पोलियो की खोज किसने की परिचय poliyo ki khoj

पोलियो की खोज किसने की परिचय poliyo ki khoj

पोलियो एक तरह की बिमारी है इसलिए इसका इलाज करने के लिए पोलियो का ड्राप खोज कियापोलियो की खोज पोलियो को पूरी तरह से खंत्म करने के लिए महान वैज्ञानिक हिलैरी कोप्रोव्यस्की ने वैक्सीन को बनाया था | जो एक ड्रॉप के रूप मे बचो को पिलाया जाता है | इसके 2 साल बाद वैज्ञानिक जोनास साक ने पोलियो वैक्सीन इंकजेकसन की खोज की थी | मुह की दुर्गंध दूर करने के उपाय

पोलियो क्या है ?

पोलियो एक रोग है जो विषाणु द्वारा फेलता है यह रोग ज़्यादातर बच्चो मे पाया जाता है | लेकिन जरूरी नहीं की यह रोग केवल बच्चो को हो यह व्यस्को को भी हो सकता है | व्यस्कों मे रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है इसलिए बच्चो की तुलना मे यह रोग वयस्को को कम होता हैं | पोलियो रोग मे वायरस संकर्मण पाये जाते है | इसलिए यह रोग एक दूसरे के संपर्क मे आने से भी हो सकता है | यह रोग अस्वच्छ भोजन, मल पदार्थ, जल के संकर्मण से हो सकता है | इस बीमारी का असर विकलांगता के रूप मे दिखाई दे सकता है साथ ही यह लाइलाज बीमारी है | इस बीमारी से बचना है एक मात्र उपाय है |


पोलियो क्या है खोज किसने की

पोलियो के लक्षण क्या है ?

अधिकतर अधिकतर पोलियो के लक्षण का पता नहीं चल पाता लेकिन अन्य तरह के लक्षण इस तरह के होते है. हल्के संक्रमण की पहचान -
  • पेट दर्द
  • उल्टी
  • गले मे दर्द
  • धीमा बुखार
  • डायरिया [ अतिसार ]
  • सिर दर्द
मस्तिष्क और मेरुदंड का मध्यम संक्रमण की पहचान -
  • मध्यम बुखार
  • गर्दन की जकड़न 
  • मांस-पेशियाँ नरम होना तथा विभिन्न अंगों में दर्द होना जैसे कि पिंडली में (टांग के पीछे) 
  • पीठ में दर्द 
  • पेट में दर्द 
  • मांस पेशियों में जकड़न 
  • अतिसार (डायरिया) 
  • त्वचा में दोदरे पड़ना 
  • अधिक कमजोरी या थकान होना
मस्तिष्क और मेरुदंड का गंभीर संक्रमण की पहचान 
  • मांस पेशियों में दर्द और पक्षाघात शीघ्र होने का खतरा (कार्य न करने योग्य बनना) जो स्नायु पर निर्भर करता है (अर्थात् हाथ, पांव) 
  • मांस पेशियों में दर्द, नरमपन और जकड़न (गर्दन, पीठ, हाथ या पांव) गर्दन न झुका पाना, गर्दन सीधे रखना या हाथ या पांव न उठा पाना 
  • चिड़-चिड़ापन 
  • पेट का फूलना 
  • हिचकी आना 
  • चेहरा या भाव भंगिमा न बना पाना
  • पेशाब करने में तकलीफ होना या शौच में कठिनाई (कब्ज) 
  • निगलने में तकलीफ 
  • सांस लेने में तकलीफ 
  • लार गिरना 
  • जटिलताएं 
  • दिल की मांस पेशियों में सूजन, कोमा, मृत्यु

पोलियो का उपचार कैसे करे ?

पोलियो से बचने के लिए टीका लगाया जाता है और इस का आविष्कार डॉ. शाक द्वारा किया गया यह इंजेक्शन अन्तः पेशियो मे लगाया जाता है | पोलियो एक व्यक्ति से व्यक्ति मे फेल सकता है इसलिए पोलियो रोगी का ज्वर उतरने के बाद कम से कम 3 सप्ताह अलग रखना चाहिए साथ ही रोगी के मल मूत्र तथा शरीर से निकलने वाले अन्य छीजो की सफाई रखनी चाहिए | पोलियो मे डीडीटी का टीका बहुत लाभकारी होता है | अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर की परामर्श जरूर ले |
जीरो और एक की खोज कैसे किसने की जानिए

जीरो और एक की खोज कैसे किसने की जानिए

जीरो शून्य और एक ( 0 - 1 ) की खोज किसने की क्या आपको पता है ? इस तरह के सवाल कई प्रतियोगी परीक्षा में पूंछा जाता है जैसे - जीरो की खोज किसने की, १ की खोज किसने की १ से 10 तक की खोज किसने किया तो ऐसे में आपके पास उत्तर नहीं होता है तो आज आप जान लीजिए जीरो की खोज किसने किया ?

जीरो की खोज गणित के क्षेत्र में एक महान खोज है इसलिए ही दुनिया में कई खोजे में से इसे एक महान खोज माना जाता है . जीरो की गणित के क्षेत्र में बहुत ही बड़ा योगदान माना जाता है . जीरो की सबसे अच्छी बात यह है की अगर आप इसे किसी संख्या से गुणा करते है तो आपको जीरो ही प्राप्त होता है . साथ ही अगर जीरो को किसी भी संख्या में जोड़ा या घटाया जाए तो संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है मतलब जो संख्या पहले थी वह वैसे ही बनी रहती है .
जीरो के ब्निना कोई संख्या बड़ी नहीं हो सकती है जैसे अगर आप एक में जीरो लगाते है तो 10 बन जाता है आप जितने जीरो लगाते है उतनी ही संख्या बड़ी होती चली जाती है .

Zeero Ki Khoj kisne kiya


जीरो की खोज किसने की थी ?

जीरो की खोज भारत में हुआ ऐसा माना जाता है और इसके खोजकर्ता आर्यभट्ट है लेकिन अमेरिकन गणितज्ञ आमिर एक्जेल का कहना है शुन्य की खोज भारत में नहीं बल्कि कम्बोडिया में हुआ .लेकिन शून्य के अविष्कार को लेकर कुछ अलग तथ्य भी है की अगर शून्य का अविष्कार 5वीं सदी में आर्यभट्ट जी ने किया फिर हजारों वर्ष पूर्व रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे ऐसे कुछ अलग अलग बाते है लेकिन आज तक यही कहा जा रहा की शून्य का अविष्कार 5वीं सदी में आर्यभट्ट जी ने किया था |

शून्य की खोज के बारे में सवाल 

सवाल अगर शून्य का आविष्कार 5वी सदी मे आर्यभट्ट जी ने किया तो फिर हजारो साल पहले रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए ? बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे ? कृपा करके यदि जवाब पता हो तो बताए ?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले हम आपको बता देते है की कथित तौर पर शून्य की खोज  का श्रेय आर्यभट्ट जी को जाता है


जीरो के खोजकर्ता आर्यभट्ट के बारे में 

आर्यभट्ट एक महान गणितज्ञ और खगोलविद थे जिनका जन्म पाटलीपुत्र मे हुआ था जिसे आज हम पटना के नाम से भी जानते है लेकिन बहुत से मतो के अनुसार उनका जन्म दक्षिण भारत [ केरल ] मे भी माना जाता है लेकिन यह सही मायने मे कह पाना की आर्यभट्ट यहा जन्मे थे तो यह एक मुश्किल बात है क्योकि आर्यभट्ट के जन्मस्थान को लेकर बहुत सारे विवाद है.
  • आर्यभट्ट एक महान गणितज्ञ थे और इन्होने ही गणनाओ को एक विशेष चिन्ह द्वारा लिखने की शुरुवात की थी उनसे पहले किसी भी लेख मे गणनाओ को शब्दो मे लिखा जाता था Ex - एक दो तीन गयारा पंद्रा बीस आदि पर आर्यभट्ट ने गणनाओ को आधुनिक नम्बर सिस्टम मे लिखना शुरू किया उदाहरण - १ २ ३ ११ २० 
यहा पर ध्यान दे की १ २ ३ हिंदी चिन्ह है जबकि आर्यभट्ट ने इनकी जगह किसी और चिन्ह का प्रयोग किया था. अब हम अपने सवाल पर वापस आते है अगर शून्य का आविष्कार 5वी सदी मे आर्यभट्ट जी ने किया तो फिर हजारो साल पहले रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे कृपा करके यदि जवाब पता हो तो बताए ?

यह एक तर्कसंगत सवाल है आखिर बिना शून्य के 10, 100 या अन्य संख्याओ की गणना कैसे हो सकती है तों इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमे पहले इतिहास को जानना होगा || पर उससे पहले हम आपको बता दे की खोज [ discovery] और आविष्कार [ Invention ] मे क्या अंतर है 

खोज - खोज का अर्थ होता है किसी ऐसी को समाज के सामने लाना जिसके बारे मे समाज को जानकारी ना हो परंतु वह हो 

आविष्कार - किसी नई विधि रचना या प्रक्रिया के माध्यम से कुछ नया बनाना आविष्कार कहलाता है


Ex - न्यूटन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त की खोज की अर्थात गुरुत्वाकर्षण न्यूटन के पहले भी था तो गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त को न्यूटन की खोज कहा जाएगा ना की आविष्कार

कथित तौर पर शून्य की खोज करने वाले आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी मे आता देहांत 550 ईस्वी मे हुआ और रामायण तथा महाभारत का काल इससे भी पुराना है वर्तमान मे हिन्दी भाषा का लेखन कार्य देवनागरी लिपि मे किया जाता था और इससे पहले की लिपि ब्राह्मी लिपि मानी जाती थी

इस आधार पर हम कह सकते है की की शून्य की खोज देवनागरी लिपि के परचलन के बाद हुई || इससे पहले शून्य की परिकल्पना भी नहीं थी . ब्राह्मी लीपी मे गणना की व्यस्था थी लेकिन इसमे गणना शून्य नहीं था आप चित्र माध्यम से समझ सकते है की शून्य के बिना भी 10 20 या 100 जैसी संख्याओ की गणना हो सकती थी 



अब आप यह सवाल शायद ना पूछे की क्योकि अब आपको पता लग गया होगा की रावण के 10 सिर और कौरवो की संख्या गिनना उस समय मे कैसे सम्भव हुआ ?


शून्य - शून्य की कहानी बहुत रोचक है क्योकि शून्य एक ऐसी संख्या है जो स्वय मे कुछ नहीं है मतलब यह खाली है लेकिन खाली होते हुए भी पूर्ण है एक बार मैंने एक पुस्तक पढ़ी थी जिसमे अध्यात्म और शून्य का संबन्ध बताया गया था | जिसमे शून्य को ईश्वर बताया गया था उस पुस्तक के अनुसार भारतीय संस्कृति मे आत्मा को परमात्मा [ ब्रहम ] का अंश माना गया है साथ ही भारतीय संस्कृति में ‘अहं ब्रह्मास्मि’ भी कहा गया है और उस ब्रह्म को पूर्ण माना गया है।


शून्य का आधार कुछ ऐसा ही बताया गया है शून्य की तरह ईश्वर को भी पूर्ण माना गया है
 0 (परमात्मा)-0 (आत्मा)= 0 (परमात्मा) 

इसको आप इस तरह समझ सकते है आत्मा = परमात्मा |
टाइटैनिक जहाज का रहस्य क्या आप जानते है कैसे डूबा था

टाइटैनिक जहाज का रहस्य क्या आप जानते है कैसे डूबा था

अपने दौर के दुनिया के सबसे बड़े जहाज टाइटेनिक के डूबने और जहाज पर जैक और रोज की प्रेम कहानी पर आधारित हॉलीवुड movie टाइटेनिक को आपने देखा ही होगा लेकिन टाइटैनिक जहाज का रहस्य और टाइटैनिक जहाज कैसे डूबा था इसके बारे में आप कितना जानते है ? शुन्य की खोज किसने किया क्लिक से पढ़े ?

टाइटैनिक movie किसने बनाया ?

टाइटैनिक Movie को बनाने वाले का नाम है लियोनार्डो डि कैप्रियो और केट विंसलेट अभिनीत 1998 में बनाया गया | और वास्तविक टाइटेनिक जहाज के डिजाइनर थॉमस एंड्रूज थे लेकिन इस फिल्म मे जो आपको नहीं दिखाया गया है वह आप हमारी पोस्ट टाइटेनिक जहाज के बारे मे रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य मे जानगे 


Titanic jahaj ki kahani

टाइटैनिक जहाज की जो घटना हुई वह एक सच्ची घटना थी इसलिए ही शायद टाइटैनिक मूवी को देखने के लिए लोग आज भी कहते है .

टाइटेनिक जहाज कैसे डूबा था ?

RMS टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित यात्री जहाज था। वह साउथम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी प्रथम यात्रा पर, 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ। चार दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912 को वह एक हिमशीला से टकरा कर डूब गया जिसमे 1,517 लोगों की मृत्यु हुईं जो इतिहास की सबसे बड़ी शांतिकाल समुद्री आपदाओं में से एक है।
  •  टाइटैनिक जहाज डूबने से ठीक पहले एक जापानी यात्री बच निकला था. जब वह जापान ठीक-ठाक पहुंच गया तो वह बहुत शर्मिंदा हुआ. उसने भावुक मन से कहा कि उसे भी जहाज के साथ डूब जाना चाहिए था .
  •  टाइटैनिक फिल्म का सबसे भावुक पल तब था जब जहाज में बैंड के सदस्य यात्रियों को शांत करने के लिए लगातार संगीत बजा रहे थे. ऐसा वास्तव में भी हुआ था. जहाज में सवार बैंड ग्रुप ने लोगों को डूबने के डर से शांत करने के लिए घंटों तक संगीत बजाया था.
  •  मिल्टन हरशे, जिसने दुनिया की सबसे बेहतरीन चाकलेट बार का निर्माण किया था, ने भी टाइटैनिक जहाज की टिकट खरीदी थी. लेकिन उसकी बाद में जहाज में जाने की योजना बदल गयी थी.
  •  टाइटैनिक जहाज में चार चिमनियाँ थी, लेकिन इसकी चौथी चिमनी काम नहीं करती थी. चौथी चिमनी सिर्फ दिखावे के लिए बनाई गई थी. आधे से ज्यादा जीवनरक्षक किश्तिओं को उनकी पूरी क्षमता तक नहीं भरा गया था
  • टाइटैनिक जहाज में यात्रियों को रहने के लिए तीन श्रेणीयों में विभाजित किया गया था
  •  इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जिसमें सिर्फ एक हिमशैल की वजह से पूरा जहाज डूब गया था
  •  टाइटैनिक जहाज के डूबने के एक दिन पहले जहाज में जाने वाले यात्रियों पर मॉक-ड्रिल करने की योजना थी जिसमें यह बताया जाता कि आपातकालीन स्थिति में क्या करना चाहिए. लेकिन यह योजना स्थगित कर दी गयी थी 
  •  टाइटैनिक जहाज, जिस हिमशैल से टकराया था, वह हिमशैल लगभग पिछले 1000 वर्षों से समुद्र में तैर रहा था
  •  टाइटैनिक फिल्म का बजट टाइटैनिक जहाज की उस समय की कुल कीमत से भी ज्यादा था
  •  टाइटैनिक जहाज डूबने से बचने वाले लोगों में से एक कुक भी था. वह सिर्फ इसी कारण से बच गया था क्योंकि उसने इतनी शराब पी ली थी कि जिससे उसका शरीर ठण्ड में भी गर्म रहा
  •  उस समय कैलिफोर्निया नाम का एक ओर जहाज, टाइटैनिक जहाज के नजदीक था लेकिन दोनों जहाजों में संचार व्यवस्था टूट गई थी, जिससे कैलिफ़ोर्नियन जहाज पर सवार लोग उनका बचाव नहीं कर सके 
  • टाइटैनिक जहाज में अपनी पहली यात्रा पर 10 अप्रैल 1912 को शुरु की थी. चार दिन की यात्रा के बाद 14 अप्रैल 1912 को वह हिमखंड से टकरा कर पानी में डूब गया था. जिसमे 2,208 यात्रियों और चालक दल शामिल थे. जिसमे से 1496 लोग मरे थे और 712 लोग बच गये थे
  • 26 जोड़े इस जहाज पर अपना हनीमून मनाने आये थे
  • टाइटैनिक जहाज दुर्घटना से बचने वाली अंतिम यात्री Millvina Dean थी. जिसकी 31 मई 2009 को 97 साल में मृत्यु हुयी थी 
  • बर्फ के पहाड़ से टकराने के बाद टाइटैनिक को डूबने में 2 घंटे 40 मिनट लगे थे
  • टाइटैनिक जहाज त्रासदी को लेकर वेबसाइट बनी है जिस पर दुर्घटना के बारे में विस्तृत विवरण दिए गये हैं. इस वेबसाइट पर जहाज के क्रू मेम्बेर्स और कर्मचारियों, मृतकों और बचने वालों की पूरी लिस्ट भी दी गयी है. देखें वेबसाइट

टाइटैनिक जहाज कैसे बना था दुनिया का सबसे बड़ा जहाज ?

  • टाइटेनिक जहाज को बनाने मे करीब 7500000$ का खर्च हुआ था .
  • जहाज की लम्बाई 291.5 मीटर थी जो उस दौर की सबसे बड़ा जहाज था .
  • इसमे एक दिन मे करीब 825 टन कोयला इस्तेमाल होता था और 100 टन राख हर रोज़ निकलता था

टाइटैनिक जहाज के लिए कयामत की वो रात
  • 16 लाइफ वोट इस्तेमाल करने मे करीब 80 मिनट लग गये ! पहली लाइफ वोट मे केवल 28 लोग बैठे क्योंकि बाकी लोगों को लगा ही नही की जहाज डूब सकता है 
  • लाइफ वोट मे 472 से ज्यादा लोग आ सकते थे .

टाइटैनिक जहाज बर्फ की चट्टान की कहानी 
  • टाइटेनिक को उस चट्टान से टकराने मे पहले छह चेतावनी मिली थी !
  • टाइटेनिक जब डूब रहा था वह जहाज के सफर का चौथा दिन था ! और ज़मीन से करीब 640  किलोमीटर दुर !
  • बर्फ की चट्टान दिखने और जहाज के उससे टकराने के बीच सिर्फ तीस सेकंड का फासला था !
  • जहाज को डूबने मे 2 घंटे और 40 मिनट का समय लगा था .

आपको हमारी पोस्ट टाइटेनिक जहाज के बारे मे कैसी लगी बताना न भूले और आपके पास टाइटेनिक जहाज के बारे मे  मे ज्यादा जानकारी हो तो हमसे share करे जिससे हम आपकी जानकारी और टाइटेनिक जहाज के बारे मे  लोगो को ज्यादा जानकारी दे सके.
कोयल चिड़िया के बारे मे रोचक जानकारी

कोयल चिड़िया के बारे मे रोचक जानकारी

कोयल in english cuckoo कोयल चिड़िया की पहचान उसकी सुरीली आवाज से होता है और अगर किसी स्त्री की सुंदर सी आवाज हो तो उसकी तुलना कोयल चिड़िया से की जाती है पर क्या आपको पता है कोयल चिड़िया से जुड़े रोचक जानकारी अगर नहीं तो आज हम जानेगे कोयल चिड़िया के बारे मे रोचक जानकारी |

About Cuckoo in Hindi


कोयल चिड़िया के बारे मे रोचक जानकारी

  • कोयल एक माध्य आकार का पक्षी है नर कोयल नीलापन के लिए काला होता है और मादा तितर पक्षी की तरह धब्बेदार चितकबरी होती है |

  • कोयल ही एक ऐसी अकेली चिड़िया है जो अपना अंडा दूसरे पक्षी के घोसले मे रखती है और तो और दूसरी पक्षी के अंडो को उठा लेती है या फिर खा जाती है |
  • कोयल चिड़िया का रंग पूरी तरह कला होता है और यह भारतीय पक्षी है |
  • कोयल पक्षी अपने कुक्कू सुरीली आवाज के लिए पहचानी जाती है पर आपको यह नहीं पता हो शायद की नर कोयल ही सुरेली गीत की तरह आवाज निकालता है |
  • मादा कोयल 12 से 20 अंडे देती है और सारा अंडा कौवे के घोसले मे देती है |
  • कोयल को कुक्कू नाम से भी जाना जाता है और कोयल झारखंड राज्य की राज्य पक्षी है |
  • कोयल पक्षी की 120 से अधिक प्रजातिया पाई जाती है |
  • कोयल पक्षी का वैज्ञानिक का नाम युडाईनेमिस स्कोलोपेकिस है | और कोयल चिड़िया ज़्यादातर एशिया और अफ्रीका मे पाई जाती है |
  • कोयल का मुख्य भोजन कीड़े - मकोड़ो और झालिया है |
  • कोयल पक्षी कभी भी खुद के लिए घोसला नहीं बनाती |



आपको कैसी लगी पोस्ट कोयल चिड़िया के बारे मे रोचक जानकारी अगर आपको अच्छा लगे तो आप हमारी सराहना कर सकते है |
पंखे का आविष्कार किसने किया

पंखे का आविष्कार किसने किया

पंखा क्या है और इसका क्या प्रयोग क्या है आज सबको पता है लेकिन क्या आपको पता है पंखे का आविष्कार किसने किया || अगर आप नहीं जानते पंखे का आविष्कार किसने किया तो आज हम आपको बताने वाले है पंखे को क्सिने बनाया .


आज आधुनिक समय है और इस समय पंखे कई तरह के हमें देखने को मिलते है जैसे डिजिटल पंखा भी इस समय हमें देखने को मिलता है .

fan ki khoj

पंखा क्या है  What Is A Fan ?

पंखा एक विद्युतचालित युक्ति है। इसका उपयोग प्राणियों की सुविधा के लिये (गर्मी से रक्षा), हवा को बाहर निकालने (exhaust), शीतन (cooling) या अन्य गैसीय परिवहन आदि के लिये किया जाता है। यांत्रिक रूप से पंखा उन सभी युक्तियों को कह सकते हैं जो एक "वेन" (vane) या वेनों का समूह को घुमाकर हवा की धारा उत्पन्न करने के काम आये। पंखे कम दाब उत्पन्न करके बहुत अधिक मात्रा (आयतन) में हवा का प्रवाह उत्पन्न करते हैं। इसके विपरीत गैस कम्प्रेसर अपेक्षाकृत अधिक दाब पर कम आयतन हवा फेंकने के लिये बनाया जाता है.

पंखे के आविष्कारक के बारे मे 


पंखे का आविष्कार अमेरिकन इंजीनियर huyler Skaats Wheeler ने 1882 मे किया और तब उनकी उम्र 22 साल की थी || और जो पंखा जो उन्होने बनाया वह दो ब्लेड के थे || 1 9 04 में उन्हें द फ्रैंकलिन इंस्टीट्यूट के जॉन स्कॉट मेडल से सम्मानित किया गया और 1 9 05 से 1 9 06 तक अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स के अध्यक्ष रहे।

पंखा का उपयोग

आपको मालूम ही गर्मी आते ही गर्मी से सबकी नानी याद आने लगती है तो ऐसे मे हमे पंखा ही है जो गर्मी मे आराम दे सकता है, वैसे पंखे का उपयोग गर्मी मे ठंडी हवा लेने के किया जाता है और आधुनिक समय मे कई तरह के पंखे मौजूद है .


पंखा क्या है और पंखे की खोज किसने की आपने जाना तो आपके पोस्ट कैसी लगी हमे जरूर बताए और किसी परकार की खोज या किसी टोपिक पर आप जानकारी चाहते है कमेन्ट करे हम जल्दी ही आपको पूरी डिटेल्स मे जानकारी देने की कोसिश करेंगे ||