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help meaning in hindi - मदद यानि सहायता. किसी कि मदद करना बहुत अच्छी बात है. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और हम लोग एक ही समाज में रहते है. इसलिए हर मनुष्य को एक दूसरे की मदद की जरूरत पड़ती रहती है. मदद के लिए बढ़े हाथ को थामना चाहिए उसे हर संभव मदद देनी चाहिए. आजकल के लोग इतने मतलबी हो गए है कि वह किसी की मदद करना ही नहीं चाहते. जैसे कि कई बार बसों में देखा जाता है कि कई लोग महिलाओं और बूढ़े लोगों के लिए जो सीटें होती है उस पर बैठे रहते हैं जब तक उन्हें कहा न जाए. वह उन्हें सीट भी नहीं देते |
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यह तो उन लोगों की बात हुई जो मदद ही नहीं करना चाहते. और कुछ लोग ऐसे होते है जो की मदद करने पर फंस जाते है. यहाँ मैं अपना एक अनुभव बताना चाहती हूँ. कुछ समय पहले मैं एक कलीनिक पर काम करती थी. मेरी शाम की डयूटी होती थी. सर ५-६ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे. पर मेरी डयूटी थी कि रोज शाम को कलीनिक खोलना. मैं और एक लड़का और था. हम रोज़ आकर कलीनिक खोलते थे. एक दिन वो लड़का भी नहीं आया. उस दिन में अकेली थी. कोई ७-७:३० बजे का वक्त था कि एक गरीब सी गर्भवती औरत अपने ४-५ बच्चों के साथ आई और कहने लगी-कि मेरी बेटी को चोट लगी है पट्टी करवानी है मैंने उसे कहा कि सर नहीं है और यहाँ पट्टी नहीं होती पर वो नहीं मानी. फिर कहने लगी कि मेरा दिल घबरा रहा है पानी पीना है मैंने उसकी बड़ी बेटी को कहा-कि आप बाहर से पानी ले लो. पर वो कहने लगी कि उसे वॉटर कूलर चलाना नहीं आता. मैंने भी सोचा हो सकता है कि सच में उसकी तबीयत खराब हो, यही सोच कर मैं पानी लेने जैसे बाहर गई उसके सारे बच्चे मेरे पीछे-पीछे बाहर आ गये और जब मैं पानी लेकर अंदर जाने लगी तो मुझे रोकने लगे, फिर उसकी बड़ी बेटी कहने लगी कि आप पानी मुझे दो मुझे प्यास लगी है यह बात मुझे अजीब लगी कि न तो मुझे अंदर जाने दे रहे है और सब मुझे घेर कर बाहर ही खड़े हो गये है मैंने गुस्से में कहा-कि यह रहा गिलास अब खुद पानी लो और उन्हें हटा कर मैं अंदर आ गई. जैसे ही मैं अंदर आई तो देखा कि वो औरत सर के केबिन से बाहर निकल रही थी. और कहने लगी कि चलो हम कहीं ओर से पट्टी करा लेंगे और झट वहाँ से सब जल्दी-जल्दी चले गये. मेरा दिमाग घूमा मैंने झट से सर का केबिन चैक किया सब कुछ ठीक था कुछ गायब नहीं था |

मैंने आराम की साँस ली और जैसे ही अपनी सीट पर बैठी मेरे होश उड़ गए मेरा बेग गायब था और ये समझते हुए मुझे जरा देर नहीं लगी कि वो औरत मेरा बेग ले गई है. अब यह भी समझ आ गया कि वो औरत गभृवती भी नहीं थी क्योंकि मेरा बेग काफी बड़ा था और जब वह औरत बाहर निकली तो मुझे उसके पास नहीं दिखा क्योंकि वो बेग को अपने नकली पेट में छिपा कर ले गई थी. जब तक मैं बाहर जाकर पूछती तब तक वह गायब हो गई थी. मैंने तो सिर्फ उसकी मदद करनी चाही थी क्योंकि मेरे मन में सिर्फ यही बात आई थी कि कहीं सच में उसे तकलीफ़ न हो़. पर हुआ क्या वो मेरा ही बेग उठा कर ले गई. क्योंकि कोई और सामान छिपा कर ले जाना मुशकिल था. मैं यह नहीं कहूँगी कि ऐसा मेरे साथ ही हुआ है. ऐसा कई बार कई लोगों के साथ हो चुका है |

कई बार सड़क के किनारे कोई बीमार या घायल बनकर बैठा होता है लोग उनकी मदद करने को रुकते है तो वह मौका देखकर उन्हें लूट लेते है. ऐसे में होता क्या है कि जब किसी सही इंसान को मदद की जरूरत होती है तो कोई उनकी मदद नहीं करता. क्योंकि सब को यही डर होता है कि कहीं वो चोर-लूटेरे न हो. इसलिए कभी भी, किसी भी सुनसान इलाके में अगर कोई मदद माँगें तो सोच समझ कर उसकी मदद करो. हर तरह से विश्वास कर लो कि वह सही है या नहीं. यही कारण है कि ऐसे लोगों के कारण सही जरूरतमंद लोग भी मदद से वंचित रह जाते है.
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