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MUHARRAM - क्यो मनाया जाता है मोहर्रम, इसके पीछे का क्या है इतिहास, क्या आपको पता है अगर नहीं तो जानिए | मोहरर्म के महीने मे इस्लाम धर्म के संथापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयाइयो का कत्ल कर दिया गया था |  हजरत हुसैन का इराक शहर के यजीद के फौज के द्वारा कर्बला मे शहीद किया गया तो हुसैन के शहीद होने की याद मे मोहर्रम मनाया जाता है |

इस्लामी कैलंडर के अनुसार मोहर्रम साल का पहला महिना है | मोहर्रम के 10दे दिन को आशुरा के नाम से जाना जाता है | इस दिन सरकारी कार्यालय मे भी छुट्टी होती है | साल 2018 का मोहर्रम कब पड़ेगा तो आपको बता दे 2018 का मोहर्रम 21 सितंबर को है |
moharram kab hai

मोहर्रम का रोजा

इस्लाम मे मोहर्रम महीने के 9वे तारीख को रोजा रखा जाता है और माना जाता है इस दिन रोजा रखने वाले को 30 रोजे के बराबर सवाब मिलता है | अगर कोई व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से रोजा रखे तो उसके गुनाहो की माफी हो जाती है | यह रोजा रखना इस्लाम मे फर्ज तो नहीं है लेकिन इस रोजे को सुन्नत का दर्जा दिया गया है |

कत्ले हुसैन असल में मरगे यजीद हैं, 
इस्लाम जिन्दा होता है हर कर्बला के बाद।'

कर्बला की लड़ाई - 

कर्बला की जंग सच और झूठ की लड़ाई थी | कर्बला की लड़ाई मे एक तरफ मोहम्मद साहब के नवासे, अली के बेटे और फातिमा के जिगर के टुकड़े इमाम हुसैन के साथ थे और दूसरे तरफ ऐयाश व जालिम बादशाह यजीद और उसकी पूरी फौज थी | यजिद ने यह बादशाही माली ताकत और जुर्म करके पाया था | इस लड़ाई मे इमाम हुसैन की शहादत हुई | ये शहादत केवल इस्लाम के मानने वालों के लिए नहीं थी वरन्‌ पूरी इंसानियत के लिए थी |
इंसान को बेदार तो हो लेने दो,
हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन।'

उम्मीद है आपको इस्लामिक मोहर्रम का इतिहास< मोहरम कितने तारीख को है इत्यादि के बारे मे जानकारी अच्छी लगी |
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