नार्को टेस्ट क्या है  narco test price cost मतलब समझे

नार्को टेस्ट क्या है narco test price cost मतलब समझे

नार्को टेस्ट क्या है  narco test price cost machine मतलब समझे- नार्को टेस्ट क्या होता है का मतलब price समझिए, नार्को इसका प्रयोग किसी व्यक्ति के मन से सच निकलवाने के लिए किया जाता है | नार्को टेस्ट price, नार्को परीक्षण के अलावा सच उगलवाने के लिए पॉलीग्राफ, लाईडिटेक्टर टेस्ट और ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी किया जाता है। यह परीक्षण अधिकतर आपराधिक केस मे किए जाते है | आपको बता दे इस narco टेस्ट से 1 % से भी कम चांस रहता है की नार्को टेस्ट मे व्यक्ति झूठ बोल सकता है | नार्को टेस्ट के लिए व्यक्ति को ट्रुथ सीरम इंजेक्शन दिया जाता है |
नार्को टेस्ट क्या है

What is full from NARCO
  • NARCO - Narcotics Commission . 
  • NARCO - Normal Adventuresome Reliable Comforting Opinionated . 
  • NARCO - National Rear Commodore . 
  • NARCO - North American Railcar Operators Association

नार्को टेस्ट क्या है किस पर किया जाता है ?

नार्को टेस्ट अधिकतर अपराधी के मन से सच निकालने के लिए किया जाता है इसके लिए आपराधिक व्यक्ति को इथेनाल, सोडियम पेंटोथाल, बार्बिचरेटस, टेपाजमेन इत्यादि रासयानिक ड्रग्स के इंजेक्शन दिए जाए है | इस दिए गए इंजेक्शन को ट्रुथ इंजेक्शन के नाम से भी जाना जाता है |

नार्को टेस्ट कैसे किया जाता है हिन्दी मे 2019

नार्को टेस्ट करने के लिए व्यक्ति को पहले 1/2 बेहोश किया जाता है जिससे इंसान सेमी कान्सीयस स्थिति मे पहुच जाता है | मतलब इंसान न तो पूरी तरह बेहोश होता है और न ही पूरी तरह होश मे रहता है | ऐसे कंडीशन मे इंसान चाह कर भी झूठ नहीं बोल सकता | ऐसा इसलिए क्योकि इंसान को झूठ बोलने के लिए कल्पनाओ का सहारा लेना पड़ता है मतलब इंसान को झूठ कहने के लिए बातो को तोड़ मरोड़ झूठ और सच जोड़ कर बात बनानी पड़ती है | लेकिन जो घटनाए आपके या हमारे साथ हो चुकी होती है जैस - कुछ आपने देखा या महसूस किया वह दिमाग मे सेट रहता है | तो इसलिए व्यक्ति हाफ बेहोसी मे सच बोलता है |

नार्को टेस्ट की प्रक्रिया जानिए हिन्दी मे ?

नार्को टेस्ट सभी पर तो नहीं किया जाता है लेकिन जिस पर भी यह किया जाता है पहले उसकी उम्र और हेल्थ का चेकअप किया जाता है एंव मुजरिम पर कौन सा रसायन प्रयोग किया जाना है डिसाइड किया जाता है | क्योकि अगर गलत रसायन दे दिया जाए तो इंसान की मौत हो सकती है या फिर दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है | इसलिए उम्र एंव स्वास्थ को देखकर इंजेक्शन दिया जाता है |  यह सब करने से पहले 2 मशीनों से कनेंट किया जाता है |
  • पालीग्राफ मशीन
  • ब्रेन मेपिंग टेस्ट
पालीग्राफ मशीन - पालिग्राफ मशीन नार्को टेस्ट किए जाने ब्यक्ति का रक्तचाप, नब्ज, साँसो एंव हृदय की गति और बॉडी मे होने वाली गति को रिकार्ड एंव दर्शाता है | यह सब होने के बाद अपराधीक व्यक्ति से कुछ साधारण से सवाल जैसे - नाम, माता - पिता का नाम, एड्रेस, उम्र, आप क्या करते है इत्यादि | इस तरह पुंछताछ आगे बढ़ती जाती है और धीरे धीरे अपराधी से वह सवाल पुछ लिया जाता है जो जानने के लिए नार्को किया गया था | इस तरह नार्को के जरिये सच का पता लगाया जाता है |

ब्रेन मेपिंग टेस्ट - इसका आविष्कार अमेरिका मे हुआ था जिसके आविष्कारक न्यूरोलाजिस्ट डॉ. लॉरेंस ए फारवेल ने 1962 मे किया था | यह परीक्षणकई जगहो पर किया जाता है | यह टेस्ट करने के लिए मुजरिम के सिर मे हेलमेट पहनाया जाता है जो कम्प्युटर से जुड़ा हुआ होता है साथ ही इनमे सेंसर लगा हुआ होता है | इन सेंसर का काम इंसान की दिमागी गतिविधियो को रिकार्ड करना होता है | यह गतिविधि P300 wev के जरिये डिस्प्ले पर शो होता है | 
ब्रेन मेपिंग के दौरान मुजरिम को तरह तरह के साउंड सुनाई देते है साथ ही एक स्क्रीन पर वीडियो और फोटो भी दिखाई पड़ते है यह वीडियो अपराध से जुड़ा हुआ होता है | जब मुजरिम आवाज के सिनल को पहचानता है तो स्क्रीन पर P300 तरंगे शो होने लगती है | इस तरह गुनाहगार से सच उगलावा लिया जाता है | अगर मुजरिम गुनाहगार नहीं है तो वह आवाज को नहीं पहचान नहीं पाता है और p300 तरंगे नहीं शो होती है |
पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है इन इंडिया polygraph test meaning in hindi

पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है इन इंडिया polygraph test meaning in hindi

पॉलीग्राफ टेस्ट इन इंडिया Polygraph Test- पॉलीग्राफ टेस्ट मशीन जिसे झूठ पकड़ने वाली मशीन या लाई डीडेक्टर के नाम से भी जाना जाता है | पॉलीग्राफ टेस्ट एक प्रकार का सत्य परीक्षण होता है जिसका प्रयोग आपराधिक मामलो मे अपराधी से सच उगलवाने के लिए किया जाता है | पॉलीग्राफ मशीन के खोजकर्ता जॉन अगस्तस लार्सन (John Augustus Larson) है और इसकी खोज सन 1921 मे की थी | जॉन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से मेडिकल की पढ़ाई की थी और वे कैलिफोर्निया के बर्कले पुलिस स्टेशन में कार्यरत थे |

क्या आपको जानते है पॉलीग्राफ मशीन कैस काम करता है अगर नहीं तो आप यहा आज जान पाएंगे पॉलीग्राफ मशीन परीक्षण कैसे किया जाता है और क्या इससे क्या सच मे सच्चाई बाहर निकलवा सकते है या नहीं |

polygraph test kaise hota hai


पॉलीग्राफ परीक्षण क्या होता है ???

पालिग्राफ एक मशीन है इस मशीन से किसी व्यक्ति को सेंसर के द्वारा जोड़ दिया जाता है यह सेंसर कम्प्युटर से कनेकट किया हुआ होता है | फिर व्यक्ति के रक्तचाप, नब्ज, साँसो एंव हृदय की गति और बॉडी मे होने वाली गति को एक पेपर [ ग्राफ ] पर रिकार्ड किया जाता है | इस प्रोसेस को पॉलीग्राफ कहते है | इस परीक्षण मे व्यक्ति से पूरे 6 सेंसर कनेक्ट किए जाते है |
पॉलीग्राफ मशीन में इन 4 बातों को रिकॉर्ड किया जाता है- 
  • व्यक्ति के सांस लेनो की गति (ब्रीदिंग रेट) 
  • व्यक्ति का पल्स 
  • व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 
  • व्यक्ति के शरीर से निकल रहा पसीना में कार्यरत थे |
  • कभी कभी पॉलीग्राफ मशीन व्यक्ति के हाथ और पैरों की मूवमेंट को भी रिकॉर्ड करती है |

पॉलीग्राफ टेस्ट करने की प्रक्रिया

पॉलीग्राफ टेस्ट करने के लिए व्यक्ति को पहले पॉलीग्राफ टेस्ट मशीन से जोड़ा जाता है फिर व्यक्ति को सामन्य बनाए रखने के लिए पहले कुछ आसान से सवाल किए जाते है जैसे - आपका नाम, आपके माता पिता के नाम, घर का पता, आपकी सही उम्र इत्यादि फिर जिस कारण से लाई डीडेक्टर टेस्ट किया जा रहा है उस मुद्दे पर आ जाते है और सच बुलवाया जाता है | सवाल-जवाब की इस पूरी प्रक्रिया में व्यक्ति से आ रहे तरंगों (सिग्नल) को मशीन मूविंग पेपर पर रिकॉर्ड करती है |
  • सवाल-जवाब की प्रकृया पूरी होने होने से पहले और बाद में पॉलीग्राफ एग्जामिनर ग्राफ की जांच करता है और देखता है कि किन सवालों में व्यक्ति से आई तरंगें (सिग्नल) बदले हैं। इसमें व्यक्ति के ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और ब्रीदिंग रेट में ज्यादा उतार-चढ़ाव से पता चलता है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है। 
  • पॉलीग्राफ की जांच वेल ट्रेंड एग्जामिनर से कराई जाए तो सही-सही सच और झूठ का पता चलता है। ऐसा ना होने पर एक्यूरेसी में फर्क आ सकता है |
नोट- इस टेस्ट का रिजल्ट पूरी तरह से पॉलीग्राफ मशीन पर निर्भर करता है। इसलिए इस टेस्ट को पूरी तरह से सच नहीं माना जा सकता। इसमें धोखा देना आसान है |



क्या पॉलीग्राफ टेस्ट को धोखा दिया जा सकता है ??
अगर किसी को मालूम है कि उसका टेस्ट किया जाना है और वह खुद को टेस्ट के लिए तैयार करे तो लाई डीडेक्टर टेस्ट को धोखा दे सकता है मतलब झूठ बोल सकता है |
  • टेस्ट से पहले  व्यक्ति ही खुद को तैयार करे धोखा दे सकता है 
  • पॉलीग्राफ मशीन के बारे मे जानकारी लेकर |
  • जिस टापिक पर टेस्ट लिया जाना है उसे पहले से ही झूठ जोड़कर तैयार कर लेना मतलब इस तरह से टेस्ट को धोखा दिया जा सकता है |
  • इस तरह अगर कोई व्यक्ति खुद को तैयार कर लेता है तो उसका कान्फ़िडेंस बढ़ जाता है जिससे उसे घबराहट नहीं होती और फिर ऐसे व्यक्ति के झूठ को पकड़ना मुश्किल हो जाता है