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जाबाल के पुत्र सत्यकाम गुरुकुल मे रहकर ब्रह्म के सत्य के बारे मे जानना चाहते थे ! सत्यकाम माँ की आज्ञा लेकर वे गौतम ऋषि के आश्रम चले आए ! ऋषि ने चार सौ दुर्बल गायों को उन्हे सौंपते हुए कहा ! वत्स ! इन स्वस्थ गायों के साथ साथ जब इनकी संख्या भी बढ़ जाए तब मेरे पास आना ! सत्यकाम ऊन गायों को लेकर तुरन्त वन चले गये ! दिन रात गायों की हिंसक पशुओं से सुरक्षा और उनकी देखभाल करना उनकी साधना बन गयी ! जंगल की खुली हवा ताजा घास और स्वच्छ पानी मिलने के कारण समय के साथ न गाये पूरी तरह स्वस्थ हो गयी ! बल्की उनकी संख्या भी पूरी एक हजार हो गयी ! गायों के निरंतर ध्यान शुद्ध और शांत वतावरण ने सत्यकाम को पूरी तरह से एकाग्रचीत बना दिया ! उनकी सेवा रूपी तपस्या से ईश्वर ऊन पर प्रसन्न हुए ! और उन्हे ब्रह्म का ज्ञान हो गया ! तब वह गायों को वापस आश्रम पहुँचे तो उनकी उपलब्धिया देखकर आचार्य अत्यंत प्रसन्न हुए ! तब सत्यकाम ने उनसे ब्रह्म ज्ञान का उपदेश देने का आग्रह किया ! इनके जवाब मे आचार्य ने कहा की तुम्हे सत्य का ज्ञान हो गया है ! अब और किसी उपदेश की ज़रूरत नही है ! तब सत्यकाम ने उनसे कहा की वह अपने गुरु के मुख से सत्य को ब्रह्म को जानन चाहते है ! इस तरह उन्होने आचार्य से संपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया ! सत्यकाम पूर्ण ज्ञानी होकर वापस घर आ गये और शांति के साथ अपने धर्म का पालन करने लगे !


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