शांति और अहिंसा का सबक - मुहर्रम पर विशेष muharram kya hai

muharam kya hai muharram kyo manaya jata hai kya aapko pata hai agar nahi to aaj ham aapko mahrram par ek vishesh lekh de rahe hai
मुहर्रम शरीफ इस्लामी वर्ष [ हिजरी सन ] का पहला महिना है मुहर्रम के आगमन पर विशेष रूप से इमाम हुसैन की सहादत को याद किया जाता है | मुहर्रम की दसवी तारीख को ही इंसानियत के मसीहा इमाम हुसैन इब्ने अली ने इस्लाम को अनैतिकता के चंगुल मुक्त कर शांति, न्याय और अहिंसा के सबक दिए | न सिर्फ मुसलमानो के लिए हर उस व्यक्ति के लिए जिसके साथ जुल्म, ज्यादती और अन्याय हुआ हो | इमाम हुसैन की अहिंसक क्रान्ति मानव अधिकार, न्याय, और धैर्य का उच्चतम उदाहरण है | वह चाहे किसी भी  धर्म से सम्बंध रखता हो उसके दुख स्वर मे इमाम हुसैन का दर्द शामिल है | अन्याय के विरुद्ध दुनिया की कोई भी उल्लेखनीय क्रान्ति इमाम हुसैन [ रजीयीअल्लाहु अनहु ] के एतिहासिक आंदोलन से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी |

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यह महान आंदोलन आदर्श बलिदान 1400 से अधिक वर्षो से भी पहले हुआ है लेकिन अन्याय, हिंसा और आतंकबाद के खिलाफ यह आज भी दुनिया के लिए वैश्विक संघर्ष का प्रतीक है | इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान मे जालिम यजीदियों को संबोधित करते हुए फरमाया था कि अगर तुम्हारा कोई धर्म नहीं है तो कम से कम इस दुनिया मे अपना जीवन एक स्वतंत्र व्यक्ति की तरह जियो |



क्योकि एक स्वतंत्र को दूसरों की तुलना मे अच्छे और बुरे के बीच स्पष्ट अंतर महसूस होता है | दरअसल इमाम हुसैन को महान मानवीय इस्लामी सिद्धांतों के प्रतिस्थापक के रूप मे देखा जाता है | उन्होने बहुत ही धेर्य और धृदता के साथ अत्याचारी और अन्यायी शासक यजीद का विरोध कर पहली बार लोकतान्त्रिक नेतृव की इस्लामी अवधारणा परस्तुत की |

इमाम हुसैन ने कहा - हक [ सच ] और बातिल [ झूठ ] कभी एक नहीं हो सकते यह ऐतिहासिक तथ्य तब साबित हो गया जब उन्होने यजीद के राजदूत से कहा "मुझ जैसा व्यक्ति यजीद जैसे तानाशाह की निष्ठा कभी नहीं कर सकता" |

यदि हम इस इस दृष्टिकोण को सामने रखे  तो बड़ी आसानी से इस तथ्य का एहसास हो जाएगा की मौजूदा दौर के तथाकथित "मुजाहिदीन" की हकीकत खुखार उग्रवादियो और इस्लाम के झुठे दारोदारों के आलवा कुछ नहीं है | यह लोग गैरमुस्लिम और मुसलमानो को हिंसा और बार्बरता का निशाना बनाते है | इसलिए इस तरह के कृत्य इमाम हुसैन के सच्चे जिहाद और सहादत के सार के विलकुल विपरीत है | 
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