होली भारत का एक लोकपिृय त्योहार है. March का महीना दो बातों के लिए मशहूर है- एक है होली, दूसरा पेपर. दोनों का अपना मज़ा है | holi ka tyohar kab मनाया जाता है | 

होली का त्योहार कब आता है, यह क्यों मनाई जाती है यह सब हम बचपन से पढ़ते आ रहे है, और अपने बच्चों को पढ़ाते आ रहे है |

यह हमारा एक रंगीला त्योहार है. रंग-बिरंगे रंगो का. यह एक ऐसा त्योहार है जो अलग अलग राज्यों में कई तरीकों से मनाई जाती है जैसे – मथुरा की होली, बृज की होली आदि |

holi kaise manaye

होली का नाम आते ही याद आती है- गुजियां, गुलाल, रंग, और भांग. शुरू से ही यह सब होली से जुड़ी हुई है. होली खेलने में, रंग लगाने में बहुत मज़ा आता है. होली की चहल पहल काफी दिन पहले ही शुरू हो जाती है. परंतु पहले और अब की होली में काफी बदलाव आ गया है रंग व गुलाल की जगह पक्के रंगों ने, गृीस, कीचड़, गोबर व अंडो ने ले ली है. भांग की जगह बीयर और शराब ने ले ली है. और छोटे-छोटे पानी के गुबारों की जगह चाइना के बड़े-बड़े गुबबारों ने ले ली है जिसमें अगर पानी भर लो तो वो एक आधा किलो का लगता है. ओर तो ओर बच्चे आने जाने वालो को वो गुबबारे मारते है जिससे चोट लगने का डर लगा रहता है. गाड़ियों, मोटरसाईकल पर मारते है जिससे घटना होने का डर लगा रहता है. हमें किसी को जबरदस्ती रंग नहीं लगाना चाहिये और न ही जबरदस्ती भांग पिलानी चाहिए |

यहाँ मैं कुछ सावधानियाँ बता रही हूँ जिससे होली और अच्छे तरीके से मना सकते है

1. रंगों में गुलाल का प्रयोग करें. होली खेलने जाने से पहले शरीर पर कोई तेल (सरसो या नारियल) लगा लें. 2. चेहरे पर भी कोई करीम 
3. चेहरे पर भी (ponds etc. cream) लगा ले. 
4. चेहरे या शरीर पर से रंग न उतरे तो दही में आटा या बेसन मिलाकर मसाज़ करके हलके हाथ से उतारे. 
5. अगर भांग का नशा हो जाए तो खटाई खांए जैसे- नींबू, दही या इमली. यह बहुत प्यारा त्योहार है इसे प्यार से मनाना चाहिए. जबरदस्ती न रंग लगाने की करे न भांग पिलाने की. नशे में हुड़दंग न मचाए |

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  1. aapka article nice hai Hume acha laga.

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