तलाक के नये तरीके नियम कागजात pdf download 2019

तलाक के नये तरीके नियम कागजात pdf download 2019

तलाक के नये तरीके नियम  2019 meaning in hindi

आज तलाक के बारे मे बात करते है जैसे तलाक के नये नियम क्या है 2019 तलाक का meaning in hindi divorce भी कहा जाता है. talak lene ka sabse asan aur achuk upay तरीके आज हम आपको बताने जा रहे है । 

हमारे देश के क्या कानून और न्यायिक प्रणाली है हम सबको पता है आप कोर्ट के चक्कर काटते रहे फिर भी न्याय नहीं मिल पाता और पूरी लाइफ कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते है लेकिन अब कुछ केसो के न्यायिक प्रणाली मे बदलाव किया गया है | तलाक नियम कानून, तलाक प्रक्रिया क्या है ??
talak lene ka sabse asan aur achuk upay


हिन्दू अधिनियम 1955 तहत धारा 13 बी मे तलाक से संबन्धित नई न्यायिक प्रणाली जारी की गई है | जिससे तलाक [ divorce ] लेना आसान होगा | आज हम चर्चा करने वाले है तलाक से संबंधी नए कानून और प्रावधान के बारे मे |


तलाक के आसान तरीके कागजात नियम नमूना pdf download

  • अगर कोई दंपति अपनी इच्छा से अलग होना चाहती है तो दोनों की तरफ से जिला अदालत मे तलाक के लिए संयुक्त याचिका दायर की जा सकती है |
  • हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 13-बी, विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28 और भारतीय तलाक अधिनियम धारा 10-ए की धारा में आपसी सहमति पर तलाक का प्रावधान है।
  • अगर कोई दंपति काफी लंबे समय से एक दूसरे से अलग रह रहे है साथ ही एक दूसरे के साथ रहने मे असहज महसूस कर रहे है और अगर काउनी तौर पर एक दूसरे से अलग होने के लिए तैयार है तो आपसी सहमति से एक दूसरे तलाक के लिए फाइल कर सकते है |
  • तलाक के लिए दंपती को संयुक्त याचिका पर हस्ताक्षर करके उसी अदालत मे जहा से उनकी शादी हुई थी या जहा वे शादी के बाद रह रहे है | अपनी याचिका वही दायर कर सकते है |
  • पति और पत्नी द्वारा संयुक्त याचिका दाखिल करने के बाद अदालत में आगे की प्रक्रिया के लिए उन दोनों के बयान रिकॉर्ड किए जाते है |
  • याचिका दायर करने के बाद अदालत उनके रिश्ते को एक और मौका देने के लिए छ माह का समय और सलाह दी जाती है |
  • इस छह महीने के वक्त मे दंपति का मन बदल जाए और एक दूसरे के साथ रहने के लिए तैयार है तो दंपति तलाक की याचिका वापस भी ले सकते है |
  • लेकिन अगर 6 महीने की अवधि के बाद भी वे एक साथ रहने के लिए तैयार नहीं है तो अदालत उन्हें उनकी सुनवाई और जांच के बाद तलाक देती है। इस के बाद वे कानूनी तौर पर अलग हो जाते है |
  • हालांकि आपसी सहमति से तलाक प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान है, लेकिन इसमें अपने बच्चों की जिंदगी, कस्टडी प्रोपर्टी जैसे मामलों में उन्हे आपस में निपटाना होता है |

talak lene ka sabse asan aur achuk upay niyam



भारत मे पत्नियों के लिए तलाक के लिए निम्न आधार है जिसे केवल पत्नी ही दायर कर सकती है |
  • अगर पति बलात्कार जैसी घटना से लिप्त हो |
  • शादी अगर हिन्दू अधिनियम के तहत हुई है और पति पहली पत्नी के जीवित रहते हुए भी दूसरी शादी की हुई है तो इस केस मे पहली पत्नी तलाक की मांग कर सकती है |
  • एक महिला तलाक के लिए याचिका दायर कर सकती है अगर उसकी शादी पंद्रह वर्ष की उम्र से पहले कर दी गई हो तो और वो शादी का त्याग कर सकती है जब तक की उसकी उम्र 18 साल नहीं हो जाती है |
  • अगर एक वर्ष तक पति के साथ कोई सहवाश है और पति अदालत के पत्नी के रख रखाव के फैसले की अनदेखी करता है तो पत्नी तलाक की याचिका कर सकती है |
पति भी मांग सकता है तलाक होने पर गुजारा भत्ता talak kaise le tarika hindi

पति भी मांग सकता है तलाक होने पर गुजारा भत्ता talak kaise le tarika hindi

talak hone par pati bhi patni se le sakta hai gujara bhatta - शादी की खवाइस तो सबकी होती है लेकिन तलाक कोई नहीं चाहता लेकिन कभी कभी कुछ ऐसे कारण बन आते है कि इंसान को न चाहते हुए भी तलाक लेना पड़ता है | तलाक चाहिए कैसे ले, तलाक के नियम और कानून हमारी पिछली पोस्ट मे पढे talak ke niyam यहा क्लिक से पढे talak process hindi.
talak photo

पहले तलाक लेना काफी मुश्किल था क्योकि हमारे देश की न्यायिक प्रक्रिया काफी पेचीदा थी लेकिन आज हमारे देश के न्यायिक प्रणाली मे बदलाव आ चुके है इसलिए तलाक लेना थोड़ा आसान हो गया |


हिन्दू मेरिज एक्ट तलाक कैसे ले -

तलाक लेना या देना है इसकी वयाख्या हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा - 13 मे की गई है | कानूनी जानकार मोहम्मद नजीर जी का कहना है कि हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत पति या पत्नी तलाक के लिए अर्जी या याचिका दाखिल कर सकते है |

तलाक के नियम

व्याभिचार [ शादी के बाहर शारीरिक रिश्ता बनाना ] शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना, नपुंसकता, बिना बताए छोड़कर जाना, हिंदू धर्म छोड़कर कोई और धर्म अपनाना, पागलपन, लाइलाज बीमारी, वैराग्य लेने और सात साल तक कोई अता-पता न होने के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की जा सकती है।



तलाक की अर्जी या याचिका - 
  • तलाक की याचिका आडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत मे दी जाती है | याचिका दाखिल करने के बाद अदालत द्वारा दूसरी पार्टी को नोटिस जारी किया जाता है और दोनों पार्टियो को बुलाया जाता है | कोर्ट प्रयास यही करती है दोनों पार्टियो का आपस मे समझोता हो जाए लेकिन जब समझोते की गुंजाइस नहीं होती प्रतिवादी पक्ष को वादी द्वारा लगाए गए आरोपो के मद्देनजर जवाब देने को कहा जाता है | इस कार्य के लिए आमतौर पर 30 दिन का समय दिया जाता है |
  • कोर्ट दोनों पक्षो को सुनने के बाद अदालत कोर्ट मामले मे इशू प्रेम करती है और फिर गवाहो के बयान शुरू होते है अर्थात वादी ने जो भी आरोप लगाए है उस उसके पक्ष मे सबूत देने होते है |
हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 24 तलाक - एडवोकेट मोहम्मद नजीर जी ने बताया कि हिन्दू मैरिज एक्ट धारा 24 के तहत दोनों पक्षो मे से कोई भी गुजारे भत्ते के लिए किसी भी स्टेज पर याचिका दाखिल कर सकता है लेकिन यह पति या पत्नी की सैलरी के आधार पर गुजारा भत्ता तह किया जाता है | तलाक के मामले बच्चो को अगर उम्र 12 साल से कम हो तो कोर्ट माँ के साथ भेजती है | पति या पत्नी जिसकी कमाई ज्यादा होती है उसे ही गुजारा भत्ता देना पड़ता है |