दोबारा से परीक्षा देने का दर्द 10th result kab ayega drd

दोबारा से परीक्षा देने का दर्द 10th result kab ayega drd

10th & 12th exam - दोबारा परीक्षा देने का दर्द चाहे बड़े हो या छोटे परीक्षा से सब को डर लगता हैं। परीक्षा आते ही बड़ो-बड़ो के होश उड़ जाते है। ऐसे में अगर यह पता चले कि आप परीक्षा दे आए हो और तुम्हारा पेपर भी अच्छा हुआ है, मगर तुम्हें दोबारा पेपर देना पड़ेगा। कारण यह है कि कुछ लोगों ने पेपर लीक करवा दिया था। जिस कारण अब पेपर दोबारा होगा। सोचिए कितना बुरा लगता है, 

ऐसा ही इस बार होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में हुआ है। जिसमें कक्षा 10वीं और 12वीं की गणित व इकनोमिकस की परीक्षा दोबारा होगी, कारण वही कि पेपर लीक हो गया। 


जरा सोचिए उन लाखों बच्चों पर क्या बीतेगी जो परीक्षा दे चुके थे और कई बच्चे तो घूमने-फिरने का प्रोग्राम भी बना चुके थे। इनमें से कुछ बच्चे ऐसे भी जिन्होंने कई Entrance paper भी देने होंगे, अब वह बच्चे Entrance की तैयारी करेंगे या इकनोमिकस के दोबारा पेपर की ? 

exam dubara

सरकार व सी बी एस सी(CBSE) ने मिलकर 12वीं कक्षा के इकनोमिकस की परीक्षा की तारीख तय कर दी है जो की 25 April है। परंतु 10वीं की गणित की परीक्षा शायद रद्द कर दी है (फिर भी News Update देखते रहें) पर मेरा यह मानना है कि यह दोबारा परीक्षा लेना उन लोगों के लिए सजा नहीं है बल्कि छात्रों के लिए सजा है। 


जिन्हें इस विषय के लिए फिर समय निकालना पड़ेगा, लाखों की संख्या में छात्र दोबारा यह परीक्षा देंगे। क्योंकि इकनोमिकस विषय आर्टस में भी है और कोमृस में भी है। कितना पेपर बेकार जाएगा, वैसे ही हम पर्यावरण संबधित समस्याओं का सामना कर रहें हैं। 


इसके विरोध में कई छात्र प्रदर्शन कर रहे है, कई अभिभावक अदालत में अपील कर रहें है कि दोबारा पेपर लेना रद्द हो जाए। क्योंकि इससे बच्चों को बड़ी परेशानी हो रही है। अंत में, मेरा सरकार व CBSE से, सभी छात्रों व अभिभावकों की तरफ से निवेदन है, अनुरोध है कि 12वीं कक्षा की परीक्षा भी न लेने पर विचार करें, और हो सके तो दोबारा परीक्षा न लें। क्योंकि इससे इन बच्चों को सजा मिल रही हैं। साथ ही उन दोषियों
परीक्षा परिणाम देख माँ बाप ऐसा बच्चो के साथ न करे

परीक्षा परिणाम देख माँ बाप ऐसा बच्चो के साथ न करे

परिणाम मैंने अपने पहले लेख में कहा था कि मार्च का महिना दो चीज़ो के लिए जाना जाता है एक होली का त्यौहार और दूसरा फाइनल पेपर. होली तो चली गई और सबने अच्छे से मना भी ली. रहे फाइनल पेपर, वो भी शुरू हो गये हैं १०वीं और १२वीं के बच्चों को छोड़कर सभी बच्चों का नया सत्र १ अप्रैल से शुरू हो जाएगा. सबको मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएँ, सबके अच्छे अंक आए. अब आते है मुद्दे की बात पर. सब बच्चे अपने हिसाब से पेपर देकर आऐ होंगे. सबने मेहनत भी की होगी. कई ऐसे बच्चे होते है जो शुरू से मेहनत करते हैं जो कि संख्या ज़रा कम होते है असल में उन बच्चों की संख्या बहुत अधिक होती है जो सिर्फ समय आने पर ही पढ़ते हैं. मेरा उन सब बच्चों से निवेदन है कि जब वे सब कुछ जानते हुए कि उनका एक साल कितना कीमती है इतनी हिम्मत दिखाते है कि सारे साल मेहनत नहीं करते तो परिणाम आने पर उसे अपनाने की भी हिम्मत रखे. क्योंकि अच्छे अंक प्राप्त करने कि एक सिर्फ एक ही कुंजी है और वो है कड़ी मेहनत |




result

अभिभावकों से भी निवेदन है कि वह भी अपने बच्चों की तुलना और बच्चों से न करें. सभी बच्चों में अपनी अलग प्रतिभा होती हैं. क्योंकि पाँचों ऊँगलियाँ बराबर नहीं होती परंतु सबका अपना अलग महत्व होता है. अब वक्त बच्चों को डाँटने का नहीं है अब जैसा भी परिणाम आए, बच्चों को प्यार से समझाए कि वह आगे से मेहनत करें ताकि अगले साल और अच्छे नंबर ला सके. क्योंकि रिज़लट आने के बाद कई ऐसी अप्रिय घटनाएँ सुनने में आती है जो कि बहुत दुखद होती हैं. हाँ, यह सच है कि एक साल की कीमत बहुत ज्यादा होती है पर किसी की जान से ज्यादा नहीं होती. मेहनत करनी अपने हाथ में होती है. क्योंकि सोते हुए शेर के मुँह में हिरण खुद भोजन नहीं बन कर आता उसके लिए भी उसे मेहनत करनी पड़ती है जबकि वह जंगल का राजा होता है. अगर मान लो रिज़लट कुछ ऐसा-वेसा आता है तो बच्चे को डराएँ नहीं बहुत ही प्यार से समझाए. 

परीक्षा परिणाम मे कुछ ध्यान देने वाली बातें:- 

१. रिज़लट जैसा भी आए बच्चों को ज्यादा डाँटे नहीं. 
२. कभी भी अपने बच्चे की तुलना उनके भाई-बहन, पड़ौसी व रिश्तेदारों के बच्चों से न करें.
३. क्योंकि हर बच्चे में अपने अलग गुण होते हैं 
४. मेहनत के हिसाब से हमेशा फल मिलता है तो इस बात पर ज्यादा ध्यान दें कि बच्चे उलटी-सीधी बातों पर समय बरबाद न करें 
५. बच्चों को समझाए कि आज के समय में बहुत कॉमपीटिशन है अगर तुम नं १ नहीं आ सकते तो कम से कम अच्छे नं तो जरूर लाए. 
६. बच्चों पर विषय चुनने पर अपनी मरजी न लादें. उन्हें खुद चयन करने दें. ताकि आगे चलकर उनपर पढ़ाई का बोझ न पड़े.
७. क्योंकि १०वीं के बाद विषय चुनने होते हैं. चाहे सांईस हो, कॉमर्स हो या (Arts), सभी लाइनों में बहुत विकल्प होते हैं. जरूरत है तो सिर्फ अच्छी मेहनत की |