बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning जाने | bismillah hir rahman nir raheem meaning

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning जाने | bismillah hir rahman nir raheem meaning

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning - सबसे पहले तो आपको बता दे बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम को सही ढंग से लिखे तो - बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम लिखा जाता है. बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम का इस्लाम धर्म में बहुत महत्त्व है क्योकि कोई भी मुसलमान अपने दिन की शुरुवात बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम से ही करता है लेकिन ऐसे बहुत से भाई लोग है जो जानना चाहते है कि बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम का क्या मतलब होता है तो ऐसे में आज हम आपको इसका मतलब यहाँ बताने जा रहे है.

 bismillah hir rahman nir raheem meaning
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बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम Meaning in Hindi

कोई भी काम शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह कहने का मतलब होता है कि मैं ये काम अल्लाह के नाम पर शुरू कर रहा हूँ. या इस काम में मैं अल्लाह कि मदद चाहता हूँ। अल्लाह बहुत दयावान है और अपनी दया हम तक पहुंचाता है।

इस्लाम धर्म में बिस्मिल्लाह का मतलब -
बिस्मिल्लाह में तीन शब्द है बिस्मिल्लाह. अर-रहमान, अर-रहीम जिसका अर्थ होता है -
बिस्मिल्लाह - शुरू करता हु
अर रहमान - अल्लाह दयालु है
रहीम - अल्लाह के 99 नामो में से एक नाम

बिस्मिल्लाह के फायदे hindi में

  • इस्लाम धर्म की सबसे बड़ी पुस्तक कुरान शरीफ है और इस पुस्तक को जब खोलते है तो सबसे पहला वर्ड या लफ्ज. जो आता है वह है बिस्मिल्लाह, जब इतनी बड़ी किताब बिस्मिल्लाह से शुरू हो रहा हो तो हमें भी अपने जीवन के सभी काम बिस्मिल्लाह से ही शुरू करना चाहिए .
  • कोई भी काम अगर बिना बिस्मिल्लाह पढ़े शुरू किया जाए तो वह काम पूरा नहीं होगा - एक हदीश के मुताबिक़ पैगंबर (SAW) ने कहा, “कोई भी अहम् काम जो बिस्मिल्लाह से शुरू नहीं होता है वह ना मुकम्मल है”।
  • खूबसूरत मआनी के साथ अल्लाह के 99 नाम हैं। और उन 99 नामों में से 3 नाम बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम में हैं । 1. अल्लाह 2. रहमान 3. रहीम जब कोई बिस्मिल्लाह पढता है तो वो अल्लाह के इन तीन नामों से पुकारता है
  • बिस्मिल्लाह अगर कोई शख्स पढता है तो शैतान उस शख्स से दूर भागता है साथ ही शैतान उसे बहकाने में ना कामयाबी हासिल करता है.
  • जब भी हमारी त्वचा ( खाल ) फट जाती है और उसमें से खून बहता है, तो कई बार बिस्मिल्लाह कहो और उस पर फूंको । बिस्मिल्लाह से इंशा अल्लाह जादुई फायदा मिलेगा ।
  • कुछ लोग मानते है 786 का मतलब बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम होता है लेकिन सच क्या है जाने क्लिक से.
786 कैसे बना | 786 kaise Bana in urdu

786 कैसे बना | 786 kaise Bana in urdu

786 आज के समय में 786 को लेकर कई सारे सवाल खड़े है जैसे - 786 कैसे बना, 786 का मतलब हरे कृष्णा, इससे पहले हमने आपको बताया था 786 की उत्पत्ति कैसे हुई ? आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे की 786 कैसे बना तो इसके पीछे की एक कहानी आपको सूना देते है इससे आपको समझ में आ जाएगा 786 का इस्लाम में क्या महत्व है और कैसे बना ?



786 kaise Bana in urdu

786 कैसे बना ?

786 कैसे बना इसको जानने के लिए आपको इतिहास के पन्नो को उलटना होगा - जब जहालत का समय अरब में हुआ करता था, उस समय वहा का एक नम्बर का खेल हुआ करता था, इस खेल को अब्जद के नाम से जाना जाता था.

इसे समझने के लिए देखे -
आलिफ = 1
बे = 2

इस तरह से गिनतियो को मिलाकर अरब के लोग फाल खोलते थे, अब यह फाल क्या है सबसे पहले आपको यह समझना होगा.

मान लीजिए आपका नाम फैज है - तो फैज में  = फ, ये, जवाद = value of numbering = total number.

मतलब नाम के एक शब्द के अंक और बाकी शब्दों के अंक को एक साथ करने के बाद उन सब को जोड़ कर एक वैल्यू निकाल लेना फिर चित्तियों पर लिखकर मोड़ देना फिर जिसके नाम का चीत्तीया बनाया गया है उनसे कहाँ जाता था, लिखो कोई एक नम्बर, अगर तुम्हारे द्वारा लिखा नम्बर और चित्तियो का नम्बर match हो जाता है तो तुम जैसा चाहते हो वैसा ही तुम्हारा काम हो जाएगा.

तो इसे पुरे खेल को ही फाल खोलना कहा जाता है - यह एक तरह का जहालत ही था जिसे शरियत ने हराम करार दिया है. 

आज के समय लोगो ने अब्जद के ऐतबार से यह मतलब निकाल लिया, 786 का मतलब -  बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम होता है. अब बात साफ़ हो गयी की 786 का मतलब केवल बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम नहीं होता है क्योकि बहुत से और मजहब में भी 786 को बहुत ही ज्यादा फायदे वाला नम्बर माना जाता है साथ ही आज के कुछ गैरमुस्लिम 786 को ॐ से भी तुलना करते है तो हम तो यही आपसे कहेंगे गुमराही के रास्ते से बाहर निकले.

786 kaise Bana in urdu

इस्लाम में 786 का इस्तेमाल करना कैसा है ? तो आपको बता दे इस्लाम में शोर्टकट करने का तरीका बिद्दत कहाँ जाता है और शरियत में कुछ नया अकीदा इजाद करना, इसका मतलब आप अच्छे से जानते है.

786 ki utpatti kaise hui


अगर 786 का मतलब बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम हो सकता है तो कितना आसान हो जाता की हम सभी सुरह और दुआ नमाज में नम्बर से पढ़ते जैसे -

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम = 786
सुरह फातिहा = 1000
सुरह बकरा = 2000

इस तरह से हम पूरी कुरआन शरीफ को आसानी से पढ़ लेते और कितना आसान तरिका होता है लेकिन अफ़सोस यह बिद्द्त है जो जहन्नुम की तरफ हमें और आपको ले जाता है.
शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui - शिमर इब्न जिल्जुशन या शिमर (अरबी: شمر بن ذي الجوشن الضبابي الهوازني) बानू किलाब जनजाति से जिल्जुशन का पुत्र था, जो अरब के हौजिनिनी क़सीद जनजातियों में से एक था। हज़रत अब्बास इब्न अली की मां उम्म उल-बानिन भी बनू किलाब जनजाति से थीं। इस्लाम में शिमर की एक अत्यचारी प्रतिष्ठा है। वह याजीद प्रथम के प्रति निष्ठा का भुगतान करने और इब्न ज़ियाद की उमाय्याद सेना में शामिल होने से पहले खारीज नेता था। वह उस व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जिसने कर्बला की लड़ाई में इस्लामी पैगंबर हज़रत मुहम्मद सहाब के नवासे हज़रत हुसैन इब्न अली की हत्या कर दी थी।

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟

शिमर को अंततः हज़रत अल-मुख्तार ताकाफी के सैनिकों ने मार डाला था, जिन्होंने हज़रत हुसैन और उनके परिवार के हत्यारों पर बदला लेने की कामना की थी। शिमर शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिया थे और जंगली कुत्तों द्वारा नुचबाया गया था।



Shemr ki maut kaise hui

कर्बला का वाक्या, शिमर की मौत 

शिमर, यह वही मलून है जिसके बारे में हजुर पाक ने फ़रमाया था - एक काला सफ़ेद कुत्ता, मेरी ओलाद का खून पिएगा, 9 मुहर्रम 61 हिजरी को शिमर अपने 4 हजार फ़ौज लेकर कर्बला पंहुचा.

कर्बला का वाक्या सुने - एक रियायत के मुताबिक़ शिमर ही हजरत इमाम हुसैन रजी अल्लाह ताला अंहो को शहीद करता है और अपने घोड़े हुसैन इब्ने अली के मुबारक जिस्म पर दौड़ा देता है फिर इनके सीने पर बैठकर, इनका मुक़द्दस सिर काट देता है. अल्लाह की लानत हो इस पर.

शिमर को ब्रश की बिमारी थी इसकी वजह से उमके मुह पर काले और सफ़ेद निशान थे, कर्बला के वाक्ये के बाद शिमर कुफा चला जाता हैं.

66 हिजरी में शिमर मुख़्तार के खिलाफ जंग में हिस्सा लेता है लेकिन शिमर की हार होती है फिर वह वहा से भाग जाता है. मुख्तार के साथी शिमर का पीछा करते हुए और उस तक पहुच जाते है और शिमर का क़त्ल करके उसका सर काटकर ले आते है और इसके जिस्म को कुत्ते के आगे फेक देते है.

अहले बेत का सर काटने वाला यह मलून इस तरह से अपने अंजाम तक पहुच जाता है , अल्लाह हमारे दिलो को अहले बैत के मोहब्बत से भर दे - आमीन 

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ? - जब जमीन पर यजीद मरदूद मर रहा था, यजीद की मौत का भी वक्त आ चुका था, तीन साल आठ महीने गुजर चुके थे, यजीद की मौत कैसे हुई ? इसकी दो वजहे बताई जाती है, पहला की यजीद शराब पीता था और शराब के नशे में इतना धुत रहता था की फेफड़ा ख़राब हो था, इस वजह से पुलंज की बिमारी हो गयी थी, जिस कारण यजीद तड़प तड़प कर मरा. यजीद की मौत का सिलसिला पुरे ३ दिन का था. यजीद और इसाई लड़की का वाक्या ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

दूसरा कारण - यजीद जालिम शिकार पर जाने का बहुत शौक़ीन था, एक बार यजीद शिकार खेलने जंगल में गया, पहाडियों के बीच से जा रहा था की यजीद की नजर एक इसाई लड़की पर पड़ गयी, वह इसाई लड़की बहुत खुबसूरत लड़की थी, इसलिए यजीद उस लड़की का आशिक हो गया, इस तरह से यजीद उस लड़की को ढूंढने दुसरे दिन जंगल गया, तीसरे दिन भी गया, इस तरह से यजीद उस लड़की का मक़ाम किसी तरह से हाशिल कर लिया और उस लड़की से बताया - " मैं अमीरे शाम हूँ " इस वख्त मेरी ही हुकूमत ही चल रही, इसाई लड़की ने सूना था जो इस वख्त अपनी इमारत का दावा कर रहा है वह हुसैने इब्ने अली का खून करवा दिया है.

Yazeed Ko kisne Mara


लड़की समझ गयी और उसने यजीद से कहाँ ठीक, तुम ही हो जिसे अमीरे शाम कहा जाता है, हाँ, तुम्हारा नाम ही यजीद इब्ने मविदा है यजीद ने कहाँ हाँ, लड़की ने कहाँ अच्छा ठीक है, तुम अपने हरम में अपने महल में मुझे ले चलना चाहते हो तो मैं चलने के लिए तैयार हूँ लेकिन एक शर्त है -

कल आओ तुम, फिर उसके बाद मैं तुम्हारे साथ चलने की तैयारी कर लेती हूँ फिर यजीद दुसरे दिन अपने 8 सवारों को लेकर गया शिकार के लिए, और सारे लोगो को पीछे कर दिया और लड़की के मकान के नजदीक गया तो मकान के अन्दर से लड़की निकली, लेकिन लड़की ने खंजर छुपा लिया था बगल में और यजीद के घोड़े के पीछे बैठ गयी.

जब यजीद बात करते हुए आगे बढ़ा तो इसाई लड़की ने बहुत ही फुर्ती से खंजर को निकाला और निकालने के बाद पीछे से खंजर यजीद को मारा पुस्त में, खंजर का लगना था कि वह अचानक से वह जमीन पर गिरा, फिर लड़की ने फुर्ती से लड़की ने खंजर मारा और यजीद संभल न सका, इस तरह से इसाई लड़की ने यजीद को कई बार खंजर से वार किया और उसे वही काट करके रख दिया.

अब लड़की वहां से निकल आयी लेकिन यजीद का कटा फटा जिस्म वही पड़ा था, काफी समय के बाद जब तलाशते हुए यजीद के सिपाही गए तो देखा यजीद का कटा फटा जिस्म पड़ा है. तो सिपाही उसके जिस्म को उठाकर महल ले आए . तो इस तरह से यजीद की मौत हुई और यजीद को एक इसाई लड़की ने मारा.

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

yazeed ki maut kaise hui - इंसानियत के दुश्मन और इमाम हुसैन का कातिल yazeed ki maut ka waqia आज हम आपको सुनाने जा रहे है - ऐसे बहुत से इस्लामिक भाई है जो यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui, यजीद की मौत का वाक्या सुनना चाहते है तो आज हम आपको यजीद की मौत की कहानी पुरे विस्तार से सूना रहे है. yazeed ki maut kaise hui यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut ka waqia यजीद कैसे मरा था yajid kaise mara yajid ki maut kaise hua kabr kaha hai

मक्का मदीना में हिन्दू क्यों नहीं जा सकते ?
मक्का मदीना में शिवलिंग का क्या सच है रहस्य जाने ?

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

आपको बता दे कर्बला की जो जंग हुई थी यह यजीद और इमाम हुसैन के दरमयान नहीं थी बल्कि यह हुसैनियत और यजीदियत के दरम्यान की लड़ाई थी क्योकि अगर दो लोगो के बीच की लड़ाई होती तो यजीद जीत गया था यह सभी को पता है इमाम हुसैन शहीद हो गए थे और यजिद तख्तेताज पर काबिज हो गया था. 

मगर यह लड़ाई नजिरियत की थी इसलिए यजीदियत हार गई और हुसैनियत आज भी जिन्दा है साथ ही इस लड़ाई के साथ यजीदियत का जनाजा निकल गया . वह तख्तोताज जिसके लिए यजीद ने इतना कुछ किया था. उस तख़्त पर उसके अपने बेटे ने ही थूका.

तुम जितना तरासोगे, उतना ही खरा होगा,
यह इस्लाम का पौधा है जितना काटोगे उतना ही हरा होगा

yazeed ki maut kaise hui

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut ka waqia

यजिद को एक भयानक बिमारी हो गयी जिस कारण यजीद बिमारी का गिरफ्तार हो गया, यजिद की बिमारी का यह हाल था की कौलेंज की बिमारी के कारण यह हाल था कि उसकी आंते जलने लगी थी. वहां के हाकिम परेशान होकर कहने लगे " यह कैसी बत्तरिन बिमारी " है की इसमें पेत अन्दर से जल रहा था ?

इस बिमारी के कारण यजीद को इतनी प्यास लगती थी कि वह पानी के लिए तरसता था लेकिन जब यजिद पानी पीता था तो वही पानी यजिद के पेट को जलाता था.

इस कारण यजिद अपना सर पिटता रहता था और उसके महल के लोग यजीद को देखकर यह कहते थे कि यह अजाब हुसैन इब्न अली को प्यासा रखने के बदौलत है.

यजीद वकत का बादशाह होने के बाद भी, पानी की एक एक बूंद के लिए तरसता था, जब यजीद अपनी बिमारी की इन्तहा को पहुच गया तो अपने बेटे को बुलाकर कहा कि बेटा, मेरा अब कुछ भरोसा नहीं, मुझे मौत कभी भी आ सकती है.

इसलिए अब तू मेरे तख़्त को संभाल यानी अब तू मेरे तख़्त पर बैठ जा लेकिन यजिद का बेटा मुआविया तख़्त पर बैठने के लिए राजी नहीं हुआ. और यजीद से कहने लगा - कि जैसे जमाना आप पर लानत कर रहा है वैसे ही मुझ पर भी लानत करे, नहीं, हरगिज नहीं, मैं इस तख़्त पर नहीं बैठूँगा.

यह तख़्त नवासे रसूल के खून से आलूदा है, इसलिए मैं इस तख़्त पर लानत करता हूँ, इसके बाद यजीद की बिमारी और भी बढ़ गयी और अरब के हर किस्म के नशे, यजिद के सामने पेश किया जाने लगा ताकि यजीद को बिमारी का दर्द महसूस न हो, और वह हर वक्त नशे में रहे, और वह प्यास के लिए तड़पे न.

इसी नशे की हालत मन यजीद अपने सिपाहिओ से कहने लगा, मेरा वह बन्दर कहाँ है जो हमेशा मेरे साथ रहता है, तो फिर सिपाहिओ ने कहाँ की शायद वह जंगल की तरफ गया होगा.

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यजीद अपने सिपाहियों के साथ घोड़े पर बैठकर जैसे ही बाहर गया तो घोड़े ने नवासे रसूल के कातिल को अपने पीठ से गिरा दिया और यजीद का पाँव घोड़े के रकाब में फंस गया, वह घोडा दौड़ता रहा और यजीद जमीन पर गिरते हुए उसका सिर एक पत्थर से जा टकराया, मगर वह घोडा न रुका.

यहाँ तक कि यजीद का पूरा जिस्म खून से लतपथ हो गया, यजीद की फ़ौज ने, जब यजीद की लाश को देखा तो वह कहने लगे, हुसैन इब्ने अली के खून की यही सजा है.

यजिद इस तरह बहुत ही जिल्लत की मौत मरा जबकि कर्बला में इमाम हुसैन का रोजा चमकता हुआ वहां पर आज भी मौजूद है और वहां पर लोगो का ताता लगा रहता है, मगर यजीद की कब्र कहाँ है ?

तो आपको बता दे यजीद की कब्र मजुले दमस्क में है, यह जगह दम्शक में है, जहाँ लोग कूड़ा फेकते है और इस कूड़े के नीचे कही यजीद की कब्र है, मगर निशान भी नहीं कहाँ है, लेकिन इतना पता है की इस कूड़े के नीचे ही कही यजीद की कब्र है.

न यजीद का वो सितम्ब रहा
न ज्याद की रही वह जफा 
रहा तो नामे हुसैन 
जिसे ज़िंदा रखती है कर्बला
मक्का मदीना में शिवलिंग स्टोरी इन हिंदी | makka madina shivling story wikipedia

मक्का मदीना में शिवलिंग स्टोरी इन हिंदी | makka madina shivling story wikipedia

मक्का मदीना wikipedia 2019 - आज हम बात करने वाले है क्या है मक्का मदीना का सच ? बहुत से लोग ने youtube पर vidio upload किया गया है और बताया जा रहा है मक्का मदीना में शिवलिंग है लेकिन क्या है सच तो आज हम मक्का मदीना में शिवलिंग की स्टोरी इन हिंदी में आपको जानकारी दे रहे है . मक्का मदीना में शिवलिंग स्टोरी इन हिंदी | makka madina shivling story wikipedia मक्का मदीना wikipedia 2019 makka madina history in hindi download

आज हम बात करेंगे शहरे मक्का की, जी हाँ इस्लामिक भाइयो आज कल युट्यूब पर कई विडिओ अपलोड किया जा चुका है जिसमे बताया जा रहा है कि शहरे मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था और मोहम्मद हजरत सल्ल. सल्लम महादेव की पूजा मक्का में करते थे. साथ ही यह भी विडिओ में कहा जा रहा है की हजरे अश्वत हिन्दूयो का शिवलिंग है जिसको मुसलमान हज के मौके पर उसको पुंजते है, चुमते है, हाथ लगाते है. और आबे जमजम को गंगा नदी से तुलना की जा रही है और इस तरह का vidio बनाने वाले, वह हिन्दू भाई है जो इस्लाम की अच्छी तरह से जानकारी हासिल नहीं कर पाए और उनको अच्छी तरह से इस्लाम पढ़ना भी नहीं आया.

मक्का मदीना में हिन्दू क्यों नहीं जा सकते है ?


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आज हम इस विडिओ में आपके इस तरह की गलत सोच को दूर कर देते है - भाइयो इस तरह की पोस्ट और vidio बनाने की जरुरत इसलिए पड़ी क्योंकि आप खुद देखे आज कई सारे विडिओ और आर्टिकल बहुत सारी वेबसाइट पर पब्लिश किया गया है जिसमे अल्लाह के घर को महादेव के मंदिर से और हजरत अस्वद को शिवलिंग से जोड़ा जा रहा है. तो मक्का मदीना में शिवलिंग स्टोरी इन हिंदी | makka madina shivling story wikipedia मक्का मदीना wikipedia 2019 makka madina history in hindi download


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कुछ हिन्दुओ का मानना है की शहरे मक्का में काबा के अन्दर 360 मुर्तिया थी, इसे मोहम्मद साहब [ सल्ल. ] ने काबे के अन्दर से बहार निकाल दिया. इसलिए यह मक्का शहर मक्केश्वर महादेव का मंदिर था. जबकि हकीकत यह है की इस्लाम मजहब में काबा एक मुकाम है, जहाँ दुनिया के हर कौने से मुसलमान आकर अल्लाह की इबादत करते है, जिस घर को अल्लाह के दो पैगम्बर - हजरत इब्राहिम अलेहिस्लाम और हजरत इस्माइल अलेहिस्लम के हाथो बनाया गया. जमाना गुजरते इस पाक घर में भी जाहिल लोगो ने मुर्तिया रख दी गई फिर यह मुर्तिया हटा दी गई क्योकि यह काबा मुसलमानों का किबला है और मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत नहीं करते है इसलिए पूरी दुनिया के सभी मुसलमान चाहे कही भी हो नमाज के वक्त अपना मुंह काबा की तरफ करता है. यह मुसलमानों का किबला है न की मकेश्वर महादेव का मंदिर.


हजरे अस्वद क्या है ?
अब बात हजरे अस्वद की, कुछ हिन्दुओ का मानना है की काबा के एक कौने में लगा हुआ काला पत्थर शिवलिंग है, जैसा की शिवलिंग भी काला पत्थर है और शिवलिंग को हिन्दू भाई हाथ लगाते है, चुमते है और उसे पुंजते है और इसी तरह से मुसलमान भी हजर अस्वद को चुमते है, हाथ लगाते है लेकिन हकीकत यह है की हम हजर अस्वद को पुंजते नहीं है और इबादत भी नहीं करते है.

hajar aswad history
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मुसलमान भाई हजर अस्वद को हाथ लगाते है, चुमते है लेकिन ऐसा इसलिए क्योकि हजर अस्वद को मोहम्मद सल्ल. सल्लम की इकाअत मुसलमान भाई करते है इसके पीछे का वाक्या सुने -

एक बार हजरत उमर रजी अल्लाह अंहो, हज के मौके पर, हजर अस्वद को चूम कर कहा - ऐ हजर अस्वद तू पत्थर है, न ही तू नाफा पंहुचा सकता है और न ही नुकसान पंहुचा सकता है.

मैं तुझे इसलिए चूम रहा हु - कि मैंने मेरे मुस्तफा को, तुझे चुमते हुए देखा है इसलिए हम मुसलमान मोहम्मद सल्ल ताला अलेहिसल्लम की इकाअत करते है, न की तेरी इबादत करते है.

आपको बता दे यह हजर अस्वद काला पत्थर जन्नत से आया हुआ पत्थर है, शिवलिंग नहीं है, यहाँ काला पत्थर पहले सफ़ेद पत्थर था, जो इब्ने आदम के गुनाओ के कारण काला हो गया.

कुछ समय पहले ही एक हिन्दू महिला ने कहाँ था की मुसलमान अल्लाह और मोहम्मद के सिवा किसी को नहीं पुन्जते तो इस हिन्दू महिला की एक बात बिलकुल सही है की मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत नहीं करता मगर उस महिला की दूसरी बात मोहम्मद की पूंजा, तो आपको बता दे मुसलमान न ही हजर अस्वद की पूंजा कर सकता है न ही मोहम्मद सल्ल. ताला अलेहिसल्लम की इबादत कर सकता है.

क्योकि मुसलमान अगर मोहम्मद की इबादत करते है तो वह मुसलमान, मुसलमान ही नहीं रहता इलसिए मुसलमान मोहम्मद की इकाअत करते है, न की इबादत. इबादत केवल अल्लाह की करते है.

आबे जमजम क्या है ?

तीसरी और आखिरी बात कही जा रही है - आबे जमजम को दूसरी गंगा नदी कहा जा रहा है की जैसे हिन्दू गंगा जल को पवित्र जानकार घर लाते है वैसे ही मुसलमान जमजम का पानी अपने घर लाते है.

jamjam water
jamjam water
हिन्दू भाई कहते है जैसे गंगा नदी है वैसे मकेश्वर महादेव मंदिर के नजदीक जमजम नदी है लेकिन यहाँ सरासर झूट हैं. आपको बता दे जमजम नदी की सूरत में नहीं है बल्कि जमजम कुआं की सूरत में है जो हजरत इस्माइल अलेहिस्लम के एड़िया रगड़ने से अल्लाह ताला ने इस्माइल अलिअस्लम की प्यास बुझाने के लिए मुसलमानों को यह मुक़द्दस पानी अता किया है.

इसके बारे में इस्लामिक भाइयो के नबी का कोल है की जमजम में शिफा है -

हे कौले मोहम्मद, हे कौले खुदा
फरमान न बदला जाएगा 
बदलेगा जमाना लाख मगर 
कुरआन और ईमान न बदला जाएगा 

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मक्का मदीना में हिंदू क्यों नहीं जा सकते | makka madina me hindu kyo nahi ja sakte shivling photo

मक्का मदीना में हिंदू क्यों नहीं जा सकते | makka madina me hindu kyo nahi ja sakte shivling photo

आपने भी सूना होगा मक्का में हिन्दू का प्रवेश वर्जित है लेकिन मक्का मदीना में हिंदू क्यों नहीं जा सकते इसकी जानकारी हर कोई चाहता है तो आज हम आपको इसका जवाब दे रहे है - मक्का मदीना में हिंदू क्यों नहीं जा सकते | makka madina me hindu kyo nahi ja sakte shivling photo.

आपको बता दे मक्का जाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण शहर जेद्दाह है जोकि एक बंदरगाह है. यहाँ पर इसे अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग सेंटर पर भी है.

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कौन थे इमाम हुसैन ? कर्बला का वाक्या सुने

जेद्दाह में रास्तो पर कई तरह के बोर्ड लगे होते है और उनपर हिदायत लिखी हुई होती है - मक्का मदीना केवल इस्लाम के मानने वाले मुसलमान का प्रवेश वर्जित है मतलब दुसरे मजहब के मानने वाले लोगो का मक्का मदीना में प्रवेश वर्जित है. जेद्दाह से मक्का जाने वाले रास्तो पर जो हिदायत या सुचना लिखी होती है वह सब अरबी जुबान में लिखा होता है इसलिए इन्हें हर कोई नहीं पढ़ सकता.

जबकि पहले लिखा होता था "काफिर' का मक्का मदीना में प्रवेश वर्जित है लेकिन आज के समय में इस लाइन को बदलकर लिख दिया गया है नानमुस्लिम यानी गैरमुस्लिम का मक्का मदीना में प्रवेश वर्जित है. गैरमुस्लिम यानी हिन्दू, यहूदी, पारसी, और बौद्ध भी मक्का मदीना में प्रवेश नहीं कर सकते.


makka madina me hindu kyu nahi ja sakte

मक्का मदीना में हिंदू क्यों नहीं जा सकते makka madina history in hindi download

मक्का मदीना में हिन्दू या जो इस्लाम को मानने से इनकार करता है उसे जाने की अनुमति है ऐसा क्यों ? तो इस मामले पर इस्लाम के जानकार एक आलिम का ब्यान है जिन्होंने इस सवाल का जवाब बहुत ही अच्छी तरह से समझाया है -

एक महिला ने आलिम से सवाल किया - आप लोग कहते हैं कि हिन्दू मुस्लिम में भाई चारा होना चाहिए और एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए. लेकिन जब आप लोग साल में एक बार हज करने के लिए मक्का मदीना जाते हैं तो वहाँ पर हिन्दू को क्यों नहीं जाने देते हैं,महिला का सवाल होता है कि एक तरफ आप लोग कहते हैं कि हिन्दू मुस्लिम सब बराबर हैं फिर मक्का मदीना में जाने की हिंदुओं को इजाजत क्यों नहीं है।

इस सवाल के जवाब पर आलिम ने बताया मक्का मदीना में गैरमुस्लिम नहीं जा सकते इसका मिसाल पढ़े -
जिस तरह से हम भारत के नागरिक होने के बाद भी कुछ भारत के हिस्सों में नहीं जा सकते, ख़ास तौर पर उन जगहों पर जहाँ सेना की छावनी होती है और सेना के राज होते है, ऐसी जगह पर केवल वतन पर जान लुटाने वाले ही जा सकते है जैसे - सेना में भर्ती हुए जवान 

ठीक इसी तरह से मक्का और मदीना भी है जिसे इस्लाम की छावनी कहाँ जाता है इसलिए यहाँ पर केवल वही जा सकता है जो इस्लाम पर अपनी जान लुटा सकता है इसलिए मक्का मदीना में केवल मुसलमानों को जाने की इजाजत है .

आलिम ने बात और कही जब हम एक देश से दुसरे देश जाते है तो हमें वीजा की जरुरत पड़ती है अगर हमारे पास वीज़ा नहीं होगा तो हमें किसी दूसरे देश का टिकट ही नहीं दिया जाएगा।ऐसे मक्का मदीना जाने के लिए भी वीज़ा की ज़रूरत होती है, और वह वीज़ा इस्लाम का कलमा है,अगर कोई मक्का मदीना जाना चाहता है तो वह कलमा पढ़ ले,उसके बाद वह आराम से मक्का मदीना जा सकता है।

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तो दोस्तों इस कारण से मक्का मदीना में गैरमुस्लिम, नानमुस्लिम और इस्लाम को न मानने वालो को जाने से रोका गया है.

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कौन थे इमाम हुसैन कर्बला का वाक्या | kaun the imam hussain karbala ka waqia

कौन थे इमाम हुसैन कर्बला का वाक्या | kaun the imam hussain karbala ka waqia

अगर नहीं पता है आपको की इमाम हुसैन कौन थे, तो आज हम आपको इमाम हुसैन कर्बला स्टोरी इन हिंदी, कौन थे इमाम हुसैन कर्बला का वाक्या | Imam Hussain kaun The Karbala karbala ka waqia सबकुछ hindi me बताने जा रहे है -

दोस्तों यह कहानी शख्सियत की है जिसके लिए इस्लाम में कहा जाता है की उसने अपना सिर कटाकर इस्लाम को बचाया. इमाम हुसैन जिन्होंने दिन-ए-इस्लाम को बचाने के लिए दुनिया में एक से बढ़कर एक कुर्बानी दी.

इस कुर्बानी में उनके छह महीने के बेटे की शहादत और 18 साल के बेटे की शहादत भी शामिल है, इस अजीम शख्शियत का नाम है हुसैन [अ.] 

हाँ यह वही हुसैन है जिनके लिए मोहम्मद साहब [ स.अ.स. ] ने कहा था की -

हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से 

लेकिन फिर भी इंसानियत का दुश्मन यजिद नाम के शख्स ने इमाम हुसैन का क़त्ल कर दिया क्योकि याजिद चाहता था उसकी हर बात मानी जाए और इमाम हुसैन यजीद को खुदा माने. 

सुन्नी मुसलमान के चौथे खलीफा और शिया मुस्लिम के पहले इमाम हजरत अली के दुसरे बेतरे है हुसैन. पहले बेटे का नाम है हसन.
पैगम्बर मोहम्मद साहब की बेटी का नाम है फातिमा जो की हुसैन की मां है इस तरह पैगम्बर मोहम्मद साहब हुसैन के नाना है.

हुसैन को शिया मुस्लिम अपना तीसरा इमाम मानते है पहले इमाम हजरत अली और दूसरे हसन. इनके बाद हुसैन.

कर्बला का वाक्या | Imam Hussain kaun The karbala ka waqia

क़त्ले हुसैन असल में मरगे यज़ीद है
इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद

मुसलमानों के मुताबिक हुसैन कर्बला अपना एक छोटा सा लश्कर लेकर पहुंचे थे, उनके काफिले में औरतें भी थीं. बच्चे भी थे. बूढ़े भी थे. इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक 2 मोहर्रम को कर्बला पहुंचे थे. 7 मोहर्रम को उनके लिए यजीद ने पानी बंद कर दिया था. और वो हर हाल में उनसे अपनी स्वाधीनता स्वीकार कराना चाहता था. हुसैन किसी भी तरह उसकी बात मानने को राज़ी नहीं थे. 9 मोहर्रम की रात इमाम हुसैन ने रोशनी बुझा दी और अपने सभी साथियों से कहा कि मैं किसी के साथियो को अपने साथियो से ज़्यादा वफादार और बेहतर नहीं समझता. कल के दिन हमारा दुश्मनों से मुकाबला है. उधर लाखों की तादाद वाली फ़ौज है. तीर हैं. तलवार हैं और जंग के सभी हथियार हैं. उनसे मुकाबला मतलब जान का बचना बहुत ही मुश्किल है. मैं तुम सब को बखुशी इजाज़त देता हूं कि तुम यहां से चले जाओ, मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं होगी, अंधेरा इसलिए कर दिया है कभी तुम्हारी जाने की हिम्मत न हो. यह लोग सिर्फ मेरे खून के प्यासे हैं. यजीद की फ़ौज उसे कुछ नहीं कहेगी, जो मेरा साथ छोड़ के जाना चाहेगा. कुछ देर बाद रोशनी फिर से कर दी गई, लेकिन एक भी साथी इमाम हुसैन का साथ छोड़ के नहीं गया.

इसके बाद दिन छिपने से पहले तक हुसैन की तरफ से 72 शहीद हो गए. इन 72 में हुसैन के अलावा उनके छह माह के बेटे अली असगर, 18 साल के अली अकबर और 7 साल के उनके भतीजे कासिम (हसन के बेटे) भी शामिल थे. इनके अलावा शहीद होने वालों में उनके दोस्त और रिश्तेदार भी शामिल रहे. हुसैन का मकसद था, खुद मिट जाएं लेकिन वो इस्लाम जिंदा रहे जिसको उनके नाना मोहम्मद साहब लेकर आए.


हुसैन ने फ़ौज से मुखातिब होकर कहा कि अगर तुम्हारी नजर में हुसैन गुनाहगार है तो इस मासूम ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है. इसको अगर दो बूंद पानी मिल जाए तो शायद इसकी जान बच जाए. उनकी इस फरियाद का फ़ौज पर कोई असर नहीं हुआ. बल्कि यजीद तो किसी भी हालत में हुसैन को अपने अधीन करना चाहता था. यजीद ने हुर्मला नाम के शख्स को हुक्म दिया कि देखता क्या है? हुसैन के बच्चे को ख़त्म कर दे. हुर्मला ने कमान को संभाला. तीन धार का तीर कमान से चला और हुसैन की गोद में अली असगर की गर्दन पर लगा. छह महीने के बच्चे का वजूद ही क्या होता है. तीर गर्दन से पार होकर हुसैन के बाजू में लगा. बच्चा बाप की गोद में दम तोड़ गया. 71 शहीद हो जाने के बाद यजीद ने शिम्र नाम के शख्स से हुसैन की गर्दन को भी कटवा दिया. बताया जाता है कि जिस खंजर से इमाम हुसैन के सिर को जिस्म से जुदा किया, वो खंजर कुंद धार का था. और ये सब उनकी बहन ज़ैनब के सामने हुआ. जब शिम्र ने उनकी गर्दन पर खंजर चलाया तो हुसैन का सिर सजदे में बताया जाता है, यानी नमाज़ की हालत में.

मुसलमान मानते हैं कि हुसैन ने हर ज़ुल्म पर सब्र करके ज़माने को दिखाया कि किस तरह ज़ुल्म को हराया जाता है. हुसैन की मौत के बाद अली की बेटी ज़ैनब ने ही बाकी बचे लोगों को संभाला था, क्योंकि मर्दों में जो हुसैन के बेटे जैनुल आबेदीन जिंदा बचे थे. वो बेहद बीमार थे. यजीद ने सभी को अपना कैदी बनाकर जेल में डलवा दिया था. मुस्लिम मानते हैं कि यज़ीद ने अपनी सत्ता को कायम करने के लिए हुसैन पर ज़ुल्म किए. इन्हीं की याद में शिया मुस्लिम मोहर्रम में मातम करते हैं और अश्क बहाते हैं. हुसैन ने कहा था, ‘ज़िल्लत की जिंदगी से इज्ज़त की मौत बेहतर है.
ॐ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई in hindi | OM Ki Utpatti Kaise Hui

ॐ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई in hindi | OM Ki Utpatti Kaise Hui

ॐ meaning in hindi - ॐ शब्द की उत्पत्ति का रहस्य क्या है ? ॐ शब्द ही ब्रहम है ॐ ही यह प्रत्यक्ष जगत् है। ॐ ही इस जगत की अनुकृति है। ॐ-ॐ कहते हुए ही शस्त्र रूप मन्त्र पढ़े जाते हैं। ॐ से ही अध्वर्यु प्रतिगर मन्त्रों का उच्चारण करता है। ॐ कहकर ही अग्निहोत्र प्रारम्भ किया जाता है। ॐ कहकर ही ब्रह्म को प्राप्त किया जा सकता है। om namah shivaya, om namah shivaya in hindi

सनातन धर्म से लेकर अन्य धर्म में भी ॐ शब्द को महत्व दिया जाता है जैसे बोध्य धर्म में जप एंव उपासना के लिए ॐ को प्रचुरता के महत्व दिया जाता है. 

OM shabd Ki Utpatti Kaise Hui

राम नाम से ॐ की उत्पत्ति ?

राम नाम से 'र' 'अ' और 'म' क्रमशः ज्ञान वैराग्य व भक्ति के उत्पादक हैं । राम नाम से ॐ की उत्पत्ति राम शब्द की बहुत ही ऊँची श्रेष्ठता है वेदों में ईश्वर का नाम ॐ कहा गया है इसी ॐ में समस्त संसार की सृष्टि प्रच्छन्न है अथार्त ॐ शब्द पर यदि गंभीरता से विचार किया जाए तो इसी के विस्तार और खंड आदि से संसार की समस्त वस्तुओं का प्रादुर्भाव हुआ है सभी इसके रूपांतर मात्र हैं पार्वतीजी शिवजी से पूछती है जब संसार की सृष्टि ॐ से हुई है, फिर आप ॐ का जप क्यों नहीं करते? शिवजी कहते है- सारी सृष्टि ॐ से हुई है और राम नाम से ॐ की उत्पत्ति इसलिय में राम नाम का जप करता हु। ॐ को दूसरे प्रकार ओम से भी लिखते हैं यह रूप(ओम) उक्त ॐ का अक्षरीकृत रूप ही है । व्याकरण शास्त्र के द्वारा राम से ओम अथार्त ॐ उत्पन्न होता है । संधि के अनुसार ओम का 'ओ' अ: के विसर्ग का अक्षरीकृत रूप परिवर्तन मात्र है इस विसर्ग के दो रूप होते हैं । एक तो यह किसी अक्षर की संनिद्धि से ो हो जाता है या फिर र होता है यदि विसर्ग का रूपांतर ो न करके र किया जाए तो अ र म ही ओम का दूसरा रूप हुआ । तब इन अक्षरों के विपर्यय से राम स्वतः बन जायेगा अ र म को यदि र अ म ढंग से रखें और र म व्यंजनों को स्वरांत मानें तो राम बन जाता है । इस तरह से जब राम ॐ का रूपांतर मात्र है तो फिर राम विधि हरी हर मय भी है । राम और ॐ का विपर्यय इस प्रकार है : राम = र अ म अ र म अ : म अ ो म ओम ॐ इसी तरह ॐ का ॐ = ओम अ ो म अ र म र अ म राम इस तरह राम = ॐ इस तरह जैसे ॐ ब्रह्मा,विष्णु व शिव अथार्त विधि,हरि व हर मय है उसी तरह राम भी विधि हरि हर मय है । देवो के देव शिवजी भी ॐ का नहीं राम नाम का जप करते है, किन्तु आज जिन्हें ॐ जप का अधिकार नहीं है(शूद्र और स्त्री) केवल अपने अहंकार की पुष्टि के लिए राम नाम को छोड़ कर ॐ का जप करते है । यही अहंकार से ॐ जप करने पर भी विनाश ही होता है ।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2019 : हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्मदिन | eid milad un nabi date 2019

जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2019 : हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्मदिन | eid milad un nabi date 2019

जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2019 - आपको बता दे जश्ने ईद मिलादुन्नबी को कई और नाम से पुकारा जाता है जैसे बारावफात इसलिए कुछ लोग बारावफात कब है 2019 यह भी जानना चाहते होंगे तो आज हम 12 वफात कब है 2019 में और जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2019 में कब है के बारे में जानकारी आपको दे रहे है -

जश्ने ईद मिलादुन्नबी 2019

eid milad un nabi 2019 in India will begin in the evening of Saturday, 9 November and ends in the evening of Sunday, 10 November

क्या आपको मालुम है eid milad un nabi क्यों मनाते है अगर नहीं तो आज हम आपको बता रहे है eid milad un nabi क्यों मनाया जाता है आखिर इसका इतिहास क्या है -

जश्ने ईद मिलादुन्नबी का इतिहास -

इस्लाम के पैगम्बर यानी हजरत मोहम्मद साहब [ सल्ल. व. सल्लम. ] का जन्म हुआ था इसी ख़ुशी में इस्लाम के मानने वाले लोग जश्ने ईद मिलादुन्नबी मनाते है . 
  • इस्लाम की नींव पैगम्बर साहब ने ही रखी
  • पैगम्बर साहब आखिरी पैगम्बर है और इनके बाद कोई दुसरा पैगम्बर क़यामत तक इस दुनिया में नहीं आने वाला
  • सन् 630 में पैगंबर साहब ने अपने अनुयायियों के साथ कुफ्फार-ए-मक्का के साथ जंग की, जिसमें अल्लाह ने गैब से अल्लाह और उसके रसूल की मदद फरमाई। 
  • इस जंग में इस्लाम के मानने वालों की फतह हुई। इस जंग को जंग-ए-बदर कहते हैं। 632 ईसवी में हजरत मुहम्मद सल्ल. ने दुनिया से पर्दा कर लिया। उनकी वफात के बाद तक लगभग पूरा अरब इस्लाम के सूत्र में बंध चुका था और आज पूरी दुनिया में उनके बताए तरीके पर जिंदगी गुजारने वाले लोग हैं।
तो इसलिए मनाई जाती है जश्ने ईद मिलादुन्नबी यानी इस दिन हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्मदिन है .



भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य क्या हैं

भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य क्या हैं

भगवान शिव का नाम आते ही उनकी तीसरी आँख का जिक्र आया जाता है लेकिन भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य क्या हैं ? जब शिव की तीसरी आँख खुलती है तो क्या होता यह सब जानकारी क्या आपको है. भगवान शिव जी के कई नाम है और उनके पुत्र गणेश जी है | भगवान शिव जी के सभी नाम पुरानी कथाओ मे बताया गया है लेकिन शिव जी सबसे लोकप्रिय नाम "महादेव" है.


महादेव को देवो का देव माना जाता है इसलिए इनकी पूजा केवल मनुष्य ही नहीं दानव भी करते है | अब बात करते है महादेव के तीसरी आँख की जो सबसे विचित्र है |

भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य क्या हैं

भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य क्या हैं ?

भगवान शिव की तीसरी आँख , क्या कोई चमत्कार है ? क्या है तीसरी आँख का रहस्य - तो आपको बता देते है भगवान शिव जी की तीसरी आँख कोई अतिरिक्त अंग नहीं बल्कि दिव्य दृष्टि का प्रतीक है | यह दृष्टि आत्म ज्ञान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बताई जाती है | भगवान शिव की छवि तीसरी आँख सबसे ज्यादा प्रभावशाली बनाती है |

हर हर महादेव
सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद है और इस वेद मे जीवन का सार बताया गया है वेदो मे कहा गया है कि ब्रहम ही परम चेतना है और यही अथर्वेद भी कहता है कि आत्मा ही ब्रहम है.

हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओ मे हर हर महादेव का मतलब बताया गया है | हर हर महादेव का अर्थ होता है " हर किसी मे महादेव " अर्थात शिव साथ ही इसका अर्थ भी बताया गया है कि महादेव सभी का दोष हर लेते है और सबको पवित्र दोष रहित कर देते है |

भगवान शिव की तीसरी आंख से कामदेव को भष्म

हमारे पौराणिक कथाओ मे भगवान शिव जी के तीसरी आँख का सबसे ज्यादा जिक्र कामदेव को तीसरी आँख से भष्म करने के बारे मे मिलता है | कामदेव यानि प्रणय के देवता ने पापवृत्ती द्वारा भगवान शिव को लुभाने और प्रभावित करने की कोशिश किया था |

शिव जी .........ने अपनी तीसरी आँख खोली और उससे निकली दिव्य अग्नि से कामदेव जल कर भष्म हो गया | सच्चाई यह है कि यह कथा प्रतिकात्मक है जो यह दर्शाती है कि कामदेव हर मनुष्य के भीतर वास करता है पर यदि मनुष्य का विवेक और प्रज्ञा जागृत हो तो वह अपने भीतर उठ रहे अवांछित काम के उत्तेजना को रोक सकता है और उसे नष्ट कर सकता है |
रामनवमी का इतिहास क्यो मनाया जाता है 2020 डेट

रामनवमी का इतिहास क्यो मनाया जाता है 2020 डेट

हर साल रामनवमी का त्यौहार मनाया जाता है इलसिए कई भाई लोग पूंछते है राम नवमी 2019 डेट कब है तो इस साल की रामनवमी १४ अप्रैल को मनाया गया और राम नवमी 2020 डेट 2 अप्रैल को है जो भी आज हम आपको रामनवमी का इतिहास बताने जा रहे है .

रामनवमी क्यों मनाया जाता है ?

कहा जाता है की राम नवमी का त्योहार भगवान विष्णु के 7वे अवतार भगवान राम है और इस उपलक्ष्य मे राम नवमी मनाई जाती है | इसी दिन राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कोशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया था जो भगवान सरी कृष्ण के 7वे अवतार थे | यह त्योहार भारत मे बड़े धूम धाम से मनाया जाता है साथ ही यह फेस्टिवल भारत का प्रमुख त्योहार है |
रामनवमी का इतिहास क्यो मनाया जाता है

राम नवमी का इतिहास मे महत्व

भारत मे रामनवमी का पर्व बहुत ही आस्था और श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व है इस पर्व के दिन ही चेत्र रामनवमी का अंत होता है | हिन्दू धर्म मे रामनवमी का विशेष महत्व है क्योकि इस दिन ही भगवान श्री नाम का जन्म हुआ था | भक्तजन इस तिथि को धूम धाम से मनाते है साथ ही पवित्र मे जाकर स्नान करते है | माना जाता है स्नान से पुण्य प्राप्त होता है |

चैत्र रामनवमी 2020 पर पूजा कैसे करे ?

  • पुराणो से पता चलता है कि भगवान श्री नाम का जन्म मध्याह्न काल मे हुआ था |
  • मध्याह्न काल मे जन्म होने के कारण इस दिन तीसरे प्रहर तक व्रत रखा जाता है और दोपहर मे राम पर्व को मनाया जाता है |
  • इस दिन भगवान श्री राम और रामचरितमानस की पूजा पाठ करना उचित है |
  • नवमी पर श्री राम मूर्ति को शुद्ध करने के लिए पवित्र ताजे जल से स्नान कराना चाहिए फिर वस्त्रो से सजाकर आरती, पुष्प और पीला चन्दन इत्यादि को अर्पित करना चाहिए और भगवान राम की पूजा करे |
  • भगवान राम की भक्ति के लिए अखंड पाठ भी कर सकते है |
  • भगवान श्रीराम को दूध, दही, घी, शहद, चीनी मिलाकर बनाया गया पंचामृत तथा भोग अर्पित किया जाता है। 
  • भगवान श्रीराम का भजन, पूजन, कीर्तन आदि करने के बाद प्रसाद को पंचामृत सहित श्रद्धालुओं में वितरित करने के बाद व्रत खोलने का विधान है |
सपने में सांप देखना शुभ या अशुभ

सपने में सांप देखना शुभ या अशुभ

जब हम सो जाते है तो सपने कभी कभी आते है और सपने में सांप देखना शुभ या अशुभ है यह सोचने लगते है लेकिन सपने में सांप देखना का क्या मतलब होता है, सपने में सांप काटना देखना क्या होता है 

सपने मे सांप का देखना

सपने मे साँप नजर आना या साँप के साथ खेलते हुए सपना आना और भी कई तरह के सपने सबको कभी न कभी आ जाते है लेकिन सपनों मे कोई चीज दिखे तो इसका मतलब क्या निकाला जाए नहीं पता होता है लेकिन आज हम आपको साँप का सपनों मे आना मतलब क्या होगा बताने वाले है


सपने में सांप देखना शुभ या अशुभ

सभी कहते है और आपने सुना भी होगा की सुबह 4 - 6 Am का दिखा सपना काफी हद तक सच साबित होता है माना जाता है कि अगर कोई घटना हमारे साथ घटने वाली है तो इंसान को पूर्वआभास होने लगता है या फिर हमे हमारा शरीर उसका संकेत देने लगता है | ठीक इसी प्रकार हमारा मन भी काम करता है और कोई घटना घटने से पहले हमे उस घटना के आने की जानकारी या संकेत देना शुरू कर देता है |





रात मे सपने मे अगर साँप दिखे तो हमे यह काफी डरावना और मन को बैचेन करने वाला लगता है | और हमारे मन मे एक सवाल उत्पन्न हो जाता है कि आखिर मेरे सपने मे साँप क्यो दिखा और इसका क्या मतलब हो सकता है | तो साँप दिखने का मतलब समझे क्या होता है -

सपने में सांप काटने का मतलब क्या होता है

सपने मे साँप के साथ खेलना
सपने मे अगर आप अपने को साँप को अपने साथ खेलते हुए पाए है तो इसका मतलब आप का अंदाज काफी आशिकाना है और आपके संभोग सकती की इच्छा बड़ी मजबूत हो रही है | तो आपको संभोग करना चाहिए नहीं तो आपका मन किसी और काम मे नहीं लगेगा |

सपने में सांप का काटना देखना
अगर यह सपना आपके सपने मे आए तो आपको संभाल कर रहना चाहिए क्योकि आपके साथ कुछ ऐसा होने वाला है जिसका आपको कोई अंदाजा नहीं है |

सपने मे आपने साँप को पकड़ा या मार दिया
अगर आपके सपने मे साँप को मारा या पकड़ लिया तो आप खुश हो सकते है क्योकि यह शुभ होने का संकेत माना जाता है जिसका मतलब आपके जीवन मे कोई बड़ी जीत हासिल होने वाली है |

साँप देखकर डरना 
अगर सपने मे भयानक रूप का साँप दिखे जिससे आप डर जाते है तो इसका मतलब आपका कोई करीबी जैसे आपका कोई रिश्तेदार आपके साथ विश्वघाट करने वाला है |

साँप और नेवले की लड़ाई दिख जाना
इस प्रकार का सपना आपके लिए हानिकारक है क्योकि इसका मतलब आपके साथ कुछ ऐसा होने वाला है जिससे आपको कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पद सकते है |

नींद मे साप छत से गिरते हुए दिखना
इस तरह का सपना संकेत देता है की आपको कोई बीमारी होने वाली है या आपके घर परिवार मे किसी को होने वाली है |

बड़ा साँप दिखना सपने मे
इस प्रकार का सपना संकेत सेता है कि आपके जीवन मे बड़ा संकट आने वाला है और अगर आप इस साँप से बच जाते है तो आप इस संकट से भी बच जाएँगे |

सपने मे साँप के दाँत दिख जाना
यह आपके करीबी रिसतेदार का धोखा देने का इशारा करता है या आपके करीबी मे कोई आपको किसी प्रकार का नुकसान करने वाला है |

सपने में सफेद सांप देखना
यह आपके लिए शुभ संकेत है क्योकि सफ़ेद नाग का दर्शन घर मे सुख स्मृधी शांति या कोई बड़ी खुशी लाने का संकेत दे रही है |

बिल के अंदर साँप को जाते हुए देखना 
यहा सपना आपके लिए शुभ है बिल के अंदर साँप को जाते हुए देखने से संकेत ,मिलता है कि आपको धन संपत्ति मिलने वाली है |
अमीर कैसे बने बनने की टिप्स तरीके उपाय मंत्र

अमीर कैसे बने बनने की टिप्स तरीके उपाय मंत्र

अमीर कैसे बने बनने की टिप्स तरीके उपाय मंत्र - अमीर बनने का सपना हर कोई देखता है लेकिन अमीर कैसे बने ? अमीर बनने मंत्र उपाय तरीके क्या है ? अमीर बनने का सपना देखने से कुछ नहीं होता है उसके लिए आपको कर्म और मंत्र दोनों का सहारा लेना चाहिए तो चलिए जानते है अमीर कैसे बने ? अमीर बनने के लिए क्या करना चाहिए ? रातों रात अमीर कैसे बने ?

धन की कमी बहुत बड़ी समस्या मान सकते है क्योकि धन न होने पर इंसान के पास कई तरह की परेशानीया आ जाती है तो अगर पैसे की कमी है और आप अपनी जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहे है | फिर आपको मेहनत करनी होगी उसके साथ ही मंत्रो का भी उच्चारण करना होगा जिससे आपकी परेशानीया कम होती जाएगी और आप जल्दी एक ही अपने आप एक अमीर इंसान के रूप देख पाएंगे |

अमीर बनने के लिए मंत्र उपाय तरीके


  • श्री कृष्ण मंत्र का जाप करे और बने अमीर धनवान, शास्त्रो मे श्री कृष्ण मंत्र के अद्भुत चमत्कार बताए गए है शास्त्रो मे श्री कृष्ण मंत्र के बारे मे कहा गया है कि इस मंत्र का जाप यदि कोई भिखारी जिसे 2 समय का खाना भी नसीब न होता है और वह इस मंत्र का जाप करे तो उसके लिए ऐसा अवसर अपने आप बन जाएगा जिससे वह गरीबी भरे जीवन से मुक्त हो सकता है |
मंत्र - “गोवल्लभाय स्वाहा”


अगर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति तंगी मे गुजर रही है और वह इस मंत्र का जाप कर रहा है तो उस व्यक्ति की आर्थिक समस्याए खत्म हो जाएगी और मान्यता के अनुसार इस मंत्र का जाप जैसे ही सवा लाख के पास पहुचता है जाप करने वाले व्यक्ति को चमत्कारी लाभ प्राप्त होता है |


  • अगर किसी व्यक्ति की करोड़पति बनने की इच्छा है तो वह व्यक्ति श्री कृष्ण ‘सप्तदशाक्षर महामंत्र’ का उच्चारण कर सकता है | इस मंत्र को करोड़पति बनाने का अचूक मंत्र माना जाता है | धन लाभ से लेकर धनवान बनाने मे यह मंत्र इतना शक्तिशाली माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने वाला व्यक्ति करोड़पति बन सकता है | इस मंत्र के जाप करने के बारे कहा जाता है कि कम से कम 5 लाख बार जाप करना होगा तभी फायदा होगा अन्यथा कोई फायदा नहीं होगा ऐसा शास्त्रो मे कहा गया है |
मंत्र - “ ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा“

  • शिव मंत्र का करे प्रतिदिन 1008 बार जाप और पाए कर्ज से मुक्ति | अगर किसी व्यक्ति पर ऋण अधिक हो गया है तो वह व्यक्ति नियमित शिव मंत्र का जाप कर सकता है | ऐसा करने वाले व्यक्ति को ऋण से मुक्ति मिल जाएगी | इस मंत्र का उच्चारण करने वाले व्यक्ति की राह मे आने वाली वह सभी बधाए दूर हो जाती हा जो धन प्राप्ति या धनवान बनने मे आ रही हो |
मंत्र “ॐ नम: शिवाय श्रीं प्रसादयति स्वाहा”
भाग्यवान और धनवान बनने हेतु 10 अचूक टोटके

भाग्यवान और धनवान बनने हेतु 10 अचूक टोटके

क्या आप भाग्यवान और धनवान बनने हेतु 10 अचूक टोटके जानना चाहते है ? एक धनवान व्यक्ति अपने को भाग्यवान समझता है लेकिन धनवान कैसे बने ? धनवान बनना चाहते है तो धनवान बनने के मंत्र उपाय तरीके अजमाए फिर देखे आप धनवान कैसे बन जाते है.

धनवान कौन होता है ?

एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास धन दौलत रुपया पैसा गाड़ी बँगला किसी चीज की कमी न हो उसे समाज में लोग धनवान समझते है और ऐसे ही व्यक्ति को धनवान कहा जाता है . हर इंसान ढेर सारे पैसे की चाह रखता है और पैसे को पाने के लिए जी तोड़ काम या मेहनत करता है लेकिन इतने मेहनत समय गुजरने के बाद भी सफलता की प्राप्ति नहीं हो मिलती तो आपको जानने चाहिये शास्त्रो मे क्या लिखा है धनवान कैसे बने के उपाय के बारे मे | यह उपाय आपकी सफलता के बीच आ रहे रुकावट को दूर कर सफकता पाने मे आपकी मदद करेगी लेकिन यह उपाय आपको सच्चे मन और आस्था से करना होगा | हम जो उपाय तरीके बता रहे है वह पुरानी मान्यताओ पर आधारित है



भाग्यवान और धनवान बनने हेतु 10 अचूक टोटके
  • धनवान बनने की सोच रहे है तो सबसे पहले धन बचाने की भी सोचे यह जरूरी है लेकिन कई बार धन बचाने की कोशिश करने के बाद भी धन नहीं बच पता मतलब कई आचनक से वाले खर्चे आपका बजट बिगाड़ देता है |

  • आज के युग मे लोगो का मानना है कि पैसे ही सब कुछ है इसलिए हर व्यक्ति धनवान बनना चाहता है | लेकिन ध्यान रहे अगर कोई व्यक्ति धनवान बनता है तो अपने कर्म और परिश्रम से ही बन पाता है साथ ही कहते है धन हमे साधन तो दे सकता है लेकिन खुशी नहीं |
  • साधन की चाह हर कोई रखता है इसका कारण वह व्यक्ति मेहनत नहीं करना चाहता तो आपको बता दे बिना किसी मेहनत के अपने कर्म और दिनचर्या मे को परिवर्तित कर आप या कोई भी धनवान बन सकता है लेकिन इसके लिए आपको मजबूत या दृढ़ बनना होगा |

भाग्यवान और धनवान बनने हेतु 10 अचूक टोटके

बड़े बुजर्गों का आदर करे और खुद पर विश्वास करे
आपके विचार बनाते है आपको अमीर तो सबसे पहले आप धन्यवाद बोलने या कहने की आदत डालनी होगी लेकिन बदले मे जरूरी नहीं है आपके सामने वाला व्यक्ति आपसे अच्छा व्यावहार करेया आपकी मदद करे | मतलब बुरे व्यक्ति के साथ भी आप अच्छा व्यवहार करे.

धनवान बनने की चाह है अगर तो सबसे पहले आप खुद को धनवान मानना शुरू करे क्योकि आप जो खुद को मानेगे वही आपको प्राप्त होगा साथ ही अपने घर को वास्तु नियमो के अनुसार बदले जैसे - पूजा के स्थान पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करे.

शंख को घर मे स्थापित करे या रखे -
आपको पता ही है समुन्द्र मंथन मे 14 रत्नो की प्राप्ति हुई थी उसमे से शंख भी है और यह लक्ष्मी जी के साथ पाया गया था और इस कारण शंख को लक्ष्मी भ्राता भी कहा जाता है साथ ही शंख का प्रयोग हर पूजा मे किया जाता है | शंख की ध्वनि पवित्र ध्वनि मानी जाती है और इसके रखने से घर मे सुख शांति का वास होता है.

माँ लक्ष्मी का प्रतीक पीली कौड़िया 
लक्ष्मी जो को धन प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है और इस वजह से हिन्दू धर्म मे उनसे जुड़ी हुई हर वस्तु का विशेष महत्व होता है | माँ लक्ष्मी का प्रतीक कौड़ियो का विशेष महत्व है इलसिए कौड़ियो को केसर के घोल मे भिगोकर अपनी तिजोरी मे रखे साथ ही नारियल की पूजा करे और उसे चमकीले कपड़े मे लपेटकर कौड़ियो के समपी रखे.

दूरभाग्य से बचे
अगर आपमें शारीरिक दोष, वास्तु दोष और कर्म दोष है तो आपको बता दे इन सबसे दुर्भाग्य का निर्माण होता है इसलिए शरीर के सभी छिद्रों को भली भाति साफ़ करे. घर के शौचालय और स्नान घर को भी साफ़ सुथरा बनाए साथ ही आपको अपने कर्मो को अच्छा बनाये और ऐसा कोई कर्म न करे जिससे आपको पछताना पड़े. घर में धुपबत्ती जलाए या फिर ऐसी अगरबत्ती का इस्तेमाल करे जिसमे लकड़ी की तिल्ली लगी हो .

पंछी को स्वतंत्र करे
अगर आपके पास कोई पंछी है जो पिंजरे में बंद है तो आप उन्हें आजाद करदे साथ ही अगर कोई व्यक्ति आपके सामने किसी पंछी को पिंजरे में ले जा रहा है तो उसे भी आजाद करवाने की कोशिश करे. यह करके आप देखे इस तरह से आपके कर्ज ख़त्म हो जाते है और अगर आपने किसी पक्षी को पिंजरे में रखा है तो आप आज या कल कर्जा में डूबने वाले है.

धनवान बनने के लिए उपाय धन का नुक्सान होने से बचे 

अगर आपका धन बेवजह नुकसान में चला जा रहा है या धन चोरी या गायब हो रहा है तो आप रोजाना सुबह उठकर नीम के लकड़ी का दातुन करे साथ ही रात में किचन में जूठे बर्तन न रखे उत्तर दिशा में बैठकर ही भोजन करें और भोजन की थाली में हाथ न धोएं.

एकादशी का व्रत रखें 
हिन्दू धर्म में एकादशी और प्रदोष का व्रत रखने के पीछे का विज्ञान यह कि यह आपके चंद्र और शनि के खराब असर को बेअसर कर शुभ में बदल देता है। प्रत्येक पक्ष (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) के ग्यारस और त्रयोदशी को विधिपूर्वक व्रत रखेंगे तो निश्‍चित ही आपके ‍जीवन से निर्धनता और सभी तरह के संकट दूर हो जाएंगे.

गणेश चतुर्थी क्यो मनाया जाता है ganesh chaturthi in hindi

गणेश चतुर्थी क्यो मनाया जाता है ganesh chaturthi in hindi

गणेश चतुर्थी हर साल मनाया जाता है और इस २०१९ का गणेश चतुर्थी २ सितम्बर को मनाया जाएगा लेकिन यह गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है ? ganesh chaturthi information in gujarati. यह हिन्दू संस्कृति के अनुसार १० दिन का पर्व है जिसे हिन्दू भाई बहुत ही धूम धाम से गणेश जी के जन्म दिन के तौर पर मनाते है ganesh chaturthi in hindi क्यों मनाया जाता है ? 

गणेश चौथ किस तारीख को है 2019

गणेश चौथ 2019 का २ सितम्बर को आने वाला है और इस दिन को हिन्दू भाई बहुत ही धूम धाम से मनाते है महाराष्ट्र और उसके आसपास के इलाको मे तो गणेश चतुर्थी के बाद 10 दिन तक लगातार गणोत्सव मनाया जाता है | जिसमे भक्तो द्वारा खुद के घरो मे भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित किया जाता है और भक्ति भाव से दस दिन तक भक्त पूरे मन से श्री गणेश पूजा की जाती है .


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गणोत्सव के समाप्त के समय यानि अनंत चतुर्दशी के दिन गणपती की प्रतिमा का भक्तो द्वारा विसर्जन किया जाता है | मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से सुख समृद्धि सम्पन्नता घरो मे आती है | खाश तौर पर कहा गया है की गणेश भगवान के लिए व्रत रखने पर भक्तो की सभी मनोकामनाए पूरी हो जाती है.

गणेश चतुर्थी व्रत कथा इन हिंदी

शिवपुराण की एक कथा काफी प्रचलित है कि एक बार माता पार्वती स्नान करने के लिए जा रही थी और उसी समय 1 बालक को अपनी मेल से प्रकट किया और उस बालक को पहरेदार के रूप मे घर के बाहर लगा दिया कर कहा मेरे आने से पहले किसी को भी घर मे प्रवेश की अनुमति न देना | थोड़े ही समय बाद शिवजी घर मे प्रवेश करने आ जाते है लेकिन उभे घर मे प्रवेश करने नहीं देता है बालक | जिस कारण से शिवगण से बालक का भयानक युद्ध होता है लेकिन बालक को इस युद्ध मे कोई भी हरा नहीं पाता अंतिम मे भगवान शिव जी क्रोधित हो जाते है और क्रोध मे आकर उस बालक का धड़ यानि की सर त्रिशुल से काट देते है | ऐसा होने से माता पार्वती भयानक क्रोधित हो जाती है और पूरे संसार का प्रलय करने की ठान लेती है |

ऐसा देखकर देवता भयभीत हो जाते है लेकिन देवर्षि नारद की सलाह पर देवता जगदंबा की साधना करके माता पार्वती को शांत करते है साथ ही शिव जी के निर्देश पर विष्णु जी उत्तर दिशा मे सबसे पहले मिले हाथी का सिर काटकर लाते है और हाथी के गज मष्तक को बालक के कटे सर की जगह लगाकर उसे फिर जीवित कर देते है.

गणेश जी की व्रत कथा इन हिंदी

बालक को जीवित देख कर माता पार्वती बहुत ही खुश होती है और गजमुख बालक को अपने हृदय से लगाकर देवताओ मे श्रेष्ठ होने का आशीर्वाद देती है. ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को देवताओं के अध्यक्ष के रूप में घोषित करके सबसे पहले पूजे जाने का वरदान दिया।
भगवान शंकर ने बालक से कहा कि हे गिरिजानन्दन! विघ्न-वधाओं को नाश करने में तुम्हारा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जाओ। हे गणेश्वर! तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के बाद व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए। तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है
12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र wikipedia hindi

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12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र wikipedia - भगवान शिव के 12 12 ज्योतिर्लिंग है लेकिन क्या आपको पता है 12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र wikipedia. अगर नहीं तो आज हम आपको 12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र इत्यादि की जानकारी दे रहे है ? सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। mp3, 

ज्योतिर्लिंग दर्शन क्या है ?

पुराणो मे कहा गया है की भगवान शिव की अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से आराधना करता है तो उस व्यक्ति की सारी मनोकामनाए पूरी हो जाती है | शिवलिंग पर जल चढ़ने से मात्र भगवान शिव प्र्शन्न होते है साथ ही उस व्यक्ति को भाग्यशाली माना जाता है जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाता है | शिवपुराण कथा मे 12 ज्योतिर्लिंग का जिक्र किया गया है |

12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र wikipedia

12 ज्योतिर्लिंग के फोटो नाम और स्थान मन्त्र wikipedia

  1. मल्लिकार्जुनम्, 
  2. वैद्यनाथम्, 
  3. केदारनाथम्, 
  4. सोमनाथम्, 
  5. भीमशंकरम्, 
  6. नागेश्वरम्, 
  7. विश्वेश्वरम्, 
  8. त्र्यंम्बकेश्वर, 
  9. रामेश्वर, 
  10. घृष्णेश्वरम्, 
  11. ममलेश्वर 
  12. महाकालेश्वरम है

यह थे 12 ज्योतिर्लिंग के नाम, कहा जाता है इन सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन सभी लोग नहीं कर सकते और जो कर पाते है वह किस्मत वाले होते है |

१ श्री सोमनाथ - यह शिवलिंग गुजरात के सौराष्ट्र में स्थापित है।
२ श्री शैल मल्लिकार्जुन - मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग।
३ श्री महाकाल - उज्जैन में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।
४ श्री ओंकारेश्वर ममलेश्वर - मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदान देने यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।


५ श्री नागेश्वर -गुजरात के दारूका वन के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।
६ श्री बैद्यनाथ - झारखंड के देवघर में बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।
६ श्री भीमशंकर - महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।
८ श्री त्र्यंम्बकेश्वर - नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।
९ श्री घुष्मेश्वर - महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घुष्मेश्वर ज्योतिर्लिंग।
१० श्री केदारनाथ - हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। उत्तराखंड में स्थित है
११ श्री विश्वनाथ - बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।
१२ श्री रामेश्वरम् ‌- त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।
इस्लाम मे फतवा क्या है का मतलब परिभाषा meaning in hindi

इस्लाम मे फतवा क्या है का मतलब परिभाषा meaning in hindi

फतवा meaning in hindi - फतवा का मतलब आपके लिए जानना इसलिए जरूरी हो जाता है क्योकि ऐसी बहुत सी गलत बाते है जो फतवा के बारे मे बताई जाती है लेकिन असल मे फतवा का मतलब क्या होता है बहुत से लोग नहीं जानते है तो आज फतवा का अर्थ in hindi मे जानिए | क्लिक से पढे इस्लाम क्या है

फतवा का अर्थ - ऐसे बहुत से मुस्लिम भी जो फतवा क्या है नहीं जानते है साथ ही नान मुस्लिम भाईयो मे फतवा का अलग अलग मतलब निकाला जाता है तो ऐसे लोग आज पढे फतवा के बारे मे |



fatwa  meaning in hindi

इस्लाम मे फतवा क्या है ?


फतवा एक अरबी शब्द है फतवा का असली मतलब इस्लाम के तौर तरीके पर चलना है | इस्लाम मे कुरान और हदीस मे जो कहा है उसी के हिसाब से मुस्लिम या इस्लाम धर्म के मानने वाले पालन करते है | लेकिन अगर कोई इस्लाम को नहीं जानता है तो कुरान या हदीस को जानने वाले कुरान या हदीस मे जो लिखा है उसके हिसाब से सही रास्ता दिखाते है जिसे फतवा नाम दिया जाता है |



जैसे - इस्लाम मे शराब पीना हराम है अब अगर आप किसी मुफ़्ती या इस्लाम जानकार के पास जाकर आप पुछेगे कि इस्लाम मे शराब पी सकते है | तो मुफ़्ती साहब का जवाब होगा "नहीं यह इस्लाम मे हराम है" अब मुफ़्ती साहब ने इस्लामए एंव हदीस का हवाला देकर बताया की इस्लाम मे शराब हराम है जिसे फतवा कहा जाता है |


मुस्लिम धर्म गुरु किसी के पास जाकर फतवा जारी नहीं करते एंव न ही आदेश देते है लेकिन अगर कोई शख्स मुफ़्ती साहब से जाकर पुंछता है तो वह इस्लाम एंव शरीयत के हिसाब से जानकारी देते है जो इस्लाम मे मौजूद है |

इस्लाम मे फतवा कौन जारी कर सकता है ?

बहुत से लोग सोचते होंगे फतवा कोई भी दे सकता है लेकिन ऐसा नहीं है फतवा केवल मुफ़्ती ही दे सकता है क्योकि मुफ़्ती को सरिया कानून, हदीस एंव कुरान की गहराई से गहन किया हुआ होता है |
नॉन मुस्लिम देशो मे फतवा का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है लेकिक मुस्लिम देशो मे फतवा बहुत मायने रखता है क्योकि ऐसे देशो मे फतवा लोगो के जीवन पर असर डालता है | क्योकि इस्लामिक देशो मे फतवा कानूनन भी लागू हो जाता है |