muharram kab hai 2020 date | muharram 2020 date

muharram kab hai 2020 date | muharram 2020 date

हर साल muharram बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है इसलिए इन्टरनेट पे search करते है muharram कब है 2020, 2021 2020 में मुहर्रम किस तारीख को है तो आज की पोस्ट में हम आपको बता रहे हैं मुहर्रम कब है 2020 में और मुहर्रम क्यों मनाया जाता है -

मुहर्रम का इतिहास बहुत पुराना है यह इस्लाम धर्म मानने वाले के लिए बहुत ही ख़ास त्यौहार है - इस्लाम के अनुसार मुहर्रम हिजरी सन का पहला महीना है जिसे हिजरी के नाम से जाना जाता है 

इस्लाम के ४ पवित्र महीने में से एक महीना मुहर्रम है क्योकि इस्लाम धर्म के पैगम्बर ने इस महीने को अल्लाह का महीना कहा है 

Muharram 2020 Date | Muharram Kab Hai 2020 | 2020 Muharram Date and Muharram Qawwali


इस्लाम का इतिहास मुहर्रम को क्यूँ मानते है -

ईराक देश में एक यजिद नाम का बादशाह था जो पूरी इंसानियत का दुश्मन था और वह खुद को अल्लाह की उपाधि देता था इसलिए पैगमबर साहब के नवासे को अपने बातों को मानने के लिए मजबूर करना चाहता था क्योकि वह जानता था अगर नवासे [ हजरत इमाम हुसैन ] ने बात मान ली तो सारे इस्लाम के मानने वाले याजिद को खुदा मान लेते लेकिन इमाम हुसैन ने यजिद को खुदा मानने से इनकार कर दिया इसलिए जंग की शुरुवात यजिद ने की और इमाम हुसैन के पुरे परिवार को नस्तो नाबूद यानी ख़त्म कर दिया .
जब यह सब हो रहा है था वह मुहर्रम का महीना था और जब इस्लाम के खलीफा इमाम हुसैन को शहीद किया गया तो वह मुहर्रम की दशवी तारीख थी .

इसलिए हर साल इस्लाम के मानने वाले मुहर्रम मनाते है और जिसे गम का त्यौहार भी कहा जाता है  - इस साल यानी 2020 का मुहर्रम 

muharram 2020 date

muharram start  August 21st in 2020



2019 का मोहर्रम कितने तारीख को है muharram kab hai

2019 का मोहर्रम कितने तारीख को है muharram kab hai

मुहर्रम यानी मुस्लिम धर्म के पंचाग का पहला महीना है इस साल का यानी की 2019 का मुहर्रम 10 सितंबर को आने वाले है तो जो भाई जानना चाहते थे 2019 का मोहर्रम कितने तारीख को है muharram kab hai ? उन्हें जवाब तो मिल गया होगा ? मुहर्रम पुरे दस दिन तक मनाया जाता है साथ ही यह महीना इस्लाम के मानने वाले के लिए एतिहासिक रूप से बहुत ही खाश है.

मुहर्रम क्यों मनाया जाता है ?

इस्लाम का दुश्मन यजिद नाम का ईराक का बादशाह था जो पूरी दुनिया के इंसानियत का दुश्मन था . मोहम्मद मुस्ताफ़ा के नवासे ईमान हुसैन ने जब यजिद को खुदा मानने से इनकार कर दिया तो यजिद ने उनके खिलाफ जंग का एलान कर दिया. इस जंग में हजरत हुसैन और परिवार बड़े बच्चे महिलाओ का क़त्ल कर दिया गया . जब क़त्ल हुआ तब इस्लाम का पहला महिना यानी की मुहर्रम का महीना था और तारीख इस्लामिक कैलेंडर अनुसार 10 तारीख थी . इसी कारण इस्लाम के मानने वाले नए महीने को नए साल के रूप में नहीं मनाते साथ ही इस महीने को गम और दुःख के रूप में मनाया जाता है .

2019 का मोहर्रम कितने तारीख को है


अगर आप सोचते है मुहर्रम एक त्यौहार है तो आप गलत है क्योकि यह कोई त्यौहार नहीं बल्कि मातम मनाया जाता है और यह मुस्लिम रीती रिवाज का एक तरिका है .   


मुहर्रम में जुलुस भी निकाला जाता है इस जुलुस में खुनी मंजर को याद किया जाता है. इसलिए कर्बला की जंग में शहीदों को याद करने के लिए मासिया सूना जाता है जो इतना गम गिन होता है की आपके आँखों में आंसू भर दे .

इस दिन मुस्लिम भाई ताजिया भी बनाते है और ताजिया का जुलिस लेकर अपने आस पास के क्षेत्रो में जो कर्बला होता है वह पर ले जाकर ताजिया को दफ़न कर देते है और यह मुहर्रम के 10वी तारीख को किया जाता है .

वही शिया लोग ताजिया के साथ अपने आप को कोड़े मारते है और अपने आप को लहू लुहान करके गम मुहर्रम को याद करते है .
शांति और अहिंसा का सबक - मुहर्रम पर विशेष muharram kya hai

शांति और अहिंसा का सबक - मुहर्रम पर विशेष muharram kya hai

muharam kya hai muharram kyo manaya jata hai kya aapko pata hai agar nahi to aaj ham aapko mahrram par ek vishesh lekh de rahe hai
मुहर्रम शरीफ इस्लामी वर्ष [ हिजरी सन ] का पहला महिना है मुहर्रम के आगमन पर विशेष रूप से इमाम हुसैन की सहादत को याद किया जाता है | मुहर्रम की दसवी तारीख को ही इंसानियत के मसीहा इमाम हुसैन इब्ने अली ने इस्लाम को अनैतिकता के चंगुल मुक्त कर शांति, न्याय और अहिंसा के सबक दिए | न सिर्फ मुसलमानो के लिए हर उस व्यक्ति के लिए जिसके साथ जुल्म, ज्यादती और अन्याय हुआ हो | इमाम हुसैन की अहिंसक क्रान्ति मानव अधिकार, न्याय, और धैर्य का उच्चतम उदाहरण है | वह चाहे किसी भी  धर्म से सम्बंध रखता हो उसके दुख स्वर मे इमाम हुसैन का दर्द शामिल है | अन्याय के विरुद्ध दुनिया की कोई भी उल्लेखनीय क्रान्ति इमाम हुसैन [ रजीयीअल्लाहु अनहु ] के एतिहासिक आंदोलन से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी |

makka madina
ईद के दिन अल्लाह का इनाम - ईद क्या है
यह महान आंदोलन आदर्श बलिदान 1400 से अधिक वर्षो से भी पहले हुआ है लेकिन अन्याय, हिंसा और आतंकबाद के खिलाफ यह आज भी दुनिया के लिए वैश्विक संघर्ष का प्रतीक है | इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान मे जालिम यजीदियों को संबोधित करते हुए फरमाया था कि अगर तुम्हारा कोई धर्म नहीं है तो कम से कम इस दुनिया मे अपना जीवन एक स्वतंत्र व्यक्ति की तरह जियो |



क्योकि एक स्वतंत्र को दूसरों की तुलना मे अच्छे और बुरे के बीच स्पष्ट अंतर महसूस होता है | दरअसल इमाम हुसैन को महान मानवीय इस्लामी सिद्धांतों के प्रतिस्थापक के रूप मे देखा जाता है | उन्होने बहुत ही धेर्य और धृदता के साथ अत्याचारी और अन्यायी शासक यजीद का विरोध कर पहली बार लोकतान्त्रिक नेतृव की इस्लामी अवधारणा परस्तुत की |

इमाम हुसैन ने कहा - हक [ सच ] और बातिल [ झूठ ] कभी एक नहीं हो सकते यह ऐतिहासिक तथ्य तब साबित हो गया जब उन्होने यजीद के राजदूत से कहा "मुझ जैसा व्यक्ति यजीद जैसे तानाशाह की निष्ठा कभी नहीं कर सकता" |

यदि हम इस इस दृष्टिकोण को सामने रखे  तो बड़ी आसानी से इस तथ्य का एहसास हो जाएगा की मौजूदा दौर के तथाकथित "मुजाहिदीन" की हकीकत खुखार उग्रवादियो और इस्लाम के झुठे दारोदारों के आलवा कुछ नहीं है | यह लोग गैरमुस्लिम और मुसलमानो को हिंसा और बार्बरता का निशाना बनाते है | इसलिए इस तरह के कृत्य इमाम हुसैन के सच्चे जिहाद और सहादत के सार के विलकुल विपरीत है |