धर्म से मजहब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना

मैं आज आपके सामने एक और नया लेख पेश कर रही हूँ. इसे लिखने से पहले मैंने बहुत सारी धार्मिक किताबों को पढ़ा, अच्छे से समझ आए सबका हिंदी अनुवाद पढ़ा, सच मानिए मुझे बड़ी हैरानी हुई यह जानकर कि किसी भी धर्म की किताब में धर्म के नाम पर लड़ने को नहीं कहा गया, सब धर्मों का आदर करने को कहा गया है. फिर क्यों हम इंसान धर्म के नाम पर लड़ते है |


‘सारे जहाँ से अच्छा’ गीत में लिखा गया है कि ‘ मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना, हिंदी है हम वतन है हिंदुसतान हमारा'



तो हम क्यों इन बेकार की बातों पर लड़ते-झगड़ते है. 
                                                       समझने कि बात है कि इस बात पर झगड़ा क्यों किया जाए कि क्या बनाया जाएगा. वो ऊपर वाला एक है सबके लिए और वो कभी नहीं चाहेगा कि उसके नाम पर झगड़े हो. किसी का नुकसान हो क्योंकि वो किसी में भेद नहीं करता. हर धर्म मानव प्रेम, मानव सहायता के बारे में बताता है. वो ऊपर वाला जो सबका मालिक है क्या उसे किसी चीज़ की कमी है?  सबके सिर पर छत उसके कारण है. तो उस ऊपर वाले को क्या किसी इमारत की जरूरत है? अगर आप कुछ बनाना ही चाहते हैं तो एक अच्छा सा अस्पताल बना दिया जाये या स्कूल बनवा दिया जाये. जिससे सब को फायदा हो.. 

हर जरूरतमंद को अच्छा इलाज या पढ़ाई मिले बिना किसी भेदभाव व ऊँच-नीच के तो इससे अच्छा क्या होगा. अगर आप अपने भगवान को खुश करना चाहते हो तो उसके बनाए इनसानों को खुश करो उन्हें ठेस मत पहुँचाओ. क्योंकि जितना समय इन बेकार के कामों में लगाते है उसमें हम कितना काम कर सकते है. और जो समाज में चीज़ो की बरबादी होती है वह महँगाई के रूप में सामने आती है. इसलिए समझदार बने ऐसे बहकावे में न आए और यह मानकर चले कि अगर आप उसके बने इंसान से प्यार करोगे तो वह खुद ही आपसे खुश रहेगा.
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Milan Tomic

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