ममी के बारे मे जानकारी हिन्दी मे -

ममी के बारे मे जानकारी हिन्दी मे -

ममी के बारे मे जानकारी हिन्दी मे || History Of Mummy

आपने ममी का नाम तो सुना होगा और ममी क्या होते है जानते भी होंगे लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है इन्हे ममी क्यू बोलते है और क्यो बनाया जाता है ममी और ममी कहा पाई जाती है ?

history of mummy


प्राचीन सात आश्चर्यों मे से एक है मिस्र का पिरामिड शायद आप इसके बारे मे जानते भी होंगे अगर नहीं जानते तो यहा क्लिक से पढे पिरामिड के बारे मे 15 रोचक तथ्य | ममी - किसी मृत शरीर पर लेप आदि लगाकर मृत शरीर को सालो तक सुरक्षित रखने के तरीको को ममी कहा जाता है और लोगो का ऐसा मानना है की मिस्र के पिरामिड के अंदर ममी को रखा गया है |



ममी की उत्पत्ति प्राचीनकाल मे मिस्र के लोगो द्वरा हुई | मिस्र के लोग और बाकी देशो मे लोग अपने करीबी रिसतेदार और प्रिय जानवरो की मृत्यु के बाद उनकी ममी बनाकर सालो तक उन्हे संभाल कर रखते थे | मिस्र मे लगभग एक मिलयन ममी है और भी ऐसे कई देश है जहा पर ममी आज भी पाई जाती है |

ममी का मतलब क्या है ||

क्या आपको मालूम है ममी का क्या मतलब है | ममी अरबी भाषा के मुमिया से बना बना हुआ है जिसका अरबी भाषा मे अर्थ होता है मोम या तारकोल के लेप से रखी गयी वस्तु | अगर आपको लगता है की मिस्र मे ममी बनाने की शुरुवात हुई थी तो ममी शब्द प्राचीन मिस्र के शब्द है तो आप गलत है | 

ममी क्यो बनाया जाता था |

प्राचीन मिस्र और भी कई देशो मे लोग पुनर्जन्म मे विश्वास रखते थे और उनका मानना था की मृत व्यक्ति के शरीर को संभालकर रखना चाहिए | ऐसा करने से मृत व्यक्ति अपने शरीर को पा सकता है | और इसी कारण प्राचीन समय के लोगो ने ममी बनाना चालू किया | ओर आज तक ममी बनाने की प्रक्रिया चल रही है |



कैसे बनाया जाता है ममी

पहले के समय एक ममी बनाने मे 70 दिन लग जाते थे और ममी को बनाने के लिए धर्मगुरु और पुरोहित के साथ साथ विशेसज्ञ भी होते थे | ममी बनाने के लिए सबसे पहले मृत शरीर की पूरी नमी को खत्म किया जाता है और ऐसा करने मे कई दिन का समय लगता था | जब शरीर की नमी खत्म हो जाती थी तो पूरे मृत शरीर पर परत दर परत काटन की पट्टिया लपेटा जाता था | 

जब पूरे शरीर पर पट्टी लपेट ली जाती थी तो शरीर के आकार से मिलते जुलते लकड़ी के ताबूत तैयार किए जाते थे और फिर इन ताबूत को रंगा जाता था | और यह सब जब पूरा हो जाता था तब धर्मगुरु के मतानुसार इस पर धार्मिक वाक्य आदि लिख दिया जाता था और एक धार्मिक समारोह करके ताबूत को शरीर सहित चबूतरे पर सम्मान के साथ रख दिया जाता था |


ममी का इतिहास काफी पुराना है | हम समय समय पर आपके लिए कई तरह की जानकारी लाते है अगर आपको जानकारी अच्छी लगी ममी के बारे मे तो आप हमारी सराहना कर सकते है |
रहस्यमय 130 साल पुरानी डेडबॉडी के बारे मे

रहस्यमय 130 साल पुरानी डेडबॉडी के बारे मे

रहस्यमय 130 साल पुरानी डेडबॉडी के बारे मे

राजस्थान की राजधानी जयपुर के अल्बर्ट मियूजियम मे रखी हुई 322 ईसा पूर्व की ममी इन दिनो चर्चा मे है | यह ममी है मिस्र राजघराने के पुजारी परिवार की महिला तूतू की | यहा बहुतों की तादाद मे लोग पाहुचते है और प्राचीन इतिहास एंव मौत के बाद के रहस्यो को जानकार हेरान हो जाते है | ममी से जुड़े जानकारी लोग बहुत ही उतसूक्ता से सुनते है और उतने ही उत्सुकता से सैकड़ों साल पुरानी डेडबॉडी का एक्सरे प्रिंट भी देखते है | यह मूजियम 130 साल पुराना है और इतना ही समय हो गया इस मूजियम मे रखे ममी को रखे हुए | यह ममी 19वी सदी के अंतिम दशक मे मिस्र के काहिरा से जयपुर लाया गया था | इस ममी की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए 6 साल पहले एक्सरे किया गया |

Mummi


130 साल से रखी है डेडबॉडी, रहस्यमय है इसकी कहानी |



  • इस म्यूजियम मे रखी ममी तूतू नामक महिला की है | और इस ममी को प्राचीन नगर पैनोपोलिस मे अखमीन से प्राप्त किया गया था | इस ममी को बताया जाता है 322 से 30 ईस्वी पूर्व के टौलोंमाइक युग की है | यह महिला खेम नामक देव के उपासक पुरोहित के परिवार की सदस्य थी |
  • ममी के देह के ऊपरी भाग पर प्राचीन मिस्र का पंखयुक्त भृंग [ गुबरैला ] का प्रतीक अंकित है जो  मृत्यु के बाद जीवन और पुनर्जन्म का का प्रतीक माना जाता है | इस ममी के पवित्र भृंग के दोनों और प्रमुख देव का शीर्ष तथा सूर्य के गोले को पकड़े श्येन पक्षी मे होरस देवता का चित्र है |
  • तूतू ने नीचे चोड़े मोतियो से सज्जित परिधान गर्दन से कमर तक कालर के रूप मे पहना हुआ है | इस बॉडी पर पंखदार देवी का अंकन डेडबॉडी की सुरक्षा के लिए किया गया है | ममी के नीचे के तीन हिस्सो मे से पहले हिस्से पर, चीता की चेय्या पर डेडबॉडी के दोनों ओर महिलाए बनी हुई है | दूसरे हिस्से पर पाताल लोक के निर्णायकों की तीन बैठी हुई छविया है | और ममी के तीसरे हिस्से पर होरस देव के चार बेटो जो चारो दिशाओ के रक्षक दिक्पाल है | और इनकी छविया कर्म से मानव, सियार और बाज के रूप मे दिखाए गए है |
ई जाती है. यह महिला खेम नामक देव के उपासक पुरोहितों के परिवार की सदस्य थी. (फोटो- म्यूजियम में रखी ममी

)