यहा क्रिकेट खेलकर सुलटाते है झगड़े

हमारे देश मे क्रिकेट दीवाने की कमी नहीं है क्रिकेट खेल हमारे लिए भले मनोरंजन का साधन हो पर पापुआ न्यू गिनी की ट्रोब्रियंड जनजाति के लिए यह अमन शांति बनाए रखने का तरीका है |

न्यू गिनी - आस्ट्रेलिया के उत्तर मे स्थित दुनिया का सबसे बड़ा दिविप है न्यू गिनी मे ट्रोब्रियंड नमक एक जगह है | जहां ट्रोब्रियंड जनजाति के लोग रहते है | जिस तरह दुनिया मे पाई जाने वाली सभी जंजातियों के अपने नियम कायदे होते है |

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इनमे से एक नियम के बारे मे सुनकर चौक जाएँगे आप भी क्योकि यह नियम जुड़ा है लड़ाई झगड़े के निपटारे से | अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या खास है झगड़ा का निपटारा करने मे ??
हम आपको बता दे जब इनके बीच झगड़ा होता है तो वह मर पीट और बहस नहीं करते बल्कि क्रिकेट खेल कर झगड़े को सुलझाते है |
दुल्हन कि एंट्री के लिए यूनिक आइडियाज

इस क्रिकेट मैच मे महिलाए भी लेती है भाग -

इस मैच मे जो जीतता है झगड़े के मुद्दे पर उसी कि बात मानी जाती है | ट्रोब्रियंड जनजाति को सन 1793 मे खोजा गया था | साल 1894 मे ट्रोब्रियंड दीप समूह तब सामने आया था जब यहा एक कैथोलीक मिसन से जुड़े लोग यहा पाहुचे थे | तब इस जगह को "पापुआ न्यू गिनी" के नाम से जाना जाने लगा |



कैसे इस जनजाति ने सीखा क्रिकेट -
साल 1903 मे विलियम गिलमोर नाम के एक ब्रिटिस व्यक्ति ने ट्रोब्रियंड जनजाति के लोगो को क्रिकेट से परिचय कराया | उन्हे क्रिकेट सीखने के पीछे उनके बीच लड़ाई झगड़ा और दुश्मनी को खत्म करना था | हालाकी गिलमोर ने इस जनजाति के लोगो को जिस तरह क्रिकेट खेलना सिखाया था उसके नियमो मे अब बहुत बदलाव आ गए है | वहा के क्रिकेट मैच मे एक टीम मे 40 - 50 सदस्य शामिल हो सकते है |

क्रिकेट मैच शुरू और खत्म कैसे 
क्रिकेट शुरू करने से पहले इस जनजाति के आद्यात्मिक गुरु बेट और बाल को हाथ मे लेकर प्राथना करते है ताकि क्रिकेट मैच के नतिजे सुखद रहे और मैच के दौरान मौसम अच्छा रहे | मैच के पहले और मैच के बीचो बीच मे टीम के सभी सदस्य प्राथना और नाच गाने का प्रदर्शन करते है | यही नहीं जब कोई सदस्य आउट होता है तो उस व्यक्ति को नृत्य या नाचना पड़ता है और उसकी कोरियोग्राफी विपक्षी टीम करती है | मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमे एक दूसरे से अपने भोजन कि अदला बदली करती है |

ग्रीनलैंड के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दीप है यहा कि एक और खासियत है - यहा सामान्य कैरेंसी नहीं चलती बल्कि यहा समान खरीदने के लिए केले के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है |
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