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bad benefits of comfort zone kya hai -क्या है कम्फर्ट जोन और जानिये इसके नुकसान और इससे कैसे बाहर निकला जाये कम्फर्ट जोन क्या है? ऐसी आरामदायक स्थिति जहां आप सुकून महसूस करते है और बाहर नहीं आना चाहते, तो आप comfort zone में है |

यह जान ले की अगर आप कम्फर्ट मे रहेंगे तो क्षमताओं और दक्षताओं का परिक्षण नहीं हो पायेगा. अगर आप वहां नहीं है जहां आप जिंदगी में पहुंचना चाहते थे, तो इसके पीछे एक कारण यह हो सकता है की आप अपने कम्फर्ट जोन से अभी तक बाहर नहीं निकले है. मजेदार बात यह है की हम कभी नहीं जान पाते है की हम कम्फर्ट जोन में है, क्योंकि रोजमर्रा के कामों को ही हम इतना मुश्किल समझने लगते है जितना वे होते नहीं है. आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की कम्फर्ट जोन क्या है, कम्फर्ट जोन की पहचान कैसे करते है, इसके नुकसान क्या है और इससे कैसे बाहर निकला जाये?


comfort zone

क्या है कम्फर्ट जोन? 
ऐसी आरामदायक स्थिति जिससे बाहर निकलने का आपका कभी मन नहीं करता. इस स्थिति में हमेसा आपको कम्फर्टेबल महसूस होता है. ऐसा लगता है जैसे आप जिंदगी को मजे से जी रहे है और इसी तरह जीना चाहते है. आप कोई भी Hard Work अपने हाथ में नहीं लेना चाहते. आप एक सोच का पुतला बन जाते है जो सिर्फ ख्याली पुलाव बनाता है. 
कम्फर्ट जोन की पहचान 
  • इन स्थितियों में आप कम्फर्ट जोन में है- 
  • जब कोई नया काम या थोड़े Risk वाला काम मिले, तो जवाब “ना” ही हो. 
  • कौन सा काम हो सकेगा और क्या नहीं हो पायेगा तथा उसके Results के बारे में त्वरित जवाब दे, बिना सोचे और आजमाए. 
  • अजनबियों से बात करने में हीचकिचाये. 
  • सबसे पसंदीदा जुमला हो “किसी दिन” में एक दिन यहां जरुर जाऊंगा/जाउंगी या किसी दिन में नए काम की शुरुआत करूँगा/करुँगी. 
  • हर बार यह बहाना हो की बस यह काम पूरा हो जाए तो फिर में अपने मन का काम करूँगा/करुँगी. 
  • काम, परिवार और जिंदगी को लेकर शिकायत करना |

कम्फर्ट जोन के नुकसान

1. तरक्की के मार्ग में बाधा डालना एक ही जगह रहकर, एक जैसा काम कर, जिंदगी तो काटी जा सकती है लेकिन सफलता हरगिज नहीं मिल सकती है. कहीं पर पहुँचने के लिए कहीं से निकलना जरुरी है. अगर आप कम्फर्ट जोन में रहेंगे तो आप कभी मेहनत नहीं कर पाएंगे और बिना मेहनत सफलता नहीं मिलती है, यह आपको भी पता है. 

2. आत्मविश्वास की कमी यह भी कम्फर्ट जोन में रहने का बड़ा नुकसान है. नए लोगों से मिलने से कतराना, फैसले लेने में अक्षमता, हर जगह “ना” का प्रयोग, नए काम से डरना, हर समय शिकायत रहना, हर बार Negative सोचना यह सब आत्मविश्वास की कमी के ही कारण है. 

3. परिवर्तन से डर परिवर्तन प्रकृति का नियम है. लेकिन कम्फर्ट जोन में रहने पर हम परिवर्तन से डरने लगते है. जरुरी नहीं की बदलाव हमेशा बुरा ही हो लेकिन आराम के जाल में इस कदर जकड़े होते है की बदलाव एक बुरा सपना बन जाता है. कम्फर्ट जोन वाले व्यक्ति हमेशा कुछ नया करने से डरते है और यही उनके लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित होता है. 

कम्फर्ट जोन से कैसे बाहर निकला जाये 
किसी ने सच ही कहा है की “अगर आप वह पाना चाहते है जो आपके पास अभी नहीं था तो आपको वो करना पड़ेगा जो आपने अभी तक नहीं किया है.” अगर आप भी कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना चाहते है तो इन बातों को जरुर अपने जीवन में अपनाएं. 

comfort zone

1. प्रगति के लिए जरुरी बदलाव ऐसे रास्ते पर चलना बेहद आसान होता है जहां हमेशा उजाला हो. बेहतर है की एक मशाल लेकर उस रास्ते पर चला जाये जो अभी तक खोजा नहीं गया हो. कम्फर्ट जोन से निकलने का फायदा यह है की आप वो सब करने लगते है जो कभी असम्भव दिखाई देता था. साथ ही ऐसी चीजों का अनुभव होने लगता है जो आरामदायक जिंदगी में कभी मुमकीन नहीं होता. 

2. प्रतिभा का बाहर निखर कर आना एक कहावत है ना “सोना आग में तपकर ही कुंदन बनता है”. जब हम इस जोन से बाहर आने लगते है तब ही हमारी प्रतिभा निखर कर सामने आती है. कम्फर्ट जोन में रहने पर हम वही करते है जो आसान और सुरक्षित होता है और जिसके Results से हम अवगत होते है. शांत समुन्द्र में कोई भी अच्छा नाविक नहीं बन सकता है. कम्फर्ट जोन से बाहर आकर हम बदलावों से घबराते नहीं है बल्कि उनसे निपटने का तरीका जान जाते है. 

3. बदलाव करना और उस पर टिके रहना पूरी तरह से बदलाव करना ही कम्फर्ट जोन से बाहर आना नहीं है. यह भी नहीं है की आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ समय ब्रेक लेकर पुन: जोन में लौट जाए. आप अभी जो काम कर रहे है उसी को नए स्तर पर ले जाना भी एक चुनोतीपूर्ण कार्य है और यह करना भी कम्फर्ट जोन से बाहर आना है. 

4. अपने डर पर काबू पायें कम्फर्ट जोन से बाहर ना निकल पाने का एक सबसे बड़ा कारण है डर. बदलाव, जिम्मेदारी, भविष्य से डरने की वजह से सही मौके पर कदम पीछे खींच लिए जाते है. कम्फर्ट जोन से निकलने पर आप अनुयायी ना बनकर एक अधिनायक के रूप में सामने आते है. नहीं चुनोतियों के साथ नए रास्ते और नई संभावनाओं के द्वार खुलने लगते है. 

5. केवल मुश्किल काम जरुरी नहीं कोई भी मुश्किल काम करने का मतलब यह नहीं की आप कम्फर्ट जोन से बाहर आ गए है. अगर कोई काम चुनोतिपूर्ण नहीं है तो इसका मतलब यह है की अब भी आप कम्फर्ट जोन में है. एक न्यूक्लियर इंजिनियर एक ऐसी चीज कर रहा है जो काफी मुश्किल है लेकिन वह इसे करना जानता है. इसका मतलब यह है की वो अभी भी अपने कम्फर्ट जोन में है. वहीँ दूसरी तरफ कोई बच्चा आगरा सायकिल चलाना सीखता है तो वह अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आ चूका है |
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  1. एकांत त्रिपाठी22:04

    आपकी पोस्ट वाकई काबिले तारीफ है | मुझे समझ मे आ गया कि मैं अभी कमफर्ट जॉन मे हु और मुझे अब बाहर आना है

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