे। यही वजह है कि उन्होंने फेसबुक को नीले रंग में रंग दिया।


नोकिया के लोगो में जो दो हाथ दिखाई देते हैं वो कोई इलस्ट्रेशन या इमेज नहीं है बल्कि ये फिनलैंड के दो मॉडल्स के हाथ हैं। एक हाथ बच्चे का है और दूसरा मेल का। कंपनी ने इन मॉडल्स को एजेंसी के जरिए हायर किया था। Janne Lehtinen नाम के आर्टिस्ट ने इस लोगो को फिनिशिंग दी है।

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6 comment:

  1. ऐसे दुसरे टोपिक पढने कहाँ मिलेंगे

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