बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning जाने | bismillah hir rahman nir raheem meaning

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning जाने | bismillah hir rahman nir raheem meaning

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम meaning - सबसे पहले तो आपको बता दे बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम को सही ढंग से लिखे तो - बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम लिखा जाता है. बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम का इस्लाम धर्म में बहुत महत्त्व है क्योकि कोई भी मुसलमान अपने दिन की शुरुवात बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम से ही करता है लेकिन ऐसे बहुत से भाई लोग है जो जानना चाहते है कि बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम का क्या मतलब होता है तो ऐसे में आज हम आपको इसका मतलब यहाँ बताने जा रहे है.

 bismillah hir rahman nir raheem meaning
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बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम Meaning in Hindi

कोई भी काम शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह कहने का मतलब होता है कि मैं ये काम अल्लाह के नाम पर शुरू कर रहा हूँ. या इस काम में मैं अल्लाह कि मदद चाहता हूँ। अल्लाह बहुत दयावान है और अपनी दया हम तक पहुंचाता है।

इस्लाम धर्म में बिस्मिल्लाह का मतलब -
बिस्मिल्लाह में तीन शब्द है बिस्मिल्लाह. अर-रहमान, अर-रहीम जिसका अर्थ होता है -
बिस्मिल्लाह - शुरू करता हु
अर रहमान - अल्लाह दयालु है
रहीम - अल्लाह के 99 नामो में से एक नाम

बिस्मिल्लाह के फायदे hindi में

  • इस्लाम धर्म की सबसे बड़ी पुस्तक कुरान शरीफ है और इस पुस्तक को जब खोलते है तो सबसे पहला वर्ड या लफ्ज. जो आता है वह है बिस्मिल्लाह, जब इतनी बड़ी किताब बिस्मिल्लाह से शुरू हो रहा हो तो हमें भी अपने जीवन के सभी काम बिस्मिल्लाह से ही शुरू करना चाहिए .
  • कोई भी काम अगर बिना बिस्मिल्लाह पढ़े शुरू किया जाए तो वह काम पूरा नहीं होगा - एक हदीश के मुताबिक़ पैगंबर (SAW) ने कहा, “कोई भी अहम् काम जो बिस्मिल्लाह से शुरू नहीं होता है वह ना मुकम्मल है”।
  • खूबसूरत मआनी के साथ अल्लाह के 99 नाम हैं। और उन 99 नामों में से 3 नाम बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम में हैं । 1. अल्लाह 2. रहमान 3. रहीम जब कोई बिस्मिल्लाह पढता है तो वो अल्लाह के इन तीन नामों से पुकारता है
  • बिस्मिल्लाह अगर कोई शख्स पढता है तो शैतान उस शख्स से दूर भागता है साथ ही शैतान उसे बहकाने में ना कामयाबी हासिल करता है.
  • जब भी हमारी त्वचा ( खाल ) फट जाती है और उसमें से खून बहता है, तो कई बार बिस्मिल्लाह कहो और उस पर फूंको । बिस्मिल्लाह से इंशा अल्लाह जादुई फायदा मिलेगा ।
  • कुछ लोग मानते है 786 का मतलब बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम होता है लेकिन सच क्या है जाने क्लिक से.
786 कैसे बना | 786 kaise Bana in urdu

786 कैसे बना | 786 kaise Bana in urdu

786 आज के समय में 786 को लेकर कई सारे सवाल खड़े है जैसे - 786 कैसे बना, 786 का मतलब हरे कृष्णा, इससे पहले हमने आपको बताया था 786 की उत्पत्ति कैसे हुई ? आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे की 786 कैसे बना तो इसके पीछे की एक कहानी आपको सूना देते है इससे आपको समझ में आ जाएगा 786 का इस्लाम में क्या महत्व है और कैसे बना ?



786 kaise Bana in urdu

786 कैसे बना ?

786 कैसे बना इसको जानने के लिए आपको इतिहास के पन्नो को उलटना होगा - जब जहालत का समय अरब में हुआ करता था, उस समय वहा का एक नम्बर का खेल हुआ करता था, इस खेल को अब्जद के नाम से जाना जाता था.

इसे समझने के लिए देखे -
आलिफ = 1
बे = 2

इस तरह से गिनतियो को मिलाकर अरब के लोग फाल खोलते थे, अब यह फाल क्या है सबसे पहले आपको यह समझना होगा.

मान लीजिए आपका नाम फैज है - तो फैज में  = फ, ये, जवाद = value of numbering = total number.

मतलब नाम के एक शब्द के अंक और बाकी शब्दों के अंक को एक साथ करने के बाद उन सब को जोड़ कर एक वैल्यू निकाल लेना फिर चित्तियों पर लिखकर मोड़ देना फिर जिसके नाम का चीत्तीया बनाया गया है उनसे कहाँ जाता था, लिखो कोई एक नम्बर, अगर तुम्हारे द्वारा लिखा नम्बर और चित्तियो का नम्बर match हो जाता है तो तुम जैसा चाहते हो वैसा ही तुम्हारा काम हो जाएगा.

तो इसे पुरे खेल को ही फाल खोलना कहा जाता है - यह एक तरह का जहालत ही था जिसे शरियत ने हराम करार दिया है. 

आज के समय लोगो ने अब्जद के ऐतबार से यह मतलब निकाल लिया, 786 का मतलब -  बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम होता है. अब बात साफ़ हो गयी की 786 का मतलब केवल बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम नहीं होता है क्योकि बहुत से और मजहब में भी 786 को बहुत ही ज्यादा फायदे वाला नम्बर माना जाता है साथ ही आज के कुछ गैरमुस्लिम 786 को ॐ से भी तुलना करते है तो हम तो यही आपसे कहेंगे गुमराही के रास्ते से बाहर निकले.

786 kaise Bana in urdu

इस्लाम में 786 का इस्तेमाल करना कैसा है ? तो आपको बता दे इस्लाम में शोर्टकट करने का तरीका बिद्दत कहाँ जाता है और शरियत में कुछ नया अकीदा इजाद करना, इसका मतलब आप अच्छे से जानते है.

786 ki utpatti kaise hui


अगर 786 का मतलब बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम हो सकता है तो कितना आसान हो जाता की हम सभी सुरह और दुआ नमाज में नम्बर से पढ़ते जैसे -

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम = 786
सुरह फातिहा = 1000
सुरह बकरा = 2000

इस तरह से हम पूरी कुरआन शरीफ को आसानी से पढ़ लेते और कितना आसान तरिका होता है लेकिन अफ़सोस यह बिद्द्त है जो जहन्नुम की तरफ हमें और आपको ले जाता है.
शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟ | Shemr ki maut kaise hui - शिमर इब्न जिल्जुशन या शिमर (अरबी: شمر بن ذي الجوشن الضبابي الهوازني) बानू किलाब जनजाति से जिल्जुशन का पुत्र था, जो अरब के हौजिनिनी क़सीद जनजातियों में से एक था। हज़रत अब्बास इब्न अली की मां उम्म उल-बानिन भी बनू किलाब जनजाति से थीं। इस्लाम में शिमर की एक अत्यचारी प्रतिष्ठा है। वह याजीद प्रथम के प्रति निष्ठा का भुगतान करने और इब्न ज़ियाद की उमाय्याद सेना में शामिल होने से पहले खारीज नेता था। वह उस व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जिसने कर्बला की लड़ाई में इस्लामी पैगंबर हज़रत मुहम्मद सहाब के नवासे हज़रत हुसैन इब्न अली की हत्या कर दी थी।

शिमर की मौत कैसे हुई | شمر کیسے مر گیا؟

शिमर को अंततः हज़रत अल-मुख्तार ताकाफी के सैनिकों ने मार डाला था, जिन्होंने हज़रत हुसैन और उनके परिवार के हत्यारों पर बदला लेने की कामना की थी। शिमर शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिया थे और जंगली कुत्तों द्वारा नुचबाया गया था।



Shemr ki maut kaise hui

कर्बला का वाक्या, शिमर की मौत 

शिमर, यह वही मलून है जिसके बारे में हजुर पाक ने फ़रमाया था - एक काला सफ़ेद कुत्ता, मेरी ओलाद का खून पिएगा, 9 मुहर्रम 61 हिजरी को शिमर अपने 4 हजार फ़ौज लेकर कर्बला पंहुचा.

कर्बला का वाक्या सुने - एक रियायत के मुताबिक़ शिमर ही हजरत इमाम हुसैन रजी अल्लाह ताला अंहो को शहीद करता है और अपने घोड़े हुसैन इब्ने अली के मुबारक जिस्म पर दौड़ा देता है फिर इनके सीने पर बैठकर, इनका मुक़द्दस सिर काट देता है. अल्लाह की लानत हो इस पर.

शिमर को ब्रश की बिमारी थी इसकी वजह से उमके मुह पर काले और सफ़ेद निशान थे, कर्बला के वाक्ये के बाद शिमर कुफा चला जाता हैं.

66 हिजरी में शिमर मुख़्तार के खिलाफ जंग में हिस्सा लेता है लेकिन शिमर की हार होती है फिर वह वहा से भाग जाता है. मुख्तार के साथी शिमर का पीछा करते हुए और उस तक पहुच जाते है और शिमर का क़त्ल करके उसका सर काटकर ले आते है और इसके जिस्म को कुत्ते के आगे फेक देते है.

अहले बेत का सर काटने वाला यह मलून इस तरह से अपने अंजाम तक पहुच जाता है , अल्लाह हमारे दिलो को अहले बैत के मोहब्बत से भर दे - आमीन 

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ? - जब जमीन पर यजीद मरदूद मर रहा था, यजीद की मौत का भी वक्त आ चुका था, तीन साल आठ महीने गुजर चुके थे, यजीद की मौत कैसे हुई ? इसकी दो वजहे बताई जाती है, पहला की यजीद शराब पीता था और शराब के नशे में इतना धुत रहता था की फेफड़ा ख़राब हो था, इस वजह से पुलंज की बिमारी हो गयी थी, जिस कारण यजीद तड़प तड़प कर मरा. यजीद की मौत का सिलसिला पुरे ३ दिन का था. यजीद और इसाई लड़की का वाक्या ?

यजीद को किसने मारा | Yazeed Ko kisne Mara ?

दूसरा कारण - यजीद जालिम शिकार पर जाने का बहुत शौक़ीन था, एक बार यजीद शिकार खेलने जंगल में गया, पहाडियों के बीच से जा रहा था की यजीद की नजर एक इसाई लड़की पर पड़ गयी, वह इसाई लड़की बहुत खुबसूरत लड़की थी, इसलिए यजीद उस लड़की का आशिक हो गया, इस तरह से यजीद उस लड़की को ढूंढने दुसरे दिन जंगल गया, तीसरे दिन भी गया, इस तरह से यजीद उस लड़की का मक़ाम किसी तरह से हाशिल कर लिया और उस लड़की से बताया - " मैं अमीरे शाम हूँ " इस वख्त मेरी ही हुकूमत ही चल रही, इसाई लड़की ने सूना था जो इस वख्त अपनी इमारत का दावा कर रहा है वह हुसैने इब्ने अली का खून करवा दिया है.

Yazeed Ko kisne Mara


लड़की समझ गयी और उसने यजीद से कहाँ ठीक, तुम ही हो जिसे अमीरे शाम कहा जाता है, हाँ, तुम्हारा नाम ही यजीद इब्ने मविदा है यजीद ने कहाँ हाँ, लड़की ने कहाँ अच्छा ठीक है, तुम अपने हरम में अपने महल में मुझे ले चलना चाहते हो तो मैं चलने के लिए तैयार हूँ लेकिन एक शर्त है -

कल आओ तुम, फिर उसके बाद मैं तुम्हारे साथ चलने की तैयारी कर लेती हूँ फिर यजीद दुसरे दिन अपने 8 सवारों को लेकर गया शिकार के लिए, और सारे लोगो को पीछे कर दिया और लड़की के मकान के नजदीक गया तो मकान के अन्दर से लड़की निकली, लेकिन लड़की ने खंजर छुपा लिया था बगल में और यजीद के घोड़े के पीछे बैठ गयी.

जब यजीद बात करते हुए आगे बढ़ा तो इसाई लड़की ने बहुत ही फुर्ती से खंजर को निकाला और निकालने के बाद पीछे से खंजर यजीद को मारा पुस्त में, खंजर का लगना था कि वह अचानक से वह जमीन पर गिरा, फिर लड़की ने फुर्ती से लड़की ने खंजर मारा और यजीद संभल न सका, इस तरह से इसाई लड़की ने यजीद को कई बार खंजर से वार किया और उसे वही काट करके रख दिया.

अब लड़की वहां से निकल आयी लेकिन यजीद का कटा फटा जिस्म वही पड़ा था, काफी समय के बाद जब तलाशते हुए यजीद के सिपाही गए तो देखा यजीद का कटा फटा जिस्म पड़ा है. तो सिपाही उसके जिस्म को उठाकर महल ले आए . तो इस तरह से यजीद की मौत हुई और यजीद को एक इसाई लड़की ने मारा.

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

yazeed ki maut kaise hui - इंसानियत के दुश्मन और इमाम हुसैन का कातिल yazeed ki maut ka waqia आज हम आपको सुनाने जा रहे है - ऐसे बहुत से इस्लामिक भाई है जो यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui, यजीद की मौत का वाक्या सुनना चाहते है तो आज हम आपको यजीद की मौत की कहानी पुरे विस्तार से सूना रहे है. yazeed ki maut kaise hui यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut ka waqia यजीद कैसे मरा था yajid kaise mara yajid ki maut kaise hua kabr kaha hai

मक्का मदीना में हिन्दू क्यों नहीं जा सकते ?
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यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut kaise hui

आपको बता दे कर्बला की जो जंग हुई थी यह यजीद और इमाम हुसैन के दरमयान नहीं थी बल्कि यह हुसैनियत और यजीदियत के दरम्यान की लड़ाई थी क्योकि अगर दो लोगो के बीच की लड़ाई होती तो यजीद जीत गया था यह सभी को पता है इमाम हुसैन शहीद हो गए थे और यजिद तख्तेताज पर काबिज हो गया था. 

मगर यह लड़ाई नजिरियत की थी इसलिए यजीदियत हार गई और हुसैनियत आज भी जिन्दा है साथ ही इस लड़ाई के साथ यजीदियत का जनाजा निकल गया . वह तख्तोताज जिसके लिए यजीद ने इतना कुछ किया था. उस तख़्त पर उसके अपने बेटे ने ही थूका.

तुम जितना तरासोगे, उतना ही खरा होगा,
यह इस्लाम का पौधा है जितना काटोगे उतना ही हरा होगा

yazeed ki maut kaise hui

यज़ीद की मौत कैसे हुई | yazeed ki maut ka waqia

यजिद को एक भयानक बिमारी हो गयी जिस कारण यजीद बिमारी का गिरफ्तार हो गया, यजिद की बिमारी का यह हाल था की कौलेंज की बिमारी के कारण यह हाल था कि उसकी आंते जलने लगी थी. वहां के हाकिम परेशान होकर कहने लगे " यह कैसी बत्तरिन बिमारी " है की इसमें पेत अन्दर से जल रहा था ?

इस बिमारी के कारण यजीद को इतनी प्यास लगती थी कि वह पानी के लिए तरसता था लेकिन जब यजिद पानी पीता था तो वही पानी यजिद के पेट को जलाता था.

इस कारण यजिद अपना सर पिटता रहता था और उसके महल के लोग यजीद को देखकर यह कहते थे कि यह अजाब हुसैन इब्न अली को प्यासा रखने के बदौलत है.

यजीद वकत का बादशाह होने के बाद भी, पानी की एक एक बूंद के लिए तरसता था, जब यजीद अपनी बिमारी की इन्तहा को पहुच गया तो अपने बेटे को बुलाकर कहा कि बेटा, मेरा अब कुछ भरोसा नहीं, मुझे मौत कभी भी आ सकती है.

इसलिए अब तू मेरे तख़्त को संभाल यानी अब तू मेरे तख़्त पर बैठ जा लेकिन यजिद का बेटा मुआविया तख़्त पर बैठने के लिए राजी नहीं हुआ. और यजीद से कहने लगा - कि जैसे जमाना आप पर लानत कर रहा है वैसे ही मुझ पर भी लानत करे, नहीं, हरगिज नहीं, मैं इस तख़्त पर नहीं बैठूँगा.

यह तख़्त नवासे रसूल के खून से आलूदा है, इसलिए मैं इस तख़्त पर लानत करता हूँ, इसके बाद यजीद की बिमारी और भी बढ़ गयी और अरब के हर किस्म के नशे, यजिद के सामने पेश किया जाने लगा ताकि यजीद को बिमारी का दर्द महसूस न हो, और वह हर वक्त नशे में रहे, और वह प्यास के लिए तड़पे न.

इसी नशे की हालत मन यजीद अपने सिपाहिओ से कहने लगा, मेरा वह बन्दर कहाँ है जो हमेशा मेरे साथ रहता है, तो फिर सिपाहिओ ने कहाँ की शायद वह जंगल की तरफ गया होगा.

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यजीद अपने सिपाहियों के साथ घोड़े पर बैठकर जैसे ही बाहर गया तो घोड़े ने नवासे रसूल के कातिल को अपने पीठ से गिरा दिया और यजीद का पाँव घोड़े के रकाब में फंस गया, वह घोडा दौड़ता रहा और यजीद जमीन पर गिरते हुए उसका सिर एक पत्थर से जा टकराया, मगर वह घोडा न रुका.

यहाँ तक कि यजीद का पूरा जिस्म खून से लतपथ हो गया, यजीद की फ़ौज ने, जब यजीद की लाश को देखा तो वह कहने लगे, हुसैन इब्ने अली के खून की यही सजा है.

यजिद इस तरह बहुत ही जिल्लत की मौत मरा जबकि कर्बला में इमाम हुसैन का रोजा चमकता हुआ वहां पर आज भी मौजूद है और वहां पर लोगो का ताता लगा रहता है, मगर यजीद की कब्र कहाँ है ?

तो आपको बता दे यजीद की कब्र मजुले दमस्क में है, यह जगह दम्शक में है, जहाँ लोग कूड़ा फेकते है और इस कूड़े के नीचे कही यजीद की कब्र है, मगर निशान भी नहीं कहाँ है, लेकिन इतना पता है की इस कूड़े के नीचे ही कही यजीद की कब्र है.

न यजीद का वो सितम्ब रहा
न ज्याद की रही वह जफा 
रहा तो नामे हुसैन 
जिसे ज़िंदा रखती है कर्बला