शून्य की खोज कैसे किसने की जानिए

शून्य की खोज कैसे किसने की जानिए

शून्य की खोज कैसे किसने की जानिए - Zero Ki Khoj Kisne kiya


आपने अक्सर एक सवाल Social Media के अलग अलग समूहो मे सुना होगा || और यह सवाल काफी प्रचलित भी है Social Media पर || और साथ मे Zero की Khoj ||

Zeero Ki Khoj



शून्य की खोज के बारे मे आपका क्या जवाब है ?? Zero Ki Khoj Kaise ||
सवाल अगर शून्य का आविष्कार 5वी सदी मे आर्यभट्ट जी ने किया  तो फिर हजारो साल पहले रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए | बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे || कृपा करके यदि जवाब पता हो तो बताए ||


इस सवाल का जवाब जानने से पहले हम आपको बता देते है की कथित तौर पर शून्य की खोज  का श्रेय आर्यभट्ट जी को जाता है ||



आर्यभट्ट एक महान गणितज्ञ और खगोलविद थे || जिनका जन्म पाटलीपुत्र मे हुआ था जिसे आज हम पटना के नाम से भी जानते है || लेकिन बहुत से मतो के अनुसार उनका जन्म दक्षिण भारत [ केरल ] मे भी माना जाता है || लेकिन यह सही मायने मे कह पाना की आर्यभट्ट यहा जन्मे थे तो यह एक मुश्किल बात है क्योकि आर्यभट्ट के जन्मस्थान को लेकर बहुत सारे विवाद है ||



  • आर्यभट्ट एक महान गणितज्ञ थे || और इन्होने ही गणनाओ को एक विशेष चिन्ह द्वारा लिखने की शुरुवात की थी || उनसे पहले किसी भी लेख मे गणनाओ को शब्दो मे लिखा जाता था || Ex - एक दो तीन गयारा पंद्रा बीस आदि || पर आर्यभट्ट ने गणनाओ को आधुनिक नम्बर सिस्टम मे लिखना शुरू किया || Ex - 1 2 3 11 20 15 ||


Important - यहा पर ध्यान दे की 1 2 3 अंग्रेजी चिन्ह है || जबकि आर्यभट्ट ने इनकी जगह किसी और चिन्ह का प्रयोग किया था ||



अब हम अपने सवाल पर वापस आते है अगर शून्य का आविष्कार 5वी सदी मे आर्यभट्ट जी ने किया तो फिर हजारो साल पहले रावण के 10 सिर बिना शून्य के कैसे गिने गए | बिना शून्य के कैसे पता लगा कि कौरव 100 थे || कृपा करके यदि जवाब पता हो तो बताए ||


यह एक तर्कसंगत सवाल है || आखिर बिना शून्य के 10, 100 या अन्य संख्याओ की गणना कैसे हो सकती है ||  तों इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमे पहले इतिहास को जानना होगा || पर उससे पहले हम आपको बता दे की खोज [ discovery] और आविष्कार [ Invention ] मे क्या अंतर है ||

खोज - खोज का अर्थ होता है किसी ऐसी को समाज के सामने लाना जिसके बारे मे समाज को जानकारी ना हो परंतु वह हो ||

आविष्कार - किसी नई विधि रचना या प्रक्रिया के माध्यम से कुछ नया बनाना आविष्कार कहलाता है ||

Ex - न्यूटन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त की खोज की अर्थात गुरुत्वाकर्षण न्यूटन के पहले भी था || तो गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त को न्यूटन की खोज कहा जाएगा ना की आविष्कार ||


कथित तौर पर शून्य की खोज करने वाले आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी मे आता देहांत 550 ईस्वी मे हुआ और रामायण तथा महाभारत का काल इससे भी पुराना है || वर्तमान मे हिन्दी भाषा का लेखन कार्य देवनागरी लिपि मे किया जाता था || और इससे पहले की लिपि ब्राह्मी लिपि मानी जाती थी || 

इस आधार पर हम कह सकते है की की शून्य की खोज देवनागरी लिपि के परचलन के बाद हुई || इससे पहले शून्य की परिकल्पना भी नहीं थी || ब्राह्मी लीपी मे गणना की व्यस्था थी लेकिन इस मे गणना शून्य नहीं था || आप चित्र माध्यम से समझ सकते है की शून्य के बिना भी 10 20 या 100 जैसी संख्याओ की गणना हो सकती थी ||


अब आप यह सवाल शायद ना पूछे की क्योकि अब आपको पता लग गया होगा की रावण के 10 सिर और कौरवो की संख्या गिनना उस समय मे कैसे सम्भव हुआ ||



शून्य - शून्य की कहानी बहुत रोचक है || क्योकि शून्य एक ऐसी संख्या है जो स्वय मे कुछ नहीं है मतलब यह खाली है लेकिन खाली होते हुए भी पूर्ण है || एक बार मैंने एक पुस्तक पढ़ी थी जिसमे अध्यात्म और शून्य का संबन्ध बताया गया था ||
जिसमे शून्य को ईश्वर बताया गया था || उस पुस्तक के अनुसार भारतीय संस्कृति मे आत्मा को परमात्मा [ ब्रहम ] का अंश माना गया है || साथ ही भारतीय संस्कृति में ‘अहं ब्रह्मास्मि’ भी कहा गया है और उस ब्रह्म को पूर्ण माना गया है।

यह पढे = जूता इतिहास के बारे में 15 अजब-गजब तथ्‍य

शून्य का आधार कुछ ऐसा ही बताया गया है || शून्य की तरह ईश्वर को भी पूर्ण माना गया है ||
 0 (परमात्मा)-0 (आत्मा)= 0 (परमात्मा) 

इसको आप इस तरह समझ सकते है आत्मा = परमात्मा |


शून्य की खोज किसने की और उससे जुड़े रोचक बातो पर आपकी क्या राय है हमे आप अपनी राय दे सकते है | और अगर आपके पास शून्य पर ज्यादा जानकारी हो तो हमे बता सकते है || जिससे हम लोगो आपके ज्ञान को बता सके |
सूक्ष्मदर्शी की खोज किसने की जानिए हिन्दी मे

सूक्ष्मदर्शी की खोज किसने की जानिए हिन्दी मे

सूक्ष्मदर्शी की खोज किसने की जानिए हिन्दी मे ||

आपने बहुत बार सूक्ष्मदर्शी का नाम सुना होगा और प्रयोग भी किया होगा पर क्या आपको पता सूक्ष्मदर्शी की खोज या आविष्कार किसने किया || अगर नहीं तो आज हम आपको सूक्ष्मदर्शी क्या है और इसके क्या प्रयोग है और इसके खोजकर्ता कौन है के बारे मे बताने वाले है ||



सूक्ष्मदर्शी क्या है ?

सूक्ष्मदर्शी (अंग्रेज़ी:माइक्रोस्कोप) एक वैज्ञानिक उपकरण है। सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार जेड. जानसेन (नीदरलैण्ड) ने वर्ष 1590 में किया था। यह छोटी वस्तुओं को आवर्धित करके बड़ा कर देता है,; अतः जिन वस्तुओं को आँखों से नहीं देखा जा सकता, उन्हें इस उपकरण से देखा जा सकता है।|



सूक्ष्मदर्शन के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है क्योंकि इसकी खोज के बाद वस्तुओं को उनके वास्तविक आकार से कई हजार गुना बड़ा करके देखना संभव हुआ था।.

सूक्ष्मदर्शी के कितने प्रकार || How Many types Of Microscope


सूक्ष्मदर्शी [ माइक्रोस्कोप ] के प्रकार आप नीचे देख सकते है -

  • प्रकाशकीय सूक्ष्मदर्शी
  • इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
  • परमाण्विक बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र
  • घर्षण बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र
  • अवलोकन टनलिंग सूक्ष्मदर्शी यंत्र
  • अवलोकन अन्वेषिका सूक्ष्मदर्शी यंत्र
  • अवलोकन वोल्टता सूक्ष्मदर्शी यंत्र


सूक्ष्मदर्शी  के उपयोग  Use Of Microscope


  • सूक्ष्मदर्शी का उपयोग जीव विज्ञान मे मुख्य रूप से किया जाता है |  विश्व भर सूक्ष्मदर्शी का उपयोग कई कार्यो के लिए किया जाता है || जैसे - रोगो के नियंत्रण, नई औषधियों की खोज के लिए || आज के समय मे बहुत ही आधुनिक प्रकार के सूक्ष्मदर्शी आ चुके है जोकि पहले के सूक्ष्मदर्शी से कई गुना अच्छे है ||


  • आज सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग वस्तुओ को देखने के साथ साथ और भी छेत्रों मे इसका प्रयोग किया जाता है -  द्रव्यों के कणों के मापने, गणना करने और तौलने के लिए 
  • आज सूक्ष्मदर्शी का उपयोग कायचिकित्सा (Medicine), जीवविज्ञान (Biology), शैलविज्ञान (Perology), मापविज्ञान (Metrology), क्रिस्टलविज्ञान (Crystallography) एवं धातुओं और प्लास्टिक की तलाकृति के अध्ययन में व्यापक रूप से ही हो रहा है||

सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार या खोज पोस्ट आपको कैसी लगी हमे बताना न भूले और अगर आपके पास कोई सवाल है तो पूछ सकते है - नीचे कमेनेट के माध्यम से ||