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परिणाम मैंने अपने पहले लेख में कहा था कि मार्च का महिना दो चीज़ो के लिए जाना जाता है एक होली का त्यौहार और दूसरा फाइनल पेपर. होली तो चली गई और सबने अच्छे से मना भी ली. रहे फाइनल पेपर, वो भी शुरू हो गये हैं १०वीं और १२वीं के बच्चों को छोड़कर सभी बच्चों का नया सत्र १ अप्रैल से शुरू हो जाएगा. सबको मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएँ, सबके अच्छे अंक आए. अब आते है मुद्दे की बात पर. सब बच्चे अपने हिसाब से पेपर देकर आऐ होंगे. सबने मेहनत भी की होगी. कई ऐसे बच्चे होते है जो शुरू से मेहनत करते हैं जो कि संख्या ज़रा कम होते है असल में उन बच्चों की संख्या बहुत अधिक होती है जो सिर्फ समय आने पर ही पढ़ते हैं. मेरा उन सब बच्चों से निवेदन है कि जब वे सब कुछ जानते हुए कि उनका एक साल कितना कीमती है इतनी हिम्मत दिखाते है कि सारे साल मेहनत नहीं करते तो परिणाम आने पर उसे अपनाने की भी हिम्मत रखे. क्योंकि अच्छे अंक प्राप्त करने कि एक सिर्फ एक ही कुंजी है और वो है कड़ी मेहनत |




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अभिभावकों से भी निवेदन है कि वह भी अपने बच्चों की तुलना और बच्चों से न करें. सभी बच्चों में अपनी अलग प्रतिभा होती हैं. क्योंकि पाँचों ऊँगलियाँ बराबर नहीं होती परंतु सबका अपना अलग महत्व होता है. अब वक्त बच्चों को डाँटने का नहीं है अब जैसा भी परिणाम आए, बच्चों को प्यार से समझाए कि वह आगे से मेहनत करें ताकि अगले साल और अच्छे नंबर ला सके. क्योंकि रिज़लट आने के बाद कई ऐसी अप्रिय घटनाएँ सुनने में आती है जो कि बहुत दुखद होती हैं. हाँ, यह सच है कि एक साल की कीमत बहुत ज्यादा होती है पर किसी की जान से ज्यादा नहीं होती. मेहनत करनी अपने हाथ में होती है. क्योंकि सोते हुए शेर के मुँह में हिरण खुद भोजन नहीं बन कर आता उसके लिए भी उसे मेहनत करनी पड़ती है जबकि वह जंगल का राजा होता है. अगर मान लो रिज़लट कुछ ऐसा-वेसा आता है तो बच्चे को डराएँ नहीं बहुत ही प्यार से समझाए. 

परीक्षा परिणाम मे कुछ ध्यान देने वाली बातें:- 

१. रिज़लट जैसा भी आए बच्चों को ज्यादा डाँटे नहीं. 
२. कभी भी अपने बच्चे की तुलना उनके भाई-बहन, पड़ौसी व रिश्तेदारों के बच्चों से न करें.
३. क्योंकि हर बच्चे में अपने अलग गुण होते हैं 
४. मेहनत के हिसाब से हमेशा फल मिलता है तो इस बात पर ज्यादा ध्यान दें कि बच्चे उलटी-सीधी बातों पर समय बरबाद न करें 
५. बच्चों को समझाए कि आज के समय में बहुत कॉमपीटिशन है अगर तुम नं १ नहीं आ सकते तो कम से कम अच्छे नं तो जरूर लाए. 
६. बच्चों पर विषय चुनने पर अपनी मरजी न लादें. उन्हें खुद चयन करने दें. ताकि आगे चलकर उनपर पढ़ाई का बोझ न पड़े.
७. क्योंकि १०वीं के बाद विषय चुनने होते हैं. चाहे सांईस हो, कॉमर्स हो या (Arts), सभी लाइनों में बहुत विकल्प होते हैं. जरूरत है तो सिर्फ अच्छी मेहनत की |
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